Jharkhand: विधानसभा चुनाव करीब आते ही नक्सली गतिविधियां बढ़ीं

झारखंड (Jharkhand) में चुनाव करीब आते ही नक्सली गतिविधियं बढ़ गई हैं। इस बीच टीएसपीसी नामक एक नये संगठन की सक्रियता पतरातू और आस-पास के इलाकों में दर्ज की जा रही है।

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झारखंड (Jharkhand) में विधानसभा चुनाव करीब आते ही नक्सली गतिविधियां बढ़ गई हैं।

झारखंड (Jharkhand) में विधानसभा चुनाव करीब आते ही नक्सली गतिविधियां बढ़ गई हैं। इस बीच टीएसपीसी नामक एक नये संगठन की सक्रियता पतरातू और आस-पास के इलाकों में दर्ज की जा रही है। इस तरह अब नक्सली संगठनों की सूची में करीब सोलह संगठन शामिल हो गए हैं। पहले इस सूची में सिर्फ एमसीसी और पीडब्ल्यूजी ही हुआ करते थे। इन दोनों संगठनों के विलय के बाद ही भाकपा (माओवादी) का गठन हुआ था। इस संगठन की पकड़ कमजोर होने के बाद भी हथियारबंद दस्तों की गतिविधियों में बढ़ोत्तरी हुई है।

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विधानसभा चुनाव करीब आते ही झारखंड (Jharkhand) में बढ़ गई हैं नक्सली गतिविधियां। (सांकेतिक तस्वीर)

इन नक्सली संगठनों की वजह से झारखंड (Jharkhand) के दूर दराज के इलाकों में चल रहे विकास कार्यों मे लेवी की वसूली भी बढ़ गयी है। अब यह देखा जा रहा है कि किन्हीं कारणों से अगर काम करने वाली कंपनियां समय पर लेवी का भुगतान नहीं करती हैं तो नक्सली हमला कर रहे हैं। चुनाव करीब होने की वजह से ऐसी गतिविधियों में ईजाफा होने की स्थिति में शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराना बड़ी चुनौती होगी। आंकड़े बताते हैं कि गत डेढ़ सौ दिनों के भीतर झारखंड (Jharkhand) में 46 वाहन जलाए गये हैं। इनमें कई वारदात काफी घनी आबादी के करीब भी हुए हैं। नक्सली-उग्रवादी संगठनों द्वारा पिछले 150 दिन के दौरान जिन 46 वाहनों और मशीनों में आग लगाया गया है, वे सभी सड़क निर्माण और कोल परियोजनाओं में लगाए गए थे।

इन सबसे विकास कार्यों में लगी संबंधित कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। वैसे कोयला ढोने में ट्रांसपोर्टरों से लेवी वसूली के कई गंभीर मामलों की जांच अब एनआइए के जिम्मे हैं, जिनमें कुछ बड़े नामों के शामिल होने की भी चर्चा है। झारखंड के अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न नामों से सक्रिय नक्सली और उग्रवादी संगठन लेवी नहीं मिलने पर सबसे पहले निर्माण कार्य में जुटी कंपनियों के वाहनों को निशाना बनाते हैं। पिछले पांच महीने के दौरान राज्य के अलग-अलग हिस्सों में नक्सलियों ने दर्जनों वाहनों को आग के हवाले कर दिया। बीते 4 नवंबर को देर रात पीएलएफआई उग्रवादी संगठन ने तुपुदाना थाना क्षेत्र में एलएडटी कंपनी के मजदूर पर गोलीबारी की। इसके अलावा एक ट्रैक्टर को भी जला दिया।

उससे पहले 29 अक्टूबर को झारखंड (Jharkhand) के हजारीबाग में नक्सलियों ने 6 वाहनों को आग के हवाले कर दिया और उसके दो दिन बाद ही रामगढ़ में उग्रवादियों ने एक हाइवा को आग के हवाले कर दिया। नक्सली संगठन लेवी के पैसों से ही फल-फूल रहे हैं। वहीं निर्माण कार्य में लगे कई ठेकेदार नक्सलियों से सांठगांठ कर सफलतापूर्वक निर्माण कार्य करवा लेते हैं। लेकिन कुछ ठेकेदार उग्रवादियों को रंगदारी देने से इंकार कर देते हैं, तो उग्रवादी संगठन भी कंपनी के वाहनों को आग के हवाले कर देते हैं। जिससे निर्माण कार्य में लगी कंपनियों को करोड़ों का नुकसान होता है। इस नुकसान से बचने के लिए कंपनियों के लिए लेवी का भुगतान करना मजबूरी हो जाती है क्योंकि समय पर उन्हें पुलिस की सुरक्षा नहीं मिल पा रही है। इसके अलावा चुनाव से पहले हिंसा नक्सलियों द्वारा की गई हिंसा की वारदातें भी बढ़ गई हैं। ये सब नक्सली लोगों के अंदर डर पैदा करने के लिए कर रहे हैं।

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