झारखंड: नक्सल कनेक्शन में गिरफ्तार मनोज ने पुलिस को सुनाई थी ये मनगढ़ंत कहानी…

मनोज ने पुलिस को मनगढ़ंत अपहरण की कहानी सुना कर अपनी मासूमियत साबित करने की कोशिश की थी। पुलिस के सामने जिस तरह से मनोज ने अपहरण की मनगढ़ंत कहानी सुनाई थी, पुलिस ने उस पर यकीन कर लिया था। पर, एक साल के बाद यह मामला एनआईए (NIA) के हवाले कर दिया गया।

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नक्सलियों से कनेक्शन (Naxal Connection) के मामले झारखंड के रांची से गिरफ्तार कंस्ट्रक्शन कंपनी का कर्मचारी मनोज कुमार ही रामकृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन कंपनी का नक्सल मैनेजमेंट करने वाला शख्स है। पुलिस (Police) को पता नहीं था कि जिस व्यक्ति को रुपए के साथ गिरफ्तार किया गया है, वही नक्सलियों (Naxalites) के लिए लेवी का पैसा ठेकेदारों के हाथों लेकर पहुंचाता है।

दिन था 22 जनवरी, 2018 जब गिरिडीह जिले के जंगली इलाकों से पुलिस (Police) और सीआरपीएफ (CRPF) की टीम ने सर्च अभियान के दौरान मनोज नामक शख्स को 6 लाख रूपए और 2 मोबाइल के साथ गिरफ्तार किया था। दरअसल, एसएसपी ऑपरेशन दीपक कुमार के नेतृत्व में पुलिस और सीआरपीएफ (CRPF) की टीम अकबकीटांड में 21 जनवरी, 2018 की रात से ऑपरेशन चला रही थी।

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सूचना मिली थी कि इनामी नक्सली कृष्णा हांसदा उर्फ मामा जी उर्फ अविनाश दा का दस्ता इसी इलाके में है। 22 जनवरी को अकबकीटांड में बाइक से आ रहे मनोज को पूछताछ के लिए रोका गया उसके पास से 6 लाख रूपए मिले। उसने स्वीकार किया था कि वह नक्सली संगठन (Naxal Organization) का पैसा पहुंचाने जा रहा है।

उसने पुलिस को बताया था कि उसे स्कॉर्पियो से आए लोगों ने अगवा किया उसे एक पैकेट एवं एक पर्चा दिया था। इसे वह बताए पते पर 6 लाख रुपये नक्सलियों (Naxals) को देने जा रहा है। पुलिस उससे यह पता लगाने में सफल रही थी कि लेवी का पैसा इनामी नक्सली कृष्णा हांसदा को पहुंचाने जा रहा है, पर यह पता नहीं लगा सकी थी कि पैसा किसका था।

झारखंड: नक्सल कनेक्शन के खुलासे के बाद NIA ने कंस्ट्रक्शन कंपनी के दफ्तर में की छापेमारी

तब मनोज ने पुलिस को मनगढ़ंत अपहरण की कहानी सुना कर अपनी मासूमियत साबित करने की कोशिश की थी। पुलिस के सामने जिस तरह से मनोज ने अपहरण की मनगढ़ंत कहानी सुनाई थी, पुलिस ने उस पर यकीन कर लिया था। पर, एक साल के बाद यह मामला एनआईए (NIA) के हवाले कर दिया गया।

एनआईए (NIA) की टीम अब यह पता लगाने में सफल हुई है कि लेवी का वह पैसा रामकृपाल कंस्ट्रक्शन का था, जो कृष्णा हंसदा को देने के लिए कंपनी का कर्मचारी मनोज कुमार जा रहा था। मनोज गिरिडीह के सरिया प्रखंड अंतर्गत केस्वारी गांव का रहने वाला है। उसका कोई आपराधिक रिकार्ड नहीं है। गिरफ्तारी के बाद पूछताछ कर मनोज को अदालत में पेश किया गया था, वहां से उसे गिरिडीह जेल भेज दिया गया था। बाद में कोर्ट में सुनवाई के लिए उसे गिरिडीह से रांची जेल भेजा गया था।

गौरतलब है कि नक्सल फंडिंग में कंपनी का कनेक्शन मिलने के बाद 2 जून को NIA की टीम रांची में कचहरी रोड के पंचवटी प्लाजा स्थित रामकृपाल कंस्ट्रक्शन कंपनी के दफ्तर में छापेमारी की। एनआईए (NIA) ने छापेमारी के दूसरे दिन जारी बयान में बताया है कि छापेमारी के दौरान कंपनी के दफ्तर से बहुत सारे संदिग्ध दस्तावेज की मिले हैं, इसमें कैश बुक और कई बैंक खाते भी शामिल हैं।

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