पति को छुड़ाने नक्सलियों के मांद में घुस गई, पत्नी की जिद से हारा ‘लाल आतंक’

एक महिला अपने पति को बचाने के लिए न सिर्फ नक्सलियों (Naxalites) के मांद में घुस गई बल्कि उसकी जिद ने ‘लाल आतंक’ को उसके आगे घुटने टेकने पर मजबूर कर दिए। मामला बीजापुर जिले के भोपालपटनम थाना क्षेत्र का है।

Naxalites

एक महिला अपने पति को बचाने के लिए ना सिर्फ नक्सलियों (Naxalites) के मांद में घुस गई बल्कि उसकी जिद ने 'लाल आतंक' को उसके आगे घुटने टेकने पर मजबूर कर दिए।(सांकेतिक तस्वीर)

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के नक्सल प्रभावित इलाकों के घने जंगलों में जाने से अच्छे-अच्छे सूरमा भी कतराते हैं। लेकिन एक महिला अपने पति को बचाने के लिए न सिर्फ नक्सलियों (Naxalites) के मांद में घुस गई बल्कि उसकी जिद ने ‘लाल आतंक’ को उसके आगे घुटने टेकने पर मजबूर कर दिए। मामला बीजापुर जिले के भोपालपटनम थाना क्षेत्र का है।

मिली जानकारी के मुताबिक गोरना गांव के रहने वाले संतोष कट्टाम, सिपाही हैं। कुछ दिनों पहले गांव में मेला लगा था और संतोष मेले में शामिल होने के लिए गए थे। लेकिन जब देर तक वो वापस नहीं लौटे तब उनकी पत्नी सुनीता और अन्य परिजन व्याकुल हो उठे। काफी खोजबीन के बाद भी संतोष का कुछ पता नहीं चल सका।

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करीब 2 दिनों बाद सुनीता को जानकारी मिली की उनके पति को नक्सलियों (Naxalites) ने अगवा कर लिया है। यह बात सुनकर सुनीता के पैरों तले जमीन खिसक गई। लेकिन सुनीता ने हार नहीं मानी और पति को नक्सलियों से छिन लाने की जिद ठान ली।

सुनीता अपनी 14 साल की बेटी, कुछ स्थानीय लोग और पत्रकारों को लेकर पति को ढूंढने नक्सलियों (Naxals) के मांद में घुस गई। 7 दिनों तक जंगल में इधर-उधर भटकने के बाद सुनीता उस जगह पहुंच गई जहां नक्सलियों ने उसके पति को अपहरण के बाद रखा था।

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इत्तेफाक से इस दिन नक्सलियों ने संतोष पर जनसुनवाई का भी इंतजाम किया था। नक्सलियों के कब्जे में पति को जिंदा देख सुनीता की जान में जान आ गई। सुनीता ने जब बताया कि वो संतोष की पत्नी है और उसे ढूंढती हुई यहां तक आई है तो उसकी साहस की यह बात सुन नक्सली भी दंग रह गए। सुनीता किसी भी कीमत पर अपने पति को वहां अकेला छोड़ कर आने के लिए तैयार नहीं थी।

सुनीता की निडरता ने खूंखार और बेरहम कहे जाने वाले नक्सलियों (Naxalites) को भी हैरान कर रखा था। मान-मनौव्वल के बाद नक्सली सुनीता को उसका पति सही-सलामत सौंपने के लिए राजी हो गए।

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हालांकि, नक्सलियों ने शर्त रखी कि अब संतोष पुलिस की नौकरी नहीं करेगा और गांव में खेती करेगा। सुनीता ने उसी वक्त नक्सलियों (Naxalites) की यह बात मान ली और अपने पति को नक्सलियों की गिरफ्त से छुड़ा कर वापस ले आई।

बताया जा रहा है कि सुनीता ने अपना बचपन नक्सल प्रभावित सुकमा जिले के जगरगुंडा इलाके में बिताया है। उसने खुद बताया कि उसे नक्सलियों (Naxalites) की आदतों के बारे में जानकारी है। जब उससे पूछा गया कि अपने पति को छुड़ाने के लिए इस तरह का साहस कैसे जुटा लिया तब उसने कहा कि एक महिला अपने पति को छुड़ाने के लिए कुछ भी कर सकती है।

इधर बस्तर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने बताया कि जब पुलिस को संतोष के अपहरण की जानकारी मिली तब पुलिस लगातार पता लगाने की कोशिश कर रही थी लेकिन उनकी सुरक्षा को देखते हुए अभियान शुरू नहीं किया गया था।

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