Coronavirus: सिर्फ लॉकडाउन से संक्रमण पर नहीं पाया जा सकता काबू, खुद भी उठाने होंगे एहतियाती कदम

दुनियाभर में कोरोना वायरस (Coronavirus) का खौफ बढ़ता ही जा रहा है। कई देशों की सरकारों ने एहतियातन लॉकडाउन का ऐलान कर दिया है। भारत में भी कई राज्यों की सरकारों ने 22 मार्च को लॉकडाउन का ऐलान कर दिया। भारत में अभी तक राजस्थान, पंजाब, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, तेलंगाना, केरल, जम्‍मू-कश्‍मीर, झारखंड, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, गुजरात, छत्‍तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्‍ट्र, मध्‍य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और नगालैंड में लॉकडाउन की घोषणा की गई है। इनमें से कई राज्‍यों में पूरे सूबे में लॉकडाउन की घोषणा की गई है, जबकि कुछ में कुछ जिलों में लॉकडाउन का ऐलान किया गया है।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आपातकाल विशेषज्ञ माइक रायन।

राज्य सरकारों ने इसको लेकर गाइडलाइन भी बनाई है। सभी राज्यों में यह 31 मार्च तक प्रभावी रहेगा। लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की मानें तो सिर्फ लॉकडाउन से कोरोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण पर काबू नहीं पाया जा सकता है। इसके लिए स्वास्थ्य उपायों की जरूरत होगी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आपातकाल विशेषज्ञ माइक रायन का कहना है कि अभी इस बात पर जोर देने की आवश्यकता होगी कि जो बीमार है, उन्हें आइसोलेशन में डाला जाए। अगर हम सख्त तौर पर इसका पालन नहीं करते हैं, तो लॉकडाउन के साथ भी खतरा बरकरार है।

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माइक रायन ने कहा, ‘हमें अभी इस बात पर फोकस करने की जरूरत है कि जो बीमार हैं, जो इस वायरस (Coronavirus) से ग्रसित हैं, उन्हें आइसोलेट किया जाना चाहिए। वो लोग किनके संपर्क में आए थे, उनका पता लगाना चाहिए और उन्हें भी आइसोलेट करना चाहिए। अगर हम सख्त तौर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को नहीं अपनाते हैं, तो लॉकडाउन के साथ भी खतरा बरकरार है। जब लॉकडाउन या अन्य पाबंदियां हटेंगी तो यह बीमारी फिर से लोगों को अपना शिकार बनाएगी।’

रायन ने इसके लिए चीन, सिंगापुर और साउथ कोरिया का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इन देशों ने सख्ती के साथ बचाव उपाय किए और हर संदिग्ध की जांच की। एक बार जब इसे फैलने से रोक दिया जाए तो इसके बाद भी इसकी समीक्षा करनी होगी।

उन्होंने आगे कहा कि कई देशों में कोरोना वायरस (Coronavirus) से लड़ने के लिए वैक्सीन बनाने की कवायद जारी है। अभी तक सिर्फ अमेरिका ने इसका परीक्षण किया है। उन्होंने बताया कि ब्रिटेन में भी इसपर काम चल रहा है और इसमें एक साल भी लग सकता है लेकिन लोगों को इससे बचने के जरूरी कदम खुद उठाने होंगे।

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