तालीम के लिए बना देवबंद विवादों से नहीं है अछूता, पिछले कुछ सालों में पकड़े गए कई आतंकी

वर्ष 1866 में कुछ इस्लामिक स्कॉलर्स ने मुस्लिम लड़कों को शिक्षित करने के बारे में सोचा। इन्हीं लड़कों की अच्छी सोच का नतीजा है मदरसा। एक खास बात यह भी है कि मदरसा खोलने के लिए इन लड़कों ने मुहर्रम का दिन ही चुना था। उत्तर प्रदेश के देवबंद में इन लड़कों के प्रयास से मस्जिद के किनारे अनार के पेड़ की छाव में मदरसा अरबिया इस्लामिया देवबंद (Deoband) का पहला सबक पढ़ाया गया।

Deoband
तालीम के लिए बना Deoband विवादों से नहीं है अछूता

आगे चलकर यह Deoband इस्लामिक शिक्षा और सुन्नी सुधारवादी आंदोलन का गढ़ बना। यह सच है कि देवबंद ने तब से लेकर आज तक कई तरह के उतार-चढ़ाव देखे हैं। आज देवबंद में करीब सौ से ज्यादा छोटे-बड़े मदरसे हैं। लेकिन यह दुर्भाग्य की ही बात है कि आजादी के बाद से अब तक देवबंद कई बार विवादों में भी रहा। बच्चों के जिस तालीम को लेकर देवबंद का निर्माण किया गया था अफसोस है कि कई बार देवबंद के अंदर दी जाने वाली शिक्षा को लेकर ही विवाद हुआ। पिछले आठ साल में 10 से ज्यादा आतंकी ऐसे पकड़े गए, जिन्होंने Deoband से तालीम पाई है।

इसी वजह से एटीएस-एनआईए समेत तमाम शीर्ष सुरक्षा-खुफिया एजेंसियों की नजरें हर वक्त देवबंद पर गड़ी रहती हैं। यूपी एटीएस ने तीन मार्च-2019 को देवबंद से जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शाहनवाज तेली और आकिब अहमद मलिक को गिरफ्तार किया था। दोनों को पुलवामा में सीआरपीएफ दस्ते पर हुए हमले की पहले से जानकारी थी। इससे पहले दिसंबर-2018 में राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (NIA) ने अमरोहा में आईएस के नए मॉड्यूल हरकत उल हर्ब-ए-इस्लाम का पर्दाफाश करते हुए 13 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया था। ज्यादातर संदिग्ध आतंकियों ने देवबंद में रहकर शिक्षा ग्रहण की थी।

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कई साल पहले दिल्ली पुलिस द्वारा पकड़े गए इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी एजाज शेख ने खुलासा किया था कि देवबंद में उसके तीन आतंकवादी साथी छात्र के रूप में रह रहे हैं। आईबी (IB) के इनपुट के अनुसार आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा, हिज्बुल मुजाहिदीन और इंडियन मुजाहिदीन की वेस्ट यूपी में गहरी पैठ बनी हुई है। इनके कई स्लीपिंग मॉड्यूल मेरठ, देवबंद, शामली, गाजियाबाद, बागपत, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, अमरोहा, संभल और रामपुर में सक्रिय हैं। देवबन्द भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के सहारनपुर ज़िले में स्थित एक नगर है। यह दिल्ली से लगभग 150 किमी दूर है और सहारनपुर और मुज़फ़्फ़रनगर के बीच स्थित है।

सहारनपुर से यह 52 किमी और मुज़फ़्फ़रनगर से 24 किमी दूर है। देवबंद एक प्रागैतिकहासिक नगर है, जिसकी कहानी मानव सभ्यता के अतीत से शुरु होती है। सन् 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के बाद यहां मदरसा दारुल उलूम देवबंद की स्थापना हुई जो प्रसिद्ध है। विभाजन के बाद पंजाबी समुदाय और सिक्ख समुदाय के लोग भी देवबंद में आकर बस गए। पंजाबी समुदाय की तादाद कम है और सिक्खों की तादाद तो बस गिनती की ही है। रेलवे रोड पर एक गुरूद्वारा भी है। देवबंद में दारूल उलूम मदरसा है। ऐसा माना जाता है कि मिस्र के इस्लामी मदरसे अल अज़हर के बाद ये दूसरा सबसे अहम इस्लामी शिक्षण संस्थान है।

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