प्रधानमंत्री मोदी ने कोच्चि-मंगलुरु गैस पाइपलाइन का उद्घाटन किया, 21 लाख नए लोगों को मिलेगा लाभ

प्रधानमंत्री मोदी (PM Narendra Modi) ने बताया कि ऊर्जा संसाधनों में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी अभी के 6.2 फीसदी से बढ़ाकर 2030 तक 15 फीसदी तक करने का लक्ष्य है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने ऊर्जा क्षेत्र को लेकर अपनी सरकार का खाका देश के सामने रखते हुये बताया कि ऊर्जा उपभोग में स्वच्छ प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को दोगुने से अधिक किया जायेगा और पूरे देश को एक गैस पाइपलाइन ग्रिड से जोड़ा जायेगा ताकि लोगों और उद्योगों को किफायती ईंधन मुहैया कराया जा सके।

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प्रधानमंत्री मोदी (PM Narendra Modi) ने 450 किलोमीटर लंबी कोच्चि-मंगलुरू प्राकृतिक गैस पाइपलाइन राष्ट्र के नाम समर्पित करते हुए बताया कि उनकी सरकार आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिये राजमार्ग, रेलवे, मेट्रो, विमानन, जल, डिजिटल और गैस संपर्क पर अभूतपूर्व काम कर रही है।

गौरतलब है कि इस पाइपलाइन को तीन हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। प्रधानमंत्री ने बताया कि एक तरफ पांच-छह साल में प्राकृतिक गैस पाइपलाइन के नेटवर्क को दोगुना कर करीब 32 हजार किलोमीटर का बनाया जा रहा है, दूसरी ओर गुजरात में सौर व पवन ऊर्जा को मिलाकर दुनिया के सबसे बड़े हाइब्रिड अक्षय ऊर्जा संयंत्र पर काम चल रहा है। इसके अलावा आवागमन के इलेक्ट्रिक साधनों के साथ ही जैव ईंधन के विनिर्माण पर जोर दिया जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी (PM Narendra Modi) ने बताया कि ये उपाय देश को प्रदूषण फैलाने वाले कोयला तथा तरल ईंधनों पर उच्च निर्भरता कम करने में मदद करेंगे। अभी देश की कुल ऊर्जा जरूरत में 58 फीसदी की पूर्ति कोयले से होती है, जबकि पेट्रोलियम व अन्य तरल ईंधन 26 फीसदी योगदान देते हैं। देश में उपयोग किये जाने वाले विभिन्न ऊर्जा संसाधनों में प्राकृतिक गैस की महज छह फीसदी और अक्ष्य ऊर्जा की दो फीसदी से भी कम हिस्सेदारी है।

प्रधानमंत्री मोदी (PM Narendra Modi) ने बताया कि ऊर्जा संसाधनों में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी अभी के 6.2 फीसदी से बढ़ाकर 2030 तक 15 फीसदी तक करने का लक्ष्य है। यह अपेक्षाकृत स्वच्छ विकल्प है और इसे पाइपलाइन से ढोया जा सकता है, जिससे वाहनों के माध्यम से होने वाली ढुलाई में खर्च होने वाले ईंधन की बचत में भी मदद मिलेगी।

इसके साथ ही 10 साल की अवधि में गन्ना व अन्य कृषि उत्पादों से तैयार इथेनॉल करीब 20 फीसदी पेट्रोल का स्थानापन्न कर देगा। यह ईंधन की जरूरतों की पूर्ति के लिये तेल के आयात पर देश की निर्भरता के साथ ही कार्बन का उत्सर्जन कम करेगा।

सौर व पवन ऊर्जा के उपलब्ध पर्याप्त स्रोतों का इस्तेमाल कर अक्षय ऊर्जा से बिजली के उत्पादन पर ध्यान देने तथा बैटरी से चलने वाले वाहनों को बढ़ावा देने से भारत को सीओपी-21 के कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य को पाने में मदद मिलेगी।

प्रधानमंत्री (PM Narendra Modi) ने बताया कि सरकार पूरे देश को एक पाइपलाइन ग्रिड से जोड़ने का लक्ष्य लेकर काम कर रही है। यह स्वच्छ ईंधनों की उपलब्धता को बेहतर बनायेगा और साथ ही शहरी गैस परियोजनाओं में मदद करेगा।

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