बदल जाएगा युद्ध का तरीका, रोबोटिक्‍स हो या फायरिंग सिस्‍टम, इस तरह दुश्मनों को धूल चटाएगी INDIAN ARMY

चीन की हरकतों को ध्यान में रखते हुए भारतीय सेना आधुनिक तरीके से अपनी रणनीतियों पर काम कर रही है और टेक्नालॉजी पर गहन अध्ययन कर रही है।

Indian Army

आधुनिक होते समाज में आधुनिक युद्ध शैली भी अहम है। चूंकि भविष्य में युद्ध नई तकनीकों के सहारे ही लड़ा जाएगा, इसलिए सेना के एक कमांडर इस स्टडी का नेतृत्व कर रहे हैं।

कोरोना (Corona) महामारी के दौरान भारत और चीन (China) के बीच तनाव भी जारी है। दोनों देशों के बीच हुए मतभेद की चर्चा दुनियाभर में है। ऐसे में भारतीय सेना (Indian Army) हर मोर्चे पर खुद को मजबूत बना रही है।

हालही में भारत को 5 लड़ाकू विमान (राफेल) भी मिले, जिससे भारत की क्षमता कई गुना बढ़ गई है। लेकिन चीन की हरकतों को ध्यान में रखते हुए भारतीय सेना आधुनिक तरीके से अपनी रणनीतियों पर काम कर रही है और टेक्नालॉजी पर गहन अध्ययन कर रही है। इसकी अगुवाई सेना के एक सीनियर लेफ्टिनेंट जनरल कर रहे हैं।

आपको ये जानकर गर्व होगा कि भारतीय सेना ड्रोन स्‍वार्म, लेजर, रोबोटिक्‍स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एल्‍गोरिद्म‍िक वॉरफेयर जैसी टेक्नालॉजी पर काम कर रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सेना खुद को ‘नॉन-काइनेटिक और नॉन-कॉम्‍बैट’ वॉरफेयर के लिए तैयार कर रही है।

चीन को जवाब देने के लिए जरूरी है ये कदम

चूंकि चीन लगातार अपनी सैन्य क्षमता में बढ़ोतरी कर रहा है और उसने अपनी सेना के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पावर्ड लीदल ऑटोनॉमस वेपन सिस्‍टम बनाया है। ऐसे में ये जरूरी है कि भारत अपनी सेना को आधुनिक तरीके से तैयार करे।

इंडियन आर्मी की लैंड वॉरफेयर डॉक्ट्रिन में रणनीतियों को पैना करने पर काम किया जा रहा है, इसमें साइबर वॉरफेयर क्षमता, लॉन्च ऑन डिमांड माइक्रो सैटेलाइट्स, इंटीग्रेडेट बैटल ग्रुप्स, लेजर, AI, रोबोटिक्‍स जैसे डायरेक्‍टेड-एनर्जी से लैस हथियार रखने की जरूरत के बारे में कहा गया था।

इसके अलावा IBGs का काम भी शुरू हो गया है, जिसमें हर IBG में 5 हजार सैनिक होंगे। इन सैनिकों में आर्टिलरी, एयर डिफेंस, इन्‍फैंट्री, टैंक, सिग्‍नल्‍स और इंजीनियर्स के जवान शामिल होंगे।

सेना कर रही इन चीजों पर स्टडी

आधुनिक होते समाज में आधुनिक युद्ध शैली भी अहम है। चूंकि भविष्य में युद्ध नई तकनीकों के सहारे ही लड़ा जाएगा। इसलिए सेना के एक कमांडर इस स्टडी का नेतृत्व कर रहे हैं।

स्डटी से ये जानकारी मिलेगी कि टेक्नालॉजी पर कितना खर्चा आएगा। स्टडी में हाइपरसोनिक इनेबल्‍ड लॉन्‍ग रेंज प्रिंसिजन फायरिंग सिस्‍टम, बायोमैटीरियल इन्‍फ्यूज्‍ड इनविजिबिल्‍टी क्‍लोक्स, ब्‍लॉकचेन तकनीक, AI, रिमोटली-पायलटेड एरियल सिस्‍टम्‍स, ड्रोन स्‍वार्म्‍स, बिग डेटा एनालिस‍िस, ऑगमेंटेंड रिएलिटी, एल्‍गोरिद्मिक वॉरफेयर, इंटरनेट ऑफ थिंग्‍स (IoT),रोबोटिक्‍स, डायरेक्‍टेड-एनर्जी वेपंस, वर्चुअल रिएलिटी, एडिटिव मैनुफैक्‍चरिग, एक्‍सोस्‍केलेटन सिस्‍टम्‍स, लिक्विड आर्मर, क्‍वांटम कम्‍प्‍यूटिंग, लॉइटर और स्‍मार्ट म्‍यूनिशंस को शामिल किया जाएगा।

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चूंकि सेना के तौर-तरीकों में तकनीकी रूप से बदलाव होगा तो इस बात का भी अंदाजा लगाया जा रहा है कि उसके युद्ध करने की मशीनरी में भी बदलाव होगा। इसकी समीक्षा भी होगी

चीनी सैनिकों ने मई में भारतीय क्षेत्र में की थी घुसपैठ 

बता दें कि हालही में रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया था कि चीनी सैनिकों ने मई में पूर्वी लद्दाख में भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की थी। रक्षा मंत्रालय ने 4 अगस्त को अपनी वेबसाइट पर एक डॉक्यूमेंट अपलोड किया था, जिसमें मंत्रालय ने स्वीकार किया था कि मई महीने से चीन लगातार LAC (Line of Actual Control) पर अपना अतिक्रमण बढ़ाता जा रहा है, खासतौर से गलवान घाटी, पैंगोंग त्सो गोगरा हॉट स्प्रिंग जैसे क्षेत्रों में।

रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) के डॉक्यूमेंट के मुताबिक, चीन ने 17 से 18 मई के बीच लद्दाख में कुंगरांग नाला, गोगरा और पैंगोंग त्सो झील के उत्तरी किनारे पर अतिक्रमण किया था। हालांकि, चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर ‘घुसपैठ’ के लिए भारत द्वारा इस्तेमाल किए गए ‘अतिक्रमण’ शब्द का किसी भी आधिकारिक बयान या दस्तावेज में उल्लेख नहीं किया गया है।

5 मई के बाद से चीन ने अपनाया था आक्रामक रवैया

रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) के इस डॉक्यूमेंट में कहा गया था कि 5 मई के बाद से चीन का यह आक्रामक रूप LAC पर नजर आ रहा है। 5 और 6 मई को ही पैंगोंग त्सो भारत और चीन की सेना के बीच में झड़प हुई थी। दस्तावेज में कहा गया था कि गतिरोध लंबे समय तक जारी रह सकता है और पैदा हो रही स्थिति में त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता हो सकती है।

इससे पहले, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मई के अंत में एक टेलीविजन चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा था कि चीनी सैनिकों की एक बड़ी संख्या पहले की तुलना में थोड़ा आगे आ गई थी। लेकिन आधिकारिक रूप से इस बात को स्पष्ट किया गया था कि इसकी गलत तरीके से इस तरह से व्याख्या नहीं की जानी चाहिए कि चीनी सैनिकों ने एलएसी के भारतीय क्षेत्र में प्रवेश किया है।

15 जून को हुई थी भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प 

गौरतलब है कि गलवान घाटी में 15 जून को भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे। जिसमें कर्नल रैंक के अधिकारी भी शामिल थे। उस वक्त विदेश मंत्रालय ने कहा था कि एलएसी को पार करने की चीनी कोशिशों की वजह से सेना के बीच संघर्ष हुआ था। मंत्रालय ने कहा था कि चीन ने पारंपरिक भारतीय गश्ती में बाधा डाली थी। इसके बाद से ही दोनों देशों के बीच सीमा विवाद के बीच दोनों देश मामले को सुलझाने के लिए सैन्य वार्ताएं कर रहे हैं।

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