जम्मू-कश्मीर में आम लोगों से घुल-मिले विदेशी राजनयिक, घंटों की बातचीत

Article 370

संविधान के अनुच्छेद 370 (Article 370) के अधिकतर प्रावधानों को निरस्त करने के बाद विदेशी राजनयिकों की पहली यात्रा के तहत अमेरिका समेत 15 देशों के दूतों ने जम्मू–कश्मीर की नागरिक संस्थाओं के सदस्यों से बातचीत की।

Article 370

विदेशी राजनयिकों के इस दल को मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रमण्यम और पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह की अगुवाई में एक उच्चस्तरीय दल ने स्थिति से अवगत कराया।

नागरिक संस्थाओं के अधिकतर प्रतिनिधियों ने राजनयिकों को बताया‚ वह अनुच्छेद 370 (Article 370) को हटाने का समर्थन करते हैं। यह विदेशी दल बृहस्पतिवार को कश्मीर घाटी पहुंचा था‚ जहां उसने चुनिंदा राजनीतिक प्रतिनिधियों‚ नागरिक संस्थाओं के सदस्यों और शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ बातचीत की। सरकार ने यह आलोचना नकार दी है कि यह ‘गाइडि़ड़ टूर’ है। भारत में अमेरिका के राजदूत केनेथ जस्टर दिल्ली के उन विदेशी राजदूतों में शामिल थे जिन्होंने श्रीनगर में करीब सात घंटे बिताए। पिछले साल अक्टूबर में यूरोपीय संसद के कुछ सदस्यों ने श्रीनगर की यात्रा की थी लेकिन दूतों को अब तक घाटी में नहीं जाने दिया गया था।

अधिकारियों ने बताया‚ मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक की अगुवाई में एक सरकारी दल ने विदेशी प्रतिनिधिमंड़ल को अनुच्छेद 370 (Article 370) को हटाने और दो केंद्रशासित प्रदेश बनाने के बाद की सुरक्षा स्थिति के विभिन्न पहलुओं के बारे में बताया। मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक ने अनुच्छेद 370 (Article 370) के प्रावधानों को हटाने के बाद किए गए सुरक्षा उपायों की जानकारी दी और राजनयिकों द्वारा गिरफ्तारी‚ इंटरनेट पर रोक और कानून व्यवस्था सहित विभिन्न पहलुओं पर किए गए सवालों का जवाब दिया। अधिकारियों ने राजनयिकों को इस अवधि में शून्य हताहत के बारे में जानकारी दी जो पुलिस और सरक्षाबलों के लिए उपलब्धि है।

वित्त आयुक्त स्वास्थ्य अतुल ड़ुल्लू ने राजनयिकों की टीम को लोगों की सेहत देखरेख और मरीजों को किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़़े‚ उसके लिए सरकार की ओर से की गई व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी दी। उसके बाद पश्चिम पाकिस्तान के शरणार्थियों‚ वाल्मीकि समाज‚ गुज्जरों और वकीलों के प्रतिनिधियों समेत विभिन्न प्रतिनिधिमंड़लों के साथ विदेशी दल की बैठक हुई।

राजनयिकों के सवालों का जवाब देते हुए अधिकतर प्रतिनिधियों ने अनुच्छेद 370 (Article 370) के प्रावधानों को निरस्त करने के फैसले का स्वागत किया और कहा कि यह उनके समुदायों के लिए लाभदायक है।

जम्मू–कश्मीर गुज्जर यूनाइटेड़ फोरम के अध्यक्ष गुलाम नबी खटाना ने बताया‚ हमने राजनयिकों को बताया कि अनुच्छेद 370 (Article 370) के प्रावधानों को निरस्त करने के फैसले का गुज्जर समुदाय स्वागत करता है। राजनयिकों से मिलने वालों में शामिल राजौरी के वकील आसिफ चौधरी ने कहा‚ उनके लिए अनुच्छेद 370 (Article 370) फायदेमंद नहीं था और इसको निरस्त करने से उनके समुदाय के विकास एवं प्रगति के नए रास्ते खुले हैं।

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पश्चिमी पाकिस्तान शरणार्थी संगठन के अध्यक्ष लाभा राम गांधी ने राजनयिकों से कहा‚ अनुच्छेद 370 (Article 370) को खत्म करना उनके लिए देर से किया गया न्याय है। 

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