झारखंड: लाल आतंक के खिलाफ पूर्व हार्डकोर माओवादियों का इस्तेमाल, इनकी निशानदेही पर पुलिस दे रही सर्च ऑपरेशन को अंजाम

ओडिशा व पश्चिम बंगाल की सीमा पर इन माओवादियों (Maoists) के सहयोग से पुलिस को सर्च ऑपरेशन चलाने में सफलताएं मिल रही हैं।

Maoists

झारखंड में माओवाद से मुकाबले में हार्डकोर माओवादी पुलिस के काम आ रहे हैं। करीब दर्जनभर माओवादी अनधिकृत रूप से दो महीने पहले सरेंडर कर चुके हैं और पुलिस के साथ कदम से कदम मिलाकर माओवादियों (Maoists) के सफाए में जुटे हैं। अनधिकृत रूप से सरेंडर कर चुके इन माओवादियों को ढाल बनाकर पुलिस अब जंगलों में सर्च ऑपरेशन चला रही है। इसका फायदा भी मिल रहा है। दो महीने के भीतर पुलिस को उग्रवाद प्रभावित सारंडा व बूढ़ा पहाड़ इलाके में कोई नुकसान नहीं हुआ और माओवादियों पर दबिश बढ़ाने में सहयोग मिला है।

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जिन माओवादियों (Maoists) ने अनधिकृत रूप से पुलिस के समक्ष सरेंडर किया है, उनमें बिहार के जहानाबाद के करौना सलेमपुर निवासी 25 लाख का इनामी स्पेशल एरिया कमेटी सदस्य उमेश यादव उर्फ विमल उर्फ राधेश्याम यादव, सरायकेला के इचागढ़ निवासी 10 लाख का इनामी जोनल कमांडर महाराज प्रमाणिक, दो लाख का इनामी एरिया कमांडर बैलून सरदार, सक्रिय सदस्य सूरज, सूरज की पत्नी के अलावा आधा दर्जन सक्रिय माओवादी शामिल हैं। इन्हें माओवादियों के खिलाफ सर्च ऑपरेशन में पुलिस अपने साथ रखी है, जिससे कि सर्च ऑपरेशन को कारगर बनाया जा सके।

पुलिस के पास अनधिकृत रूप से माओवादियों (Maoists) का जोनल कमांडर 10 लाख का इनामी महाराज प्रमाणिक, एरिया कमांडर बैलून सरदार, सूरज, सूरज की पत्नी व अन्य माओवादियों के दस्ते ने सरेंडर किया था। इन्हें अब तक अधिकृत रूप से सामने नहीं लाया गया है। जानकारी मिली है कि ये हार्डकोर माओवादी सारंडा इलाके में पुलिस को सहयोग कर रहे हैं।

इनके सहयोग से पुलिस को पश्चिमी सिंहभूम के गुदड़ी, टोंटो आदि थाना क्षेत्रों में दो महीने के भीतर बेहतर सफलता हाथ लगी है। ओडिशा व पश्चिम बंगाल की सीमा पर इन माओवादियों (Maoists) के सहयोग से पुलिस को सर्च ऑपरेशन चलाने में सफलताएं मिल रही हैं। हाल में माओवादी कांडे होनहागा दस्ते का उग्रवादी वीर सिंह मुंडारी की गिरफ्तारी व गुदड़ी में भारी मात्रा में हथियारों की बरामदगी के पीछे भी इन्हीं माओवादियों का सहयोग बताया जा रहा है।

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