जवानों के लिए CRPF का एक और सराहनीय कदम, विकलांग जवानों को मिलेगा दूसरा मौका

हैदराबाद में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने अपने जवानों को सम्मानजनक जिंदगी देने के लिए एक सराहनीय कदम उठाया है। ये कदम उन जवानों के लिए है जो ड्यूटी के दौरान दुर्घटना का शिकार होकर विकलांग हो गए हैं। इस कदम के तहत हैदराबाद स्थित एक संस्था विकलांग लोगों को अलग-अलग खेलों और कौशल-विकास गतिविधियों के लिए प्रशिक्षित करेगी। ‘दिव्यांग वॉरियर्स’ (Divyang Warriors) नामक इस कार्यक्रम का उद्घाटन सीआरपीएफ के डायरेक्टर जनरल वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी डॉ एपी माहेश्वरी ने किया।

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सीआरपीएफ (CRPF) ने आदित्य मेहता फाउंडेशन के साथ एक एमओयू पर हस्ताक्षर किया। ये संस्था एशिया की पहली ऐसी चैरिटेबल संस्था है जो विकलांग लोगों को राष्ट्रीय पैरा-खेलों में प्रशिक्षित करके और लोगों का पुनर्वास करेगी। आम लोगों के साथ-साथ अब इस संस्था में सीआरपीएफ (CRPF), बीएसएफ (BSF) और आईटीबीपी (ITBP) के उन सुरक्षा बलों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा जो बॉर्डर या नक्सली इलाकों में ड्यूटी के दौरान विकलांग हो गए हैं।

ये संस्था विकलांग लोगों को अलग-अलग खेलों में उनके रुझान और सक्षमता का आकलन करके अनुभवी कोच के माध्यम से प्रशिक्षित करेगी।

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इस खास मौके पर सीआरपीएफ (CRPF) के डीजी डॉ एपी माहेश्वरी ने कहा कि ये दुनिया हमें लपकने के लिए कई मौके देती है। हमें बस इन मौकों को गंभीरता से लेने के लिए एक चीज की जरूरत है और वो है परिस्थिति के अनुसार अपने मन को मजबूत बनाना।  

इस एमओयू (MoU) के इनोवेटिव प्रोजेक्ट का हवाला देते हुए डॉ माहेश्वरी ने कहा कि सीएपीएफ (CAPFs) के शारीरिक रूप से अक्षम जवान डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित साइबर प्लेटफॉर्म और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, पैरा-खेलों और अन्य दूसरे कलात्मक गतिविधियों में असंख्य संभावनाओं को तलाश सकते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस एमओयू के माध्यम से सुरक्षाबल के हमारे ये जवान इस मौके का भरपूर लाभ उठायेंगे और दोबारा अपनी जिंदगी को सम्मानजनक तरीके से जीयेंगे।

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p style=”text-align: justify;”>हैदराबाद में सीआरपीएफ (CRPF) के डीजी डॉ एपी माहेश्वरी की मौजूदगी में ये एमओयू सीआरपीएफ के दक्षिण सेक्टर के आईजी श्री एम आर नाइक और आदित्य मेहता फाउंडेशन के एमडी आदित्य मेहता के बीच साइन किया गया। इस एमओयू (MoU) का खास मकसद ये ही है कि ‘दिव्यांग वारियर्स’ (Divyang Warriors) की प्रतिभाओं को पहचान कर उन्हें पैरा-स्पोर्ट्स से लेकर साइबर स्पेस तक विभिन्न क्षेत्रों में इनकी सेवाएं ली जाएं। गौरतलब है कि पिछले 10 सालों में देश के विभिन्न इलाकों में मातृ सेवा के दौरान किये जा रहे ऑपरेशन में सीआरपीएफ के 189 जवानों ने अपने शरीर का कोई ना कोई अंग गंवा दिया है। ऐसे में ये कार्यक्रम इन जवानों को जीने का एक और सुनहरा मौका देगा।

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