पोखऱण परमाणु परीक्षण: सेना की वर्दी पहन कर करते थे काम, वैज्ञानिकों ने 4 अमेरिकी सैटेलाइट को भी दिया चकमा

अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA भारत पर नजर रखे हुए थी और उसने पोकरण पर निगरानी रखने के लिए 4 सैटलाइट भी लगाए थे। हालांकि भारत ने CIA और उसके सैटलाइटों को चकमा देते हुए परमाणु परीक्षण कर दिया।

Pokharan-II पोकरण(Pokhran)परमाणु परीक्षण: इसके सफल परीक्षण के बाद अमेरिका समेत पूरी दुनिया दंग रह गई थी

पोकरण(Pokhran)परमाणु परीक्षण: इसके सफल परीक्षण के बाद अमेरिका समेत पूरी दुनिया दंग रह गई थी

भारत आज विश्व में एक परमाणु शक्ति संपन्न देश के तौर पर जाना जाता है। भारत के परमाणु परीक्षण से लेकर सबसे दिलचस्प कहानी पोखरण परमाणु परीक्षण की ही है। 11 मई, 1998 को भारत ने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई में राजस्थान के जैसलमेर के पास पोखरण में सफलतापूर्वक परमाणु परीक्षण किया था। भारत ने पोखरण में अपने शक्ति-1 न्यूक्लियर मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया था। इस ऑपरेशन को सरकार ने पोखरण-II (Pokharan-II) का नाम दिया था, जिसे ‘ऑपरेशन शक्ति’ के नाम से भी जाना जाता है। इस टेस्ट को राजस्थान स्थित भारतीय सेना के पोखरण टेस्ट रेंज में अंजाम दिया गया था।

इससे पहले मई 1974 में भी पोखरण-I के नाम से टेस्ट किया गया था, जिस ऑपरेशन को कोडनेम ‘स्माइलिंग बुद्धा’ नाम दिया गया था। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के लिए परमाणु बम परीक्षण करना आसान नहीं था। परमाणु परीक्षण के फैसले को लेकर देश में भी विपक्षी दलों ने उनपर निशाना साधा था। लेकिन उस वक्त अटल बिहारी वाजयपेयी ने साफ कर दिया था कि भारत परमाणु संपन्न शक्ति बनकर रहेगा। लेकिन भारत के लिए पोखऱण परीक्षण इतना आसान नहीं था।

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वो इसलिए क्योंकि अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA भारत पर नजर रखे हुए थी और उसने पोकरण पर निगरानी रखने के लिए 4 सैटलाइट भी लगाए थे। हालांकि भारत ने CIA और उसके सैटलाइटों को चकमा देते हुए परमाणु परीक्षण कर दिया। इस प्रॉजेक्ट के साथ जुड़े वैज्ञानिक कुछ इस कदर सतर्कता बरत रहे थे कि वे एक दूसरे से भी कोड भाषा में बात करते थे और एक दूसरे को छद्म नामों से बुलाते थे। ये झूठे नाम इतने हो गए थे कि कभी-कभी तो साथी वैज्ञानिक एक दूसरे का नाम भूल जाते थे।

परीक्षण के लिए पोखरण को ही चुना गया था क्योंकि यहां मानव बस्ती बहुत दूर थी। आपको बता दें कि जैसलमेर से 110 किमी दूर जैसलमेर-जोधपुर मार्ग पर पोखरण एक प्रमुख कस्बा है। वैज्ञानिकों ने इस मिशन को पूरा करने के लिए रेगिस्तान में बड़े कुएं खोदे और इनमें परमाणु बम रखे गए। कुओं पर बालू के पहाड़ बनाए गए जिन पर मोटे-मोटे तार निकले हुए थे।

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धमाके से आसमान में धुएं का गुबार उठा और विस्फोट की जगह पर एक बड़ा गड्ढा बन गया था। इससे कुछ दूरी पर खड़ा 20 वैज्ञानिकों का समूह पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए था।पोकरण परीक्षण रेंज पर 5 परमाणु बम के परीक्षणों से भारत पहला ऐसा परमाणु शक्ति संपन्न देश बन गया, जिसने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए थे।

इस मिशन को अंजाम देने वाले वैज्ञानिकों की टीम में पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम भी थे। यह मिशन इतना जरूरी और गुप्त रखा गया था कि वैज्ञानिकों की टीम पोखरण में सेना की वर्दी में रहती थी ताकि सभी को यहीं लगे की सेना वहां काम कर रही है।

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