कोरोना के कारण दुनियाभर में खाद्य वस्तुओं के दामों में आई भारी कमी, गेहूं-चावल के दाम में बढ़ोतरी

एफएओ खाद्य वस्तुओं की अंतर्राष्ट्रीय कीमतों पर नजर रखता है। एफएओ का कहना है कि लगातार तीसरी बार कीमतों में गिरावट आई है। क्योंकि कोरोना वायरस (Coronavirus) के कारण आर्थिक और तार्किक कारणों से वस्तुओं की मांग में भी भारी कमी आई है। विश्व भर में खाद्य वस्तुओं की कीमत अप्रैल में औसतन 165.5 अंक रही जो पिछले महीने की तुलना में 3.4 फीसदी कम और अप्रैल 2019 की तुलना में तीन फीसदी नीचे है।

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कोविड–19 (Coronavirus) के कारण विश्व भर में हुए लॉकडाउन से खाद्य पदार्थों की कीमतों में भारी गिरावट आई है। होटल और रेस्तरां बंद होने के कारण मांस‚ मक्खन और दूध पाउडर की कीमतें में चार फीसदी तक की गिरावट दर्ज हुई है जबकि पेट्रोल की मांग कम होने से एथलॉन की मांग भी घटी है जिसके कारण गन्ने से चीनी का उत्पादन ज्यादा हुआ। नतीजतन विश्वभर में चीनी की कीमत में 14 फीसदी से अधिक की गिरावट हो गई है। इस दौरान शाकाहार बढ़ने से गेहूं और चावल की कीमतें बढ़ी हैं।

खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने खाद्य मूल्य सूचकांक जारी किया है। एफएओ खाद्य वस्तुओं की अंतर्राष्ट्रीय कीमतों पर नजर रखता है। एफएओ का कहना है कि लगातार तीसरी बार कीमतों में गिरावट आई है। क्योंकि कोरोना वायरस (Coronavirus) के कारण आर्थिक और तार्किक कारणों से वस्तुओं की मांग में भी भारी कमी आई है। विश्व भर में खाद्य वस्तुओं की कीमत अप्रैल में औसतन 165.5 अंक रही जो पिछले महीने की तुलना में 3.4 फीसदी कम और अप्रैल 2019 की तुलना में तीन फीसदी नीचे है।

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चीनी मूल्य सूचकांक मार्च से 14.6 फीसदी की गिरावट के साथ 13 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया। अभी इसमें और भी गिरावट होने का अनुमान लगाया है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से गन्ने के उत्पाद एथनाल की मांग कम हो गई जिससे चीनी का उत्पादन बढ़ गया। ऐसे में निर्यात के लिए चीनी ज्यादा उपलब्ध हो गई है। कई देशों में चीनी की दर और भी कम करने का दवाब है।

खाद्य तेल प्राइस इंडेक्स में अप्रैल में 5.2 फीसदी की गिरावट आई है जो गिरते हुए पाम‚ सोया और रेपसीड तेल मूल्यों से कम है। डेयरी मूल्य सूचकांक 3.6 फीसदी तक गिर गया जिसमें उत्तरी गोलार्द्ध में निर्यात के लिए उत्पाद बढ़े लेकिन आयात कम होने और रेस्तरां बिक्री कम होने से मक्खन और दूध पाउडर की कीमतों में दो अंकों की गिरावट दर्ज की गई।

मांस मूल्य सूचकांक में 2.7 फीसदी की गिरावट आई है। चीन से आयात की मांग में आंशिक सुधार तो आया है लेकिन और यह ज्यादा नहीं है। लॉकडाउन के कारण लोग घरों पर ही हैं। इससे खाद्य सेवा क्षेत्र से मांग कम है। कोविड–19 (Coronavirus) महामारी मांस की मांग और आपूर्ति दोनों पक्षों को मार रही है क्योंकि रेस्तरां बंद होने और घरेलू आय कम होने से प्रसंस्करण की खपत कम हो रही है।

अनाज मूल्य सूचकांक में भी मामूली गिरावट आई क्योंकि गेहूं और चावल की अंतर्राष्ट्रीय कीमतें काफी बढ़ गई जबकि मक्का की कीमतें तेजी से गिरीं। मार्च के बाद से अंतर्राष्ट्रीय चावल की कीमतों में 7.2 फीसदी की वृद्धि हुई जो वियतनाम द्वारा अस्थायी निर्यात प्रतिबंधों के एक बड़े हिस्से के कारण था जिसे बाद में निरस्त कर दिया गया था।

गेहूं की कीमत में 2.7 फीसद की वृद्धि हुई है। मक्का सहित मोटे अनाजों की कीमतों में 10 फीसद की गिरावट आई है जो पशु चारा और जैव ईंधन उत्पादन दोनों के उपयोग की मांग में कमी के कारण है।

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