बॉलीवुड के इस सिंगर ने माधुरी दीक्षित को शादी के लिए मना कर दिया था

माधुरी दीक्षित हिंदी सिनेमा की ऐसी इकलौती अभिनेत्री हैं जिन्हें सर्वाधिक 13 बार फिल्म फेयर पुरस्कार के लिए नामांकन मिला है। 2008 में भारत सरकार ने माधुरी को “पद्मश्री” से सम्मानित किया।

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माधुरी दीक्षित ने भारतीय हिन्दी फ़िल्मों में एक ऐसा मुकाम बनाया जिसे आज के दौर की अभिनेत्रियां छूना चाहती हैं।

Madhuri Dixit Birth Anniversary: माधुरी दीक्षित ने भारतीय हिन्दी फ़िल्मों में एक ऐसा मुकाम बनाया है जिसे आज के दौर की अभिनेत्रियां छूना चाहती हैं। 80 और 90 के दशक में माधुरी हिंदी सिनेमा की सबसे सफल अभिनेत्रियों में शुमार थींं। वह केवल एक बेहतरीन अभिनेत्री ही नहीं बल्कि एक कुशल नृत्यांगना भी हैं।

माधुरी दीक्षित का जन्म 15 मई, 1965 को मुंबई में हुआ था। पिता शंकर दीक्षित और माता स्नेह लता दीक्षित की लाडली माधुरी ने कभी नहीं सोचा था कि वह एक अभिनेत्री बनेंगी। वह बचपन से ही बेहद पढ़ाकू थीं। उनकी डॉक्टर बनने की ख्वाहिश थी, लेकिन वह अभिनेत्री बन गयीं। उनके लाजवाब नृत्य और स्वाभाविक अभिनय में ऐसा जादू है कि माधुरी पूरे देश की धड़कन बन गयीं। माधुरी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई डिवाइन चाइल्ड हाई स्कूल से की। उसके बाद माधुरी दीक्षित ने मुंबई यूनिवर्सिटी से स्नातक की शिक्षा पूरी की। माधुरी दीक्षित कथक नृत्य में पारंगत हैं। उन्होंने आठ साल तक कथक की शिक्षा ली है।

माधुरी दीक्षित ने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत साल 1984 में राजश्री प्रोडक्शन की फिल्म ′अबोध′ से की थी। लेकिन यह फिल्म कुछ खास नहीं चली। करियर के शुरुआती दौर में उन्हें कई असफलताओं का मुंह देखना पड़ा। इस दौरान उन पर आलोचकों ने तंज कसते हुए कहा कि वह फिल्म जगत में केवल अपने डांस की वजह से हैं। उन्हें हिंदी सिनेमा में पहचान मिली फिल्म ′तेजाब′ से। इस फिल्म में उन्हें उनकी बेहतरीन अदाकारी के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार का पहला नामांकन भी मिला था। इस फिल्म का गाना ‘एक दो तीन…’ आज भी माधुरी दीक्षित का आइकॉनिक सॉन्ग माना जाता है। इस फिल्म के बाद फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा और हिंदी सिनेमा में बैक-टू बैक हिट फ़िल्में दीं। फिल्म निर्देशक सूरज बड़जात्या ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था, ‘एक निर्देशक का करियर तब तक पूरा नहीं होता जब तक वो माधुरी दीक्षित के साथ काम न कर ले।’ माधुरी दीक्षित हिंदी सिनेमा की इकलौती अभिनेत्री हैं, जिन्हें पंडित बिरजू महाराज ने फिल्म ‘देवदास’ के गाने के लिए कोरियोग्राफ किया।

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माधुरी दीक्षित के माता-पिता नहीं चाहते थे कि माधुरी फिल्मों में ना आएं। माता-पिता चाहते थे कि माधुरी शादी कर लें और अपनी घर-गृहस्थी संभालें। इसीलिए उन्होंने उनके लिए लड़का तलाशना शुरू कर दिया था। जिस वक्त माधुरी को अपने करियर पर ध्यान देना चाहिए था, उस वक्त उनके माता-पिता उनकी शादी कराने में लगे हुए थे। जानने वाले कहते हैं, काफी मशक्कत के बाद माधुरी के माता-पिता को सुरेश वाडेकर के रूप में लड़का मिल गया। सुरेश वाडेकर उस वक्त के उभरते हुए सिंगर थे। माधुरी के माता-पिता ने रिश्ता सुरेश वाडेकर के घर भिजवाया, लेकिन सुरेश ने रिश्ते से मना कर दिया। सुरेश वाडेकर ने यह कहकर माधुरी से शादी करने से इंकार कर दिया कि लड़की बेहद दुबली-पतली है।

इस रिश्ते के टूटने से माधुरी के माता-पिता बेहद दुखी हुए..लेकिन कहीं ना कहीं माधुरी इससे बेहद खुश हुई होंगी क्योंकि इसी रिश्ते के टूटने के बाद माधुरी को उनके घरवालों ने फिल्मों में काम करने की इजाजत दी। इसके बाद तो जो हुआ, सबके सामने है। उन्होंने ‘राम लखन’, ‘परिंदा’, ‘दिल’, ‘साजन’, ‘बेटा’, ‘खलनायक’, ‘हम आपके हैं कौन’, ‘राजा’ और ‘दिल तो पागल है’ जैसी कई ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं। इन फिल्मों के जरिए माधुरी ने खुद को बॉलीवुड की सुपरस्टार के रूप में स्थापित कर लिया। हाल ही में माधुरी दीक्षित फिल्म ‘टोटल धमाल’ और ‘कलंक’ में नजर आईं।

https://www.youtube.com/watch?v=MS5BLS2sIDM&feature=youtu.be

17 अक्टूबर, 1999 को माधुरी ने डॉ. श्रीराम माधव नेने से शादी की जो एक हार्ट सर्जन हैं। शादी के बाद माधुरी डेन्वेर कोलोराडो में करीब दस साल तक रहीं। माधुरी के दो बेटे अरिन और रयान हैं। माधुरी 2011 में अपने परिवार के साथ वापस मुंबई आ गईं। उन्होंने 2007 में फिल्म ′आजा नचले′ से कम बैक किया। उन्होंने एक ऑनलाइन डांस अकादमी ‘डांस विथ माधुरी’ भी खोली है। जहां माधुरी के फैंस उनके मशहूर डांस सीख सकते हैं। माधुरी ने 6 फ़िल्मफ़ेयर अवार्ड जीते हैं। माधुरी दीक्षित हिंदी सिनेमा की ऐसी इकलौती अभिनेत्री हैं जिन्हें सर्वाधिक 13 बार फिल्म फेयर पुरस्कार के लिए नामांकन मिला है। 2008 में भारत सरकार ने माधुरी को “पद्मश्री” से सम्मानित किया।

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