महेंद्र सिंह धोनी: रांची के माही ने ICC की तीनों ट्रॉफी जीतकर रचा था इतिहास

वर्ष 2008 और 2009 में धोनी (MS Dhoni) को आई.सी.सी. एकदिवसीय खिलाड़ी का पुरस्कार मिला। वर्ष 2009 में धोनी को राजीव गांधी खेल रत्न और भारत का चौथा सबसे बड़ा पुरस्कार पद्मश्री से नवाजा गया। धोनी को विजडन की पहली ड्रीम टेस्ट टीम का कप्तान भी घोषित किया गया।

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महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni), यह नाम सुनते ही तुरंत ही स्मरण हो आता है एक ऐसा खिलाड़ी जिसने पिछले चार-पांच वर्ष में ही अपने खेल से हर खेलप्रेमी के हृदय पर गहरा प्रभाव छोड़ा है। अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने न सिर्फ एक सफल खिलाड़ी के रूप में बल्कि एक सफल कप्तान के रूप में भी सारी दुनिया में अपना लोहा मनवाया है।

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महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni), जिन्हें प्यार से माही के नाम से भी जाना जाता है। 5 फुट 9 इंच कद के इस खिलाड़ी ने 7 जुलाई, 1981 को रांची, बिहार (अब झारखंड) में जन्म लिया। इनके पिता का नाम पान सिंह धोनी है और माताजी का नाम देवकी देवी। उनके पैतृक गांव वाली है, जो उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के लामगढ़ ब्लाक में स्थित हैं। धोनी ने अपनी स्कूली शिक्षा यामली, रांची से ली। शुरू में इनका बैडमिंटन और फुटबाल के प्रति अधिक रुझान था। वह अपनी फुटबाल टीम के गोलकीपर थे, लेकिन अपनी अच्छी विकेट कीपिंग के दम पर वह क्लब क्रिकेट में स्थायी विकेट कीपर बने और साल 1998-99 में बिहार क्रिकेट टीम में पदार्पण किया, फिर 2004 में उन्हें भारतीय टीम के साथ केन्या जाने का अवसर प्राप्त हुआ वहां पाकिस्तान टीम के विरुद्ध उन्होंने एक के बाद एक शतक लगाये और इस शानदार प्रदर्शन के आधार पर उन्हें भारतीय क्रिकेट टीम में चुन लिया गया 23 दिसम्बर, 2004 को इन्होंने बांग्लादेश के विरुद्ध अपने एकदिवसीय क्रिकेट की शुरुआत की। अपने पांचवें ही मैच में उन्होंने पाकिस्तान के विरुद्ध 148 रनों की बेहतरीन पारी खेली, जो किसी भी भारतीय विकेट कीपर का सर्वाधिक स्कोर था। बाद में उन्होंने अपने इस रिकार्ड को तोड़ दिया तथा श्रीलंका के विरुद्ध जयपुर में 183 नाबाद रनों की अविस्मरणीय पारी खेलकर हर क्रिकेट प्रेमी का दिल जीत लिया।

एकदिवसीय क्रिकेट की सफलता ने धोनी (MS Dhoni) को टेस्ट क्रिकेट में भी स्थान दिला दिया। 2 दिसम्बर, 2005 में इन्होंने श्रीलंका के विरुद्ध अपना पहला टेस्ट मैच खेला। अपने लगातार अच्छे प्रदर्शन से इन्होंने 2005-06 के आखिर में आई.सी. सी. एकदिवसीय रैंकिंग में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया। जैसे हर चीज स्थायी नहीं होती, धोनी की फार्म में भी उतार-चढ़ाव आते रहे। वर्ष 2006 कुछ ऐसा ही रहा, लेकिन वर्ष 2007 की शुरुआत में वेस्टइंडीज और श्रीलंका के विरुद्ध घरेलू श्रृंखलाओं में अच्छे प्रदर्शन से धोनी अपनी पुरानी फार्म में दिखे। इसके बाद भारतीय क्रिकेट के लिए सबसे निराशा का पल था, जब भारत 2007 वर्ल्डकप से पहले दौर में ही बाहर हो गया। इसके बाद बांग्लादेश के विरुद्ध श्रृंखला में धोनी ने मैन ऑफ द सीरीज का पुरस्कार प्राप्त किया। इंग्लैंड दौरे के लिए इन्हें भारतीय टीम का उप-कप्तान बनाया गया। धोनी को दक्षिण अफ्रीका में सितम्बर में आयोजित 20-20 वर्ल्ड कप के लिए भारतीय क्रिकेट टीम का कप्तान बनाया गया और फाइनल मैच में पाकिस्तान को हराकर दूसरे ऐसे भारतीय कप्तान बने, जो कपिल देव के बाद वर्ल्ड कप जीता हो।

सबसे रोचक पहलू यह है कि धोनी (MS Dhoni) बॉलिंग भी करते हैं और 30 सितम्बर 2009 को इन्होंने वेस्टइंडीज के ट्रेविस डाऊलीन को बोल्ड आउट कर अपना पहला एकदिवसीय विकेट लिया। धोनी की कप्तानी में भारत ने आई.सी.सी. वर्ल्ड कप टी-20,2007. सीबी सीरीज 2007- 08 और बार्डर-गावस्कर ट्राफी 2008 में जीती, जिसमें भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 2-0 से हराया। विदेशी धरती पर भी श्रीलंका और न्यूजीलैंड के विरुद्ध एकदिवसीय श्रृंखलाओं में भी भारत को जीत दिलाई। पिछले एक वर्ष से धोनी (MS Dhoni) आई.सी.सी, एकदिवसीय रैंकिंग में सर्वोच्च स्थान पर रहे, यह उनके लगातार अच्छे प्रदर्शन को दर्शाता है।

धोनी (MS Dhoni) की कामयाबी का सबसे बड़ा कारण इनका हर परिस्थिति में दिमाग को शांत रखना है तथा विकट से विकट परिस्थितियों वाले मैच में भी यह एक कप्तान के साथ-साथ बल्लेबाज के रूप में भी अपना संयम बनाये रखना है। याद कीजिये भारत के अधिकतर मैचों में भारत का स्कोर कभी 60 पर 3 विकेट, 90 पर 5 विकेट, ऐसे ही रहता है और उस समय पांचवें या छठे स्थान पर आकर धोनी ने एक अच्छी पारी खेलकर भारत को कितनी बार मैच जिताया है। क्रिकेट के हर प्रारूप में वाहे वह टी-20 हो, एकदिवसीय हो अथवा टेस्ट क्रिकेट, अब तो आई.पी.एल. भी है। सभी में कप्तानी के साथ-साथ विकेटकीपर, बल्लेबाजी करना अपने आप में ही एक अद्भुत बात है।

वर्ष 2008 और 2009 में धोनी (MS Dhoni) को आई.सी.सी. एकदिवसीय खिलाड़ी का पुरस्कार मिला। वर्ष 2009 में धोनी को राजीव गांधी खेल रत्न और भारत का चौथा सबसे बड़ा पुरस्कार पद्मश्री से नवाजा गया। धोनी को विजडन की पहली ड्रीम टेस्ट टीम का कप्तान भी घोषित किया गया। इसी साल धोनी (MS Dhoni) को आई.सी.सी. वर्ल्ड टेस्ट और एकदिवसीय दोनों टीमों के कप्तान के रूप में नामित किया गया फोर्ब्स पत्रिका द्वारा घोषित दस सबसे अधिक कमाई करने वाले क्रिकेटरों की सूची में धोनी ने सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया। इतना सब करने पर भी धोनी को अक्सर आलोचनाओं का शिकार होना पड़ता है। कभी ज्यादा विज्ञापनों में काम करने को लेकर, भी लगातार पराजय के कारण, भी साथी खिलाड़ियों से टकराव आदि की खबरों को लेकर। लेकिन धोनी ने अपने करिश्माई प्रतिभा से यह दिखा दिया कि लगन के साथ काम करे तो सफल होने से कोई नहीं रोक सकता।

जब रांची के किंग महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) भारतीय टीम के लिए इतिहास रच रहे थे, तब हर कोई खुशी से झूम रहे थे। इससे पहले टीम और उसके सदस्यों को यह एहसास भी नहीं था कि वह इतना बड़ा काम करने जा रहे हैं लेकिन धोनी के संकल्प और टीम के जज्बे ने वह काम कर दिखाया जिसकी भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को लंबे समय से प्रतीक्षा थी। धोनी को शानदार कप्तान केवल इसलिए नहीं कहा जाता है कि उनके नेतृत्व में विश्व कप भारत की झोली में आया बल्कि इसलिए भी कहा जाता है कि टीम के अंदर जो जोश पैदा किया वह भी लाजवाब है।

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