इंडियन आर्मी को मिली देसी बोफोर्स, पाकिस्तान को देगी करारा जवाब

जंग में पाकिस्तान के छक्के छुड़ाने में सक्षम देसी बोफोर्स भारतीय सेना में शामिल हो गई। इसका असली नाम धनुष हॉविट्जर (Dhanush Howitzer) है। धनुष को बोफोर्स की तरह ही बनाया गया है।

Indian Army

फाइल फोटो

जंग में पाकिस्तान के छक्के छुड़ाने में सक्षम देसी बोफोर्स भारतीय सेना (Indian Army) में शामिल हो गई। इसका असली नाम धनुष हॉविट्जर (Dhanush Howitzer) है। धनुष को बोफोर्स की तरह ही बनाया गया है। बोफोर्स को 1980 के दशक में भारतीय सेना में शामिल किया गया था।

धनुष हॉविट्जर को जबलपुर की गन कैरेज फैक्ट्री खमरिया में तैयार किया गया है। स्वदेशी धनुष तोप अब देश की रक्षा के लिए तैयार है। तोपों की पहली खेप गन कैरेज फैक्ट्री ने सेंट्रल ऑर्डनेंस डिपो को सौंपी। फ्लैग ऑफ सेरेमनी के बाद तोपों को फैक्ट्री से रवाना कर दिया गया। धनुष तोप बोफोर्स से भी ज़्यादा ताकतवर है।

भारत में पहली बार बनी लंबी रेंज की तोप धनुष की मारक क्षमता बोफोर्स से ज्यादा है। बोफोर्स की मारक क्षमता जहां 32 किलोमीटर है वहीं देसी धनुष की मारक क्षमता 38 किलोमीटर है। इसका कैलिबर 155 mm है जबकि यह 38 किमी निशाना बना सकती है।

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K-9 वज्र और M-777 अल्ट्रा-लाइट के बाद फोर्स में शामिल होने वाली तीसरे प्रकार की आर्टिलरी गन है। धनुष तोप भारतीय सेना (Indian Army) की अब तक की सबसे ताकतवर तोप है। यह दिन और रात दोनों में फायर करने में सक्षम है।

इस तोप का निर्माण कार्य 2011 में काम शुरू हुआ था, जो 2014 में पूरा हो गया था। उसके बाद लगातार 4 साल से तोप का परीक्षण चल रहा था। परीक्षण के दौरान रेगिस्तान से लेकर ऊंचाई वाले हिस्सों में भी धनुष भरोसेमंद साबित हुआ है। इस तोप की पहाड़ी इलाकों में आसानी से तैनाती की जा सकती है।

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