आसमान में गरजेंगे भारतीय वायुसेना के अपाचे, दुश्मन के छूट जाएंगे पसीने

60 फुट ऊंचे और 50 फुट चौड़े अपाचे हेलिकॉप्टर को उड़ाने के लिए 2 पायलट की जरूरत होती है। अपाचे लड़ाकू हेलिकॉप्टर लगभग 280 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से उड़ान भरता है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इस हेलिकॉप्टर को रडार आसानी से पकड़ नहीं पाता है।

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अमेरिका निर्मित आठ अपाचे एएच-64ई (Boeing AH-64 Apache) लड़ाकू हेलिकॉप्टरों को पठानकोट एयरबेस में आईएएफ (IAF) में शामिल कर लिया गया है।

भारतीय वायुसेना की ताकत अब और भी बढ़ गई है। वजह, अमेरिका निर्मित अपाचे एएच-64ई (Boeing AH-64 Apache) लड़ाकू हेलिकॉप्टर्स को पठानकोट एयरबेस में आईएएफ (IAF) में शामिल कर लिया गया है। एएच-64ई हेलिकॉप्टर्स को शामिल करने वाला भारत 14वां देश है। अपाचे एएच-64ई दुनिया के सबसे बेहतरीन लड़ाकू विमानों में से एक है। वायुसेना के बेड़े में अपाचे के 8 हेलिकॉप्टर्स को शामिल किया गया है। पठानकोट एयरबेस में वायुसेना प्रमुख एयरचीफ मार्शल बीएस धनोआ की मौजूदगी में ये हेलिकॉप्टर वायुसेना में शामिल किए गए।

वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बी एस धनोआ की मौजूदगी में परंपरागत तरीके से इसका स्वागत वायुसेना में किया गया। बीएस धनोआ ने इस दौरान इस हेलिकॉप्टर की खूबियां बताईं। उन्होंने कहा कि इसे भारत की सुविधा के अनुसार बनाया गया है। वायुसेना प्रमुख ने पठानकोट एयरबेस पर कहा कि ये हेलिकॉप्टर वायुसेना के लिए काफी शानदार रहने वाला है। क्योंकि इसमें डेटा शेयरिंग की क्षमता है, जो एस्कॉर्ट, दुश्मन का सामना करने जैसे कई बड़े ऑपरेशन में हमारी मदद कर सकता है। बीएस धनोआ बोले कि यह हेलिकॉप्टर दुनिया के कई बड़े मिशन्स का गवाह बना है।

सितंबर, 2015 में जब भारत और अमेरिका के बीच ये डील हुई थी, तब हमारी वायुसेना ने अपनी जरूरतों को बोइंग को बताया था। इतना ही नहीं, बोइंग के साथ भारतीय वायुसेना के जवानों ने ट्रेनिंग भी की है। वायुसेना में यह लड़ाकू हेलिकॉप्टर ग्लेडियेटर टीम के साथ रहेगा। वर्तमान में अमेरिकी सेना इसका इस्तेमाल कर रही है। 60 फुट ऊंचे और 50 फुट चौड़े अपाचे हेलिकॉप्टर को उड़ाने के लिए 2 पायलट की जरूरत होती है। अपाचे लड़ाकू हेलिकॉप्टर लगभग 280 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से उड़ान भरता है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इस हेलिकॉप्टर को रडार आसानी से पकड़ नहीं पाता है।

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यह हेलिकॉप्टर करीब पौने तीन घंटे (2 घंटा 45 मिनट) तक उड़ान भरने में सक्षम है। अपाचे हेलिकॉप्टर के बड़े विंग को चलाने के लिए 2 इंजन होते हैं, इस वजह से इसकी रफ्तार बहुत अधिक है। 2 सीटर इस हेलिकॉप्टर में हेलिफायर और स्ट्रिंगर मिसाइलें लगी हुई हैं। इसमें एक सेंसर भी लगा है, जिसकी वजह से ये हेलिकॉप्टर रात में भी ऑपरेशन को अंजाम दे सकता है। इससे आतंकियों के ट्रेनिंग कैंप से लेकर टैंक तक तबाह किए जा सकते हैं। गौरतलब है कि अमेरिका निर्मित ये अपाचे हेलिकॉप्टर AH-64E दुनिया का सबसे एडवांस मल्टी रोल कॉम्बेट हेलिकॉप्टर है। भारत सरकार ने हथियार बनाने वाली अमेरिकी कंपनी बोइंग के साथ 4168 करोड़ रुपए में 22 अपाचे हेलिकॉप्टर खरीदने का सौदा किया था।

इस डील के चार साल बाद 4 अपाचे हेलिकॉप्टर 27 जुलाई को भारत को सौंपे जा चुके हैं। यह हिंडन एयरबेस पर हैंडओवर किए गए थे। वहीं, आठ हेलिकॉप्टर 3 सितंबर को वायुसेना में शामिल हुए। 2020 तक भारत को सारे 22 अपाचे हेलिकॉप्टर्स मिल जाएंगे। अनुच्छेद 370 हटाने के बाद भारत-पाक के मध्य बढ़े हुए तनाव के कारण अपाचे को पठानकोट एयरबेस पर तैनात करना रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इसलिए यह फैसला पठानकोट एयरबेस के रणनीतिक महत्व को देखते हुए लिया गया है। पठानकोट एयरबेस पाकिस्तान सीमा से लगभग 30 किलोमीटर दूर है। विभिन्न अत्याधुनिक क्षमताओं से लैस अपाचे एएच-64 ई हेलिकॉप्टर से चीनी सीमाओं को भी कवर करना पहले के मुकाबले आसान हो जाएगा। पठानकोट में तैनात अपाचे के स्क्वाड्रन कमांडर ग्रुप कैप्टन एम शायलू होंगे।

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