चीन के खिलाफ भारत ने अपनाई जैसे को तैसा की रणनीति, गलवान से पीछे हटने के मुद्दे पर लगातार शातिर चालें चल रहा है ड्रैगन

चीन (China) के लगातार बदले रुख के कारण अब भारत का उसपर ऐतबार भी नहीं कर रहा है। भारत को संदेह है कि अगर वो अपने सैनिक थोड़ा पीछे कर भी ले तो क्या चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) फिंगर 8 तक सीमित रहेगी।

China PLA Troops

India China Border Tension

India China Border Tension: पूर्वी लद्दाख में जारी भारत-चीन विवाद के दौरान ड्रैगन पिछले 6 महीने से भारत की सब्र की परीक्षा ले रहा है। लेकिन लगता है शायद परिस्थितियों की परखने की उसकी क्षमता ही नहीं है। चीन अभी इसी मुगालते में है कि भारत को तो रणनीतिक महत्व के मोर्चों से पीछे हटा देगा, लेकिन खुद कब्जे की अपनी नीति से बाज नहीं आयेगा। यही वजह है कि चीन ने सैन्य स्तर के ताजा दौर की बातचीत में डी-एस्केलेशन के लिए बिल्कुल अजीब प्रस्ताव रखा।

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सैन्य सूत्रों के अनुसार, चीन (China) पेंगोंग झील के फिंगर 8 से वापस जाने को तैयार है। लेकिन भारत को वह फिंगर 4 से पीछे हटाकर फिंगर 3 और फिंगर 2 के बीच कब्जा करना चाहता है। चीन ये जानता है कि भारत अपने सैनिकों को किसी भी कीमत पर पीछे नहीं बुलायेगा, क्योंकि इसने किसी तरह का अतिक्रमण नहीं किया है। ये बात चीन के सामने स्पष्ट कर दिया जा चुका है कि भारत का इलाका फिंगर 8 तक जाता है। इसलिए, भारतीय सैनिकों को पीछे फिंगर 3 पर बुलाने का तो सवाल ही नहीं उठता है।

वहीं दूसरी तरफ, पिछली मई महीने से पहले भारतीय सैनिकों को फिंगर 8 तक पेट्रोलिंग करने से नहीं रोका जाता था। चीन के सैनिक तभी भी फिंगर 8 पर तैनात थे, लेकिन अब वो भारतीय जवानों के वहां पहुंचने पर आपत्ति जता रहे हैं। इसलिए, भारत ने चीन (China) से ही कहा कि उसे मई की स्थिति बहाल करते हुए फिंगर 8 से पीछे जाना होगा। भारत ने ये साफ कर दिया है कि डी-एस्केलेशन की शुरुआत चीन की तरफ से ही होगी और उसे ही ऐसा करना होगा।

चीन (China) के लगातार बदले रुख के कारण अब भारत का उस पर भरोसा भी नहीं कर रहा है। भारत को शक है कि अगर वो अपने सैनिकों को थोड़ा पीछे कर भी ले तो, क्या चीनी सैनिक फिंगर 8 तक सीमित रहेंगे। अब भारत और चीन के बीच नॉर्थ बैंक- साउथ बैंक की पैकेज डील हो रही है। इसके तहत भारत ने चीन से कहा है कि दोनों देश पैंगोंग-त्सो लेक के दक्षिणी और उत्तरी छोरों से अपने-अपने सैनिकों वापस बुला लें। लेकिन चीन कुछ ज्यादा ही शातिर बन रहा है। उसे स्पांगुर से लेकर रिचिन-ला तक, पूरे दक्षिणी छोर के रणनीतिक स्थानों पर तैनात भारतीय सैनिक तो बहुत चुभ रहे हैं, लेकिन उत्तरी छोर पर अपने जवानों का जमावड़ा उसे अच्छा लग रहा है।

गौरतलब है कि भारत ने इसी अगस्त महीने में पैंगोंग-त्यो लेक के दक्षिणी किनारे के कई महत्वपूर्ण स्थानों पर मोर्चेबंदी कर ली थी। इससे चीन (China) बौखला उठा और उसके सैनिक धोखे से उन जगहों तक पहुंचने की कोशिश करने लगे जहां भारतीय जवानों ने अड्डा जमाया है। ऐसे में भारतीय सैनिकों ने जब हवाई फायरिंग की तो चीन के सैनिक वहां से भाग खड़े हुए और ऐसा अभी तक चार-चार बार हो चुका है।

इन परिस्थितियों में चीन (China) अपना चेहरा छिपाने की कोशिश करने लगा है। लेकिन, गलवान घाटी में जो हुआ, उसके बाद भारत ने ठान लिया है कि अब चीन को कोई मौका नहीं दिया जायेगा। भारत का स्टैंड क्लियर है- चीन को अप्रैल 2020 के पोजिशन पर हर हाल में लौटना ही होगा।

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