नक्सलियों के खिलाफ होगा ग्रे-हाउंड फोर्स की तर्ज पर एक्शन

केंद्रीय गृह मंत्रालय (Home Ministry) के वरिष्ठ सुरक्षा सलाहकार के. विजय कुमार 21 जनवरी को छत्तीसगढ़ पहुंचे। उन्होंने छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के नक्सल ऑपरेशन से जुड़े आला अधिकारियों से मुलाकात की। के. विजय कुमार के मुताबिक, तीनों राज्यों में अब नक्सल ऑपरेशन आंध्र के ग्रे- हाउंड (Greyhounds) फोर्स की तर्ज पर चलेगा।

Greyhounds
अधिकारियों के साथ मीटिंग में के. विजय कुमार।

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली से नक्सलियों को खदेड़ने के लिए ग्रे-हाउंड (Greyhounds) फोर्स के कमांडो भी उतारे जा सकते हैं। यह बैठक बंद कमरे में चली। मीटिंग को ‘एंटी नक्सल सेल वर्कशॉप’ नाम दिया गया था। के. विजय कुमार ने इस कार्यशाला में एंटी नक्सल सेल के अफसरों को कई अहम जानकारियां दीं। इसमें आंध्र के ग्रे-हाउंड फोर्स की तकनीकों के बारे में भी जानकारी दी गई।

अब पूरी संभावना है कि राज्य के सीमावर्ती इलाकों, खासकर गढ़चिरौली में ग्रे-हाउंड (Greyhounds) की तकनीकि और प्लानिंग का इस्तेमाल किया जाएगा। एंटी नक्सल सेल के एसपी जीएन बघेल ने बताया कि कार्यशाला में महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के वे अफसर मौजूद थे, जो एंटी नक्सल सेल, सर्च ऑपरेशन और क्विक रिस्पांस टीम में काम करते हैं।

ग्रे-हाउंड फोर्स की तर्ज पर एक्शन लेने की संभावना

छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में ग्रे-हाउंड (Greyhounds) फोर्स की तर्ज पर एक्शन की संभावनाएं इस वजह से भी बढ़ गई हैं, क्योंकि सुरक्षा सलाहकार के. विजय कुमार ने राजनांदगांव की मीटिंग से पहले हैदराबाद में ग्रे-हाउंड फोर्स के अफसरों से मुलाकात की। वहां उन्होंने ग्रे-हाउंड (Greyhounds) के काम करने के तरीकों को समझा। के. विजय कुमार इस महीने में तीसरी बार छत्तीसगढ़ पहुंचे। इससे पहले उन्होंने जगदलपुर का दौरा किया था। जानकारी के मुताबिक, महाराष्ट्र के गढ़चिरौली के घने जंगलों में लड़ाकू नक्सलियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। ऐसे में ग्रे-हाउंड फोर्स की मदद से सुरक्षाबल गढ़चिरौली में नक्सलियों के बेस को खत्म करने का प्लान बना सकते हैं।

क्या है ग्रे-हाउंड फोर्स?

ग्रे- हाउंड (Greyhounds) फोर्स को नक्सलियों से लड़ने में सबसे एक्सपर्ट फोर्स माना जाता है। आंध्रप्रदेश में नक्सलवाद पर नकेल कसने में ग्रे-हाउंड फोर्स का इस्तेमाल किया गया था। जब यह फोर्स आई थी तब आंध्रप्रदेश के 20 जिले नक्सलियों के कब्जे में थे। लेकिन कुछ ही समय में इस फोर्स ने इन जिलों को नक्सल मुक्त कर दिया। इसी फोर्स की योजनाओं की वजह से ही नक्सलियों का एनकाउंटर और सरेंडर शुरू हुआ। इस फोर्स की तकनीकियों का इस्तेमाल अब छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश से नक्सलवाद के खात्मे के लिए हो सकता है।

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