Chhattisgarh: साथियों की मौत को लेकर नक्सलियों ने किया बंद का आह्वान, पुलिस अलर्ट

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बस्तर (Bastar) में अपने साथियों की मौत को लेकर नक्सलियों (Naxalites) ने बंद का आह्वान किया है। गांवों में नक्सलियों (Naxals) ने बंद का आह्वान कर पर्चा फेंका है।

Naxalites

फाइल फोटो

नक्सलियों (Naxalites) ने महाराष्ट्र सीमा वाले रास्ते पर पर्चें फेंककर बंद का ऐलान किया है। इसमें नक्सलियों ने गढ़चिरौली में मारे गए साथियों की मौत का बदला लेने की बात कही है।

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बस्तर (Bastar) में अपने साथियों की मौत को लेकर नक्सलियों (Naxalites) ने बंद का आह्वान किया है। गांवों में नक्सलियों (Naxals) ने बंद का आह्वान कर पर्चा फेंका है। जिसमें नक्सलियों ने 5 और 7 जून को भारत बंद का आह्वान किया है। नक्सलियों के इस आह्वान को लेकर पुलिस भी अलर्ट (Police Alert) हो गई है।

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली बार्डर से सटे राजनांदगांव जिले के मोहला-मानपुर क्षेत्र के नक्सल प्रभावित थानों व कैंप के जवानों को खासतौर पर हाइअलर्ट कर दिया गया है। साथ ही नक्सल प्रभावित गांवों में सर्चिंग भी तेज कर दी गई है।

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नक्सल आपरेशन सेल एएसपी जेपी बढ़ई ने कहा कि जिले में नक्सल गतिविधियां सिमट गई है। फिर भी नक्सल बंद को लेकर जवानों को सर्चिंग अभियान तेज करने के निर्देश दिए हैं। जवानों को हाई अलर्ट भी किया गया है। ताकि नक्सलियों के किसी भी मंसूबे को फेल किया जा सकें।

नक्सलियों ने महाराष्ट्र सीमा वाले रास्ते पर पर्चें फेंककर बंद का ऐलान किया है। इसमें नक्सलियों (Naxalites) ने गढ़चिरौली में मारे गए साथियों की मौत का बदला लेने की बात भी कही है। इसको लेकर ही जिले के नक्सल प्रभावित मदनवाड़ा, कोहका, सीतागांव सहित अन्य क्षेत्रों में पुलिस ने सर्चिंग तेज कर दी है। एएसपी जेपी बढ़ई ने बताया कि गढ़चिरौली पुलिस की मदद लेकर भी सीमा क्षेत्रों में ज्वाइंट आपरेशन जारी है। लगातार सर्चिंग की जा रही है। पुलिस को जल्द ही बड़ी सफलता मिलेगी।

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बता दें कि मोहला-मानपुर इलाके में लंबे समय से नक्सलियों की चहलकदमी सामने नहीं आ रही है। बताया जा रहा है कि क्षेत्र में नक्सली अब नई योजना के तहत काम कर रहे हैं। जिसके तहत अब नक्सली टुकड़ों में बंटकर काम कर रहे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि जिले में नक्सलियों की गतिविधियां हैं, लेकिन नक्सली बड़ी संख्या में एक साथ जंगल में नहीं रूक रहे हैं। नक्सल प्रभावित गांवों में भी वर्दी छोड़कर सिविल में दो-चार की संख्या में नक्सली पहुंचते हैं। यही वजह है कि पुलिस ऐसे नक्सलियों को ट्रेस नहीं कर पा रही है।

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