फिल्मों में नूतन के संजीदा किरदारों ने उन्हें अमर बना दिया, स्वीमिंग कॉस्टयूम पहन सबको चौंकाया

चेहरे पर सादगी, आखों में चमक, अभिनय में सम्मोहन, अदाओं की मल्लिका ये सारी खूबियां बीते जमाने की मशहूर अदाकार नूतन (Nutan) की हैं। जिन्होंने अपने अभिनय के दम पर दर्शकों के दिलों पर करीब 40 सालों तक राज किया। 

Nutan

नूतन (Nutan) का जन्म 4 जून, 1936 को अपने जमाने की मशहूर अदाकारा शोभना समर्थ और निर्देशक कुमार सेन के घर में हुआ था। नूतन को बचपन से ही फिल्मी माहौल मिला। नौ बरस की उम्र में ही उन्होंने अपने पिता के निर्देशन में बनी फिल्म ‘नल-दमयंती’ में बाल कलाकार की भूमिका निभाई। पाँच वर्ष बाद मां शोभना ने ‘शोभना पिक्चर्स’ की स्थापना कर हमारी बेटी में अपनी दोनों बेटियों (नूतन और तनूजा) को कैमरे के सामने कर दिया। नूतन की बतौर बाल कलाकार फिल्म तो नहीं चली लेकिन पर्दे पर आए एक चेहरे ने लोगों का ध्यान जरूर आकर्षित किया। इस फिल्म के तुरंत बाद आई ‘नगीना’ और ‘हम लोग’ नामक फिल्में। दोनों ही फिल्में सफल रहीं और नूतन को बतौर स्टार का दर्जा हासिल हो गया। उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने एक के बाद एक अनेकों फिल्मों में नायिका की भूमिकाएं निभाई।

इतिहास में आज का दिन – 21 फरवरी

नूतन (Nutan) ने अपने 40 साल लंबे फिल्मी करियर में करीब 70 फिल्मों में काम किया। वो अपने जमाने के सभी बड़े अभिनेताओं के साथ काम कर चुकी हैं। उन्होंने गुजरे जमाने के सुपर स्टार देव आनंद, दिलीप कुमार, संजीव कुमार, धर्मेंद्र, अमिताभ बच्चन जैसे सितारों के बीच अपनी दमदार एक्टिंग के दम पर एक अलग पहचान कायम की। नूतन ने एक नेवी ऑफिसर रजनीश बहल से शादी की और शादी के बाद उन्होंने अपने गृहस्थी को तवज्जो देना चाहा, लेकिन मोहनीश के जन्म के बाद भी उनके पास एक से बढ़कर एक फिल्मों के ऑफर आते रहे, लिहाजा ना चाहते हुए भी उन्होंने अपने फिल्मी करियर को जारी रखा। 

फिल्म ‘सोने की चिड़िया’ के हिट होने के बाद हिंदी सिनेमा में उनके नाम के डंके बजने लगे। 1958 में आई फिल्म ‘दिल्ली का ठग’ में नूतन ने स्विमिंग कॉस्टयूम पहनकर मौजूदा समय के रूढ़ीवादी समाज को चौंका दिया था, लेकिन नूतन इतने से ही नहीं रूकीं, फिल्म बारिश में उनके बोल्ड सीन्स ने सिनेमाघरों में दर्शकों को तो खूब खिंचा लेकिन भारतीय समाज में उनकी खूब आलोचना भी हुई। लेकिन बाद में  फिल्म ‘सुजाता’ और ‘बंदिनी’ में नूतन ने अत्यंत मर्मस्पर्शी एक्टिंग कर उन्होंने अपने उपर लगे बोल्ड एक्ट्रेस के छवि को बदल दिया। साल 1959 में आई फिल्म ‘सुजाता’ नूतन के फिल्मी करियर के लिये मील का पत्थर साबित हुयी। इस फिल्म में नूतन ने अछूत कन्या के किरदार को रूपहले पर्दे पर काफीं संजीदगी से निभाया। इस फिल्म में उनके अभिनय की उनके आलोचकों ने भी तारीफ की, नतीजन उन्हें दूसरी बार फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। साल 1963 में रिलीज हुई फिल्म बंदिनी में नूतन की एक्टिंग को देखकर ऐसा लगा कि केवल उनका चेहरा ही नही बल्कि उनके शरीर का हर हिस्सा अभिनय करने में माहिर है। 

नूतन (Nutan) को 6 बार सर्वश्रेष्ठ फिल्म अभिनेत्री के लिए फिल्म फेयर अवॉर्ड मिले। सादा नैन नक्श के कारण ही यह संजीदा अभिनेत्री हमेशा दर्शकों के मन के एक खास कोने में सदैव ही विद्यमान रही। सही मायने में नूतन स्टार या हीरोइन नहीं थीं, वे तो अभिनेत्री थीं। शायद इसीलिए चार दशक लंबा फिल्मी सफर वह बिना ज्यादा उतार-चढ़ाव के जी गईं। अगर नूतन भी ग्लैमर की चमक में डूब गई होतीं तो, एक संवेदनशील, विरल संवेदना को जीने वाली यह अभिनेत्री बहुत पहले ही पर्दे से गायब हो गई होती।

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p style=”text-align: justify;”>हिंदी सिनेमा में करीब 4 दशकों तक अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों को मंत्र-मुग्ध करने वाली ये महान अभिनेत्री (Nutan) 21 फरवरी 1991 को कैंसर से अपनी जंग हार गई और इस दुनिया को अलविदा कह गयीं। हिंदी सिनेमा में उनके बेटे मोहनिश बहल आज भी अपने अभिनय के दम पर एक अलग मुकाम रखते हैं। नब्बे की दशक की नंबर एक अभिनेत्री काजोल उनकी भतीजी हैं। 

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