यूरोपीय सांसदों का कश्मीर दौरा, विपक्ष की नजर में ये संसद का अपमान

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PM-NSA ने सांसदों को कश्मीर (Kashmir) की स्थिति से अवगत कराया

मोदी ने कहा- आतंक के प्रायोजकों और समर्थकों पर कार्रवाई जरूरी

सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने की दौरे की आलोचना

कांग्रेस ने सांसदों के दौरे को संसद का अपमान करार दिया

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जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद किसी विदेशी प्रतिनिधिमंडल के पहले कश्मीर दौरे के तहत 27 यूरोपीय सांसदों का एक दल वहां की यात्रा के लिए पहुंचा। घाटी (Kashmir) की स्थिति के बारे में पाकिस्तानी दुष्प्रचार का मुकाबला करने के लिए सरकार की यह एक बड़ी कूटनीतिक पहल है जिसके तहत उन्हें विकास और शासन को लेकर भारत की प्राथमिकताओं के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जाएगी।

यूरोपीय संसद के इन सदस्यों ने अपनी दो दिवसीय कश्मीर (Kashmir) दौरे से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट रूप से उन्हें बताया कि आतंकवाद का समर्थन और उसे प्रायोजित करने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है। एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार प्रधानमंत्री ने कहा कि इस दौरे से शिष्टमंडल को जम्मू, कश्मीर और लद्दाख क्षेत्र की सांस्कृतिक एवं धार्मिक विविधता को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी और इसके साथ ही वे इस क्षेत्र के विकास एवं शासन से संबंधित प्राथमिकताओं की सही स्थिति से अवगत होंगे।राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भी सांसदों को पाकिस्तान से पनपने वाले सीमा पार आतंकवाद, अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू कश्मीर के दज्रे में किए गए संवैधानिक बदलाव और घाटी की स्थिति से अवगत कराया। प्रतिनिधिमंडल में नौ देशों के सदस्य हैं। डोभाल ने यूरोपीय सांसदों के लिए दोपहर का भोज दिया। इसमें कुछ कश्मीरी नेता भी शामिल हुए जिनमें जम्मू-कश्मीर के पूर्व उपमुख्यमंत्री मुजफ्फर बेग, पूर्व पीडीपी नेता अल्ताफ बुखारी, राज्य में प्रखंड विकास परिषद् (बीडीसी) के कुछ नव-निर्वाचित सदस्य और रीयल कश्मीर फुटबॉल क्लब के सह- मालिक संदीप चट्टू भी शामिल थे।

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हालांकि, इस पहल की विपक्षी दलों ने तीखी आलोचना की और कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि वह यूरोपीय सांसदों को वहां जाने की अनुमति दे रही है लेकिन भारतीय नेताओं को ऐसा करने से रोक रही है जो भारत के लोकतंत्र और इसकी संप्रभुता का अपमान है। पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट किया, ’उम्मीद है कि उन्हें लोगों, स्थानीय मीडिया, डॉक्टरों और नागरिक समाज के सदस्यों से बातचीत करने का मौका मिलेगा। कश्मीर और दुनिया के बीच के लोहे के आवरण को हटाने की जरूरत है। जम्मू-कश्मीर को अशांति की ओर धकेलने के लिए भारत सरकार को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।’ उन्होंने अमेरिकी सीनेटरों को अनुमति नहीं देने के केंद्र के फैसले पर सवाल उठाया। महबूबा अभी नजरबंदी में हैं।

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यह यात्रा कश्मीर (Kashmir) की स्थिति पर यूरोपीय संसद में हुई बहस के कुछ हफ्ते बाद हो रही है, जिसमें वहां की स्थिति को लेकर चिंता जताई गई थी। अधिकारियों का यहां मानना है कि इस दौरे से सांसदों को पाकिस्तान के ‘‘झूठे विमर्श’ का शिकार होने के बदले खुद से चीजों को देखने का अवसर मिलेगा। सूत्रों के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल जम्मू कश्मीर प्रशासन के अधिकारियों और स्थानीय लोगों से मुलाकात करेगा। दो दिवसीय यात्रा के दौरान, वे राज्यपाल से भी मुलाकात कर सकते हैं। उनके मीडिया के साथ बातचीत करने की भी संभावना है। प्रतिनिधिमंडल में इटली के फुल्वियो मातरुसिएलो, ब्रिटेन के डेविड र्रिचड बुल, इटली की जियाना गैंसिया, फ्रांस की जूली लेंचेक, चेक गणराज्य के टामस डेकोवस्की, स्लोवाकिया के पीटर पोलाक और जर्मनी के निकोलस फेस्ट शामिल हैं। डेकोवस्की ने कहा, ‘यह (अनुच्छेद 370 का हटाया जाना) भारत का आंतरिक मामला है क्योंकि कश्मीर इसका हिस्सा है। यह भारत सरकार का विशेषाधिकार है कि वह आंतरिक फैसला करे। हम इस पर भारत के साथ हैं।’

बीजेपी सरकार के समर्थक सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने यूरोपीय संघ के शिष्टमंडल के कश्मीर (Kashmir) दौरे को लेकर केंद्रीय सरकार पर सोमवार को हमला बोला। उन्होंने कहा कि उसके सदस्य व्यक्तिगत तौर पर क्षेत्र का दौरा करेंगे और दावा किया कि यह हमारी राष्ट्रीय नीति से पीछे हटना है। स्वामी ने इस दौरे को रद्द करने की मांग की।

कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने ट्वीट कर कहा, जब भारतीय नेताओं को जम्मू-कश्मीर के लोगों से मुलाकात करने से रोक दिया गया तो फिर राष्ट्रवाद के चैम्पियन होने का दावा करने वालों ने यूरोपीय नेताओं को किस वजह से जम्मू-कश्मीर का दौरा करने की इजाजत दी ? उन्होंने आरोप लगाया, यह भारत की संसद और लोकतंत्र का अपमान है।

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