पाकिस्तान पर मंडरा रहा ब्लैक-लिस्ट होने का खतरा

वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (FATF) की इकाई एशिया पैसिफिक ग्रुप (APG) ने पाकिस्तान को बड़ा झटका दिया है। एशिया पैसिफिक ऑन मनी लॉन्ड्रिंग ने 5 अक्टूबर को मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग पर अपनी रिपोर्ट जारी की है। यह रिपोर्ट फाइनेंसियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के सालाना अधिवेशन से एक हफ्ते पहले जारी की गई है, जिसमें पाकिस्तान की ‘ग्रे लिस्ट’ की स्थिति पर फैसला होना है। उसने अपनी रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला है कि पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् की प्रतिबंध समिति 1267 द्वारा 26/11 के मास्टरमाइंड हाफिज सईद और जमात उद-दावा से संबंधित अन्य आतंकियों पर लगाए गए प्रतिबंधों को पूरी तर से लागू नहीं किया है।

FATF

FATF की इकाई APG की रिपोर्ट में पाकिस्तान हर मोर्चे पर फिसड्डी साबित हुआ है। मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग के खिलाफ कार्रवाई के 10 मानदंडों में पाकिस्तान 9 में फिसड्डी साबित हुआ है जबकि एक में उसे ‘मध्यम’ स्थान प्राप्त हुआ है। APG का कहना है कि यही रवैया लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों के साथ भी है। APG ने म्युचुअल इवैलुएशन रिपोर्ट ऑफ पाकिस्तान नाम की रिपोर्ट में कहा गया है कि देश को अपने धन शोधन या आतंकी वित्तपोषण के जोखिमों की ‘पहचान, आकलन और समझ’ होनी चाहिए। जिसमें पाकिस्तान में सक्रिय आतंकवादी समूहों जैसे कि दाएश, अल-कायदा, जमात-उद-दावा से जैश-ए-मोहम्मद सहित अन्य आतंकी समूहों से जुड़े जोखिम शामिल हैं।

रिपोर्ट मे कहा गया है कि पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (UNSC) की प्रतिबंध समिति 1267 द्वारा सूचीबद्ध किए गए व्यक्तियों और संगठनों के खिलाफ पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं। खासतौर से लश्कर-ए-तैयबा, जमात उद-दावा (जेयूडी) और फलाह-ए-इंसानियत (एफआईएफ) सहित अन्य संगठन शामिल हैं। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि UNSC की 1267 कमेटी की रिपोर्ट में 2008 में जेयूडी और 2012 में एफआईएफ का नाम शामिल होने के बावजूद ये दोनों संगठन पाकिस्तान में खुलेआम जनसभाएं करते हैं और फंड जुटाते हैं। पाकिस्तानी मीडिया में ऐसी कई रिपोर्ट सामने आई हैं जिनमें मानवीय राहत और सहायता के नाम पर एफआईएफ को चंदा वसूलते देखा गया है।

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इन संगठनों की ओर से एंबुलेंस सेवाएं जारी रखने पर भी सवाल उठाए गए कि इनकी फंडिंग के खिलाफ कारगर कार्रवाई की गई है या नहीं. यह रिपोर्ट पाकिस्तान की कोशिशों के लिए झटका है क्योंकि उसने हाल ही में कहा था कि अब पाकिस्तान में कोई आतंकी संगठन सक्रिय नहीं है। पाकिस्तान पर ब्लैक लिस्ट होने का खतरा भी मंडरा रहा है। मनी लांड्रिंग पर नजर रखने वाली अतंरराष्ट्रीय एजेंसी FATF ने जून 2018 में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाल दिया था और उसे 15 महीने का समय दिया था। पाकिस्तान को मिली डेटलाइन सितंबर में खत्म हो चुकी है।

APG की ओर से पाकिस्तान के खिलाफ प्रतिकूल तथ्य पाए जाने के बाद अक्टूबर 2019 से उसे नकारात्मक रडार पर रखा जाएगा। इसके मायने हैं कि पाक के लिए दिक्कतें और बढ़ेंगी। वो संदिग्ध सूची में बना रहेगा और उसे संभवत: ब्लैक लिस्ट में डालने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। 228 पेज की इस रिपोर्ट के आधार पर ही अगले हफ्ते पाकिस्तान की FATF रैंकिंग पर फैसला होगा। माना जा रहा है कि FATF पेरिस में 13 से 18 अक्तूबर के बीच होने वाली बैठक में मामले की अंतिम समीक्षा करेगा। इसलिए ऐसे समय पर इस रिपोर्ट का आना पाकिस्तान के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं।

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