झारखंड: नक्सलियों की अब खैर नहीं, 16 के खिलाफ अब आतंकवाद का मामला

झारखंड के गिरिडीह जिले में स्थानीय प्रशासन ने पिछले कुछ सालों में इलाकों में आतंक मचा कर खूनी खेल की साजिश रचने वाले 16 माओवादियों के खिलाफ आतंकवाद का मामला चलाने की तैयारी कर रही है। प्रशासन की इस लिस्ट में कई इनामी नक्सली (Naxali) भी शामिल हैं जो कई बार अमानवीय घटनाओं को अंजाम दे चुके हैं। इन नक्सलियों में से या तो कुछ फरार हैं या तो जेल में।
Naxali
 
प्रशासन की हिट-लिस्ट में 7 लाख के इनामी नक्सली (Naxali) जोनल कमांडर नवीन मांझी समेत 16 नक्सलियों के नाम शामिल हैं। इन सबके खिलाफ 13 UAP के तहत मामला चलाने की अनुशंसा गिरिडीह के उपायुक्त राहुल कुमार सिन्हा ने की है। इसको लेकर कार्य एवं आपदा प्रबंधन के अपर मुख्य सचिव गिरिडीह जिला उपायुक्त राहुल कुमार सिन्हा ने पत्र लिखकर आदेश मांगा है। जिस मामले में 13 यूएपी एक्ट के तहत मामला चलाने की अनुशंसा की गई है, वह लगभग 16 साल पुराना है। बता दें कि निमियाघाट थाना क्षेत्र के में माओवादियों के सशस्त्र दस्ते द्वारा 4 सितंबर 2004 को घात लगाकर पुलिस बल पर हमला कर हथियार लूटने की घटना को अंजाम दिया गया था। जिसमें पुलिसकर्मियों की जान चली गई थी, साथ ही साथ कई ऐसे मामले हैं जिसमें इन हिट लिस्टेड माओवादियों द्वारा आतंक मचाया गया था। उन सभी घटनाओं को लेकर जिला प्रशासन आतंकवाद का मामला अथवा मुकदमा दर्ज करने की तैयारी कर चुकी है
 
7 लाख के इनामी नक्सली (Naxali) रहे जोनल कमांडर नवीन मांझी उर्फ नवीन दा के अलावा साहिब राम मांझी, परमेश्वर सिंह, महुआ मांझी उर्फ बिंदेश्वरी, मरांडी उर्फ विजय, शिबू मांझी उर्फ शिवलाल मांझी, खेमलाल महतो फौजी,  खूबलाल महतो उर्फ खूबलाल मंडल, रामेश्वर मांझी, कानू मांझी उर्फ मंगरू मांझी, राजेंद्र महतो उर्फ राजू, मोहन मांझी, रणविजय महतो, डोडा महतो उर्फ डोमना उर्फ लखीचंद मांझी, लऊवा मांझी उर्फ सिंह, दासो मांझी और महादेव मांझी पर मामला चलाने की अनुशंसा की गई है।
 
प्राप्त जानकारी के अनुसार लवर मांझी, दासो मांझी और महादेव मांझी फरार हैं। पुलिस ने कुर्की की कार्रवाई कर न्यायालय में आरोप पत्र दायर किया है। इन 13 नक्सलियों (Naxali) के खिलाफ 2005 से लेकर 2016 तक आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया था। निमियाघाट थाना के एएसआई राधेश्याम चौधरी ने 2 सितंबर को डीसी को आवेदन दे अभियोजन की स्वीकृति मांगी थी। डीसी ने राज्य सरकार को प्रतिवेदन भेजा है। सरकार केस डायरी लोक अभियोजक के मंतव्य के आधार पर स्वीकृति देगी।
 
गैर कानूनी गतिविधियों की रोकथाम कर देश की एकता और अखंडता के लिए यह एक्ट (13 UAP) 1967 में बना था। इसका प्रयोग देश के अंदर गैरकानूनी और देशद्रोही गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए करना है। अधिनियम की परिधि में आने वालों को आतंकवादी और देशद्रोही घोषित किया जा सकता है। हालांकि एक्ट के तहत न्यायालय में मामला चलाने के लिए पुलिस को राज्य सरकार से अनुमति लेनी जरूरी होती है। हाल के संशोधन में सिर्फ केंद्रीय जांच एजेंसी एनआईए (NIA) को विशेषाधिकार दिया गया है, उसे सिर्फ अपने आला अधिकारियों की स्वीकृति लेनी होगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here