भारत चीन विवाद: गलवान घाटी-गोगरा पोस्ट से लौटी चीनी सेना, लेकिन पैंगोंग त्सो लेक और डिप्सांग पर सैकड़ों वाहन और दर्जनों नाव बरकरार

सूत्रों के अनुसार दोनों सेनाओं के बीच सबसे विवादित मुद्दा पैंगोंग त्सो झील के फिंगर-4 क्षेत्र और डेपसांग में चीनी सैनिकों का पीछे हटना नामात्र का है। पैंगोंग त्सो झील के पास चीनी सैनिक (PLA Troops) फिंगर-4 तक डेरा डाले हुए हैं, जहां उनके सैकड़ों सैन्य वाहन और दर्जनों नावें तैनात हैं।

PLA Troops

PLA Troops after capturing famous area Pangong TSO Lake

India China Border Tension: चीन और भारतीय सेना (Indian Army) के बीच बनी सहमति के आधार पर गलवान घाटी हॉट स्प्रिंग और गोगरा पोस्ट से चीनी सेना (PLA Troops) का पीछे हटना जारी है। चीन ने आज कुछ वाहनों को भी पीछे हटाया है। भारतीय सेना (Indian Army) पहले ही अपने पेट्रोलिंग प्वाइंट से पीछे है। सीमा पर तनाव कम होने के बावजूद भारतीय सेना (Indian Army) ने लद्दाख क्षेत्र में रात को भी ऑपरेशन चलाकर युद्ध की तैयारी का जायजा लिया।

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तीन बार के कोर कमांडर और दर्जन भर स्थानीय कमांडर स्तर की बैठक एवं गत रविवार को एनएसए अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई बैठक के बाद चीन ने गलवान घाटी हॉट स्प्रिंग और गोगरा पोस्ट से अपने सैनिकों को पीछे करना शुरू कर दिया है लेकिन क्या चीन पैंगोंग त्सो झील के फिंगर-4 की चोटी को त्याग कर अपने मूल स्थान फिंगर-8 तक चला जाएगा? क्योंकि चीनी सेना (PLA Troops) अभी तक पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग त्सो झील और डेपसांग से पीछे नहीं हटे हैं।

फिंगर-4 पर अभी भी डटी है चीनी सेना (PLA Troops)

सूत्रों के अनुसार दोनों सेनाओं के बीच सबसे विवादित मुद्दा पैंगोंग त्सो झील के फिंगर-4 क्षेत्र और डेपसांग में चीनी सैनिकों का पीछे हटना नामात्र का है। पैंगोंग त्सो झील के पास चीनी सैनिक (PLA Troops) फिंगर-4 तक डेरा डाले हुए हैं, जहां उनके सैकड़ों सैन्य वाहन और दर्जनों नावें तैनात हैं। इसके अलावा चीनी सेना ने भी गलवान के उत्तर में पठार डेपसांग के पास के क्षेत्र में एक नया शिविर खोल दिया है। उन्होंने यहां ठेरा जमाने के साथ ही वाहनों और सैनिकों को भी तैनात किया है।

सेना सूत्रों के अनुसार यह सिलसिला आज भी जारी है और समझौते के अनुसार 72 घंटे के बीच दोनों सेनाएं बफर जोन बनाएंगीं। बफर जोन एक से लेकर साढे तीन किलोमीटर तक हो सकता है। यह क्षेत्र इसलिए बफर जोन बनाया जा रहा है‚ ताकि फिर कभी गलवान घाटी जैसी हिंसक झड़पें न हो। सेनाओं को फेस टू फेस खड़े होने के बजाय एक–डेढ़ किलोमीटर दूर खड़ा होना होगा।

चीन ने कितना वादा निभाया है‚ इसका वेरिफिकेशन 72 घंटे बाद शुरू होगा। यह 72 घंटे कल पूरे हो जाएंगे यानी बृहस्पतिवार से दोनों सेनाओं (Indian Army & PLA Troops) का पीछे हटने का वेरिफिकेशन शुरू होगा। तब असल में पता चलेगा कि चीनी सेना (PLA Troops) कितनी पीछे हटी है और उसने अपने द्वारा बनाए गए टेंट और अस्थाई ढांचे कितने हटाए हैं? उसकी गाडि़यां कितनी पीछे हटी हैं?

यदि समझौते के मुताबिक सब ठीक रहा तो दूसरे चरण में हथियार युक्त वाहनों का और तीसरे चरण में गोला–बारूद को पीछे हटाया जाएगा। भारत ने LaC पर वायु सेना (Indian Air Force) के लड़ाकू जहाजों और फाइटर हेलिकॉप्टर से अभ्यास किया। यह अभ्यास रात के अंधेरे में हुए‚ ताकि जरूरत पड़ने पर पायलटों को रात में पहाड़ों में ऑपरेशन करने का अनुभव मिल सके। वायुसेना ने सुखोई और अपाचे हेलिकॉप्टरों से ऑपरेशन किया।

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