सरकार के आर्थिक पैकेज से MSME उद्योग को मिली संजावनी , 11 करोड़ लोगों के रोजगार को बचाने की कोशिश

MSME को बल मिलता है तो भारत विश्व के तमाम देशों की आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम होगा और विश्व का नेतृत्व करने की दिशा में भारत बढ़ सकेगा। इसका एक अन्य लाभ यह होगा कि बाजार में पूंजी की तरलता बढ़ेगी और कारोबारी से लेकर मजदूर तक सभी के सामने आर्थिक संकट दूर होगा।

MSME: MSME Registration

एमएसएमई (MSME) उद्यमियों का मनोबल पूरी तरह टूट गया था क्योंकि लाखों ऐसे उद्यमी हैं जिन्हें भविष्य अंधकारमय और भारी कर्ज में डूबा दिखाई दे रहा था।

देश के सूक्ष्म‚ मध्यम व लघु उद्योगों के लिए लगभग 3 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक का बड़ा पैकेज देकर सरकार ने वास्तव में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इस पैकेज से लॉकडाउन (Lockdown) के कारण संकट से जूझ रहे एमएसएमई (MSME) को जहां संजीवनी मिली है वहीं लगभग 11 करोड लोगों पर मंडरा रहे रोजगार के संकट को भी सरकार ने टालने की कोशिश की है। इस पैकेज से केवल न केवल एमएसएमई  क्षेत्र के उद्यमियों का हौसला बढ़ेगा बल्कि देश के सामने विदेश व्यापार के भी नए अवसर उत्पन्न होंगे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) ने 12 मई को जब 20 लाख करोड रुपये के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया तो उसम समय भी देश के एमएसएमई उद्यमियों तथा प्रमुख उद्योग संगठनों को इस बात का अंदाजा नहीं था कि सरकार एमएसएमई  क्षेत्र के लिए अपना खजाना खोल देगी। एमएसएमई  उद्योग के लिए 3 लाख करोड रुपये से भी अधिक का पैकेज निःसंदेह बड़ा पैकेज है और देर सवेर इसका सकारात्मक प्रभाव भी देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

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लॉकडाउन (Lockdown) के कारण देश के एमएसएमई (MSME) उद्यमियों का मनोबल पूरी तरह टूट गया था क्योंकि लाखों ऐसे उद्यमी हैं जिन्हें भविष्य अंधकारमय और भारी कर्ज में डूबा दिखाई दे रहा था। लॉकडाउन के कारण एमएसएमई उद्यमियों पर करोडों रुपया खरीददारों के पास फंस गया है और उन पर भारी कर्ज हो गया है। इन परिस्थतियों में वह अपने उद्यम को दोबारा शुरू करने की स्थिति में नहीं थे। बिना गारंटी के बैंक ऋण की योजना ऐसे उद्यमियों के लिये वरदान साबित होगी।

देश में लगभग 11 करोड लोग एमएसएमई (MSME) क्षेत्र से सीधे जुड़े़ हैं इसके अलावा करोडों अन्य लोग ऐसे हैं जिनका रोजगार अप्रत्यक्ष रूप से एमएसएमई से जुड़ा है। देश के कुल निर्यात का लगभग 40 प्रतिशत केवल एमएसएमई क्षेत्र से होता है और देश की 50 प्रतिशत से अधिक आवश्यकताओं को भी एमएसएमई क्षेत्र पूरा करता है।

देश की अर्थव्यवस्था में एमएसएमई का योगदान 10 प्रतिशत से अधिक है‚ यही कारण है कि एमएसएमई को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहा जाता है। यही कारण है कि एमएसएमई को डूबने से बचाना सरकार की पहली प्राथमिकता रही है।

केवल एमएसएमई (MSME) क्षेत्र ही ऐसा क्षेत्र है जिसके माध्यम से सरकार घरेलू जरूरतों को पूरा कर विदेशी आयात को कम कर सकती है। यही भारत को आत्मनिर्भर बनाने की कड़ी हो सकती है। सरकारी खरीददारी में 200 करोड रुपये तक की खरीददारी के लिए ग्लोबल टेंडर पर रोक भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ही बड़ा कदम है।

ऐसे समय जब पूरा विश्व वैश्विक महामारी कोरोना (Coronavirus) के प्रकोप से जूझ रहा है‚ एमएसएमई (MSME) को नया जीवन देना विदेश व्यापार की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि अधिकतर देशों में उद्योग धंधे बंद हैं। वहां लोग आवश्यक सामान की किल्लत से जूझ रहे हैं।

ऐसे में यदि एमएसएमई (MSME) को बल मिलता है तो भारत विश्व के तमाम देशों की आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम होगा और विश्व का नेतृत्व करने की दिशा में भारत बढ़ सकेगा। इसका एक अन्य लाभ यह होगा कि बाजार में पूंजी की तरलता बढ़ेगी और कारोबारी से लेकर मजदूर तक सभी के सामने आर्थिक संकट दूर होगा। वित्तमंत्री ने जितनी भी घोषणाएं की हैं उनसे लगभग 50 लाख से अधिक एमएसएमई को सीधे फायदा होगा।

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