नक्सलियों से हमदर्दी जताने वालों को बड़ी चोट, दंतेवाड़ा पुलिस की नई तरकीब

बस्तर पुलिस ने इन समस्याओं से निपटने का एक सही तरीका ढूंढ निकाला है। ऐसा तरीका जिससे नक्सलियों का अर्बन नेटवर्क और कथित समाजसेवी संस्थाओं की ये कोशिशें नाकाम हो जाएंगी।

Bastar Police

नक्सलियों की बनाई जा रही है लिस्ट।

नक्सलवाद देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती है। पिछले कुछ सालों में निश्चित रूप से नक्सली वारदातों में कमी आई है, नक्सलियों की गिरफ्तारी और उनके सरेंडर की घटनाओं में भी तेजी आई है, लेकिन अब भी नक्सल संगठन के अस्तित्व से इंकार नहीं किया जा सकता।

नक्सल संगठनों के लिए बड़े हिमायती साबित होते हैं कई तरह के समाजसेवी संगठन और नक्सलियों का अर्बन नेटवर्क (Urban Network)। जब भी सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में नक्सली मारे जाते हैं या फिर किसी नक्सली की गिरफ्तारी होती है, ये संगठन और उनका नेटवर्क एक्टिव हो जाता है। पुलिस और प्रशासन के खिलाफ आरोप लगाए जाते हैं। नक्सलियों के दबाव में ये संगठन पुलिस प्रशासन के खिलाफ फेक एनकाउंटर जैसे आरोप भी लगाते हैं।

ऐसे में, बस्तर पुलिस (Bastar Police) ने इन समस्याओं से निपटने का एक सही तरीका ढूंढ निकाला है। ऐसा तरीका जिससे नक्सलियों का अर्बन नेटवर्क और कथित समाजसेवी संस्थाओं की ये कोशिशें नाकाम हो जाएंगी। बस्तर पुलिस (Bastar Police) उन सभी नक्सलियों की सूची तैयार कर रहा है, जो नक्सल संगठनों से जुड़े हैं। ये सूची थानावार बनाई जा रही है, ताकि नक्सलियों की आसानी से शिनाख्त हो सके।

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इसकी शुरुआत दंतेवाड़ा से हो चुकी है। दंतेवाड़ा में नक्सल संगठनों से जुड़े हुए नक्सलियों की लिस्ट तैयार हो गई है। इस लिस्ट में कुल 526 नक्सलियों के नाम हैं। इनमें बड़े और इनामी नक्सलियों के साथ ही छोटे स्तर के नक्सली भी शामिल हैं। इस लिस्ट को सभी थानों और गांवों में चिपकाया जा रहा है।

इसके पीछे मकसद ये है कि अगर किसी को लगता है कि वो नक्सली संगठन से नहीं जुड़ा है और उसका नाम गलती से सूची में आ गया है, तो वो पुलिस प्रशासन से संपर्क करके आवेदन दे सकता है। पुलिस उसके आवेदन की जांच करेगी। ये पता लगाएगी कि सच में अमुक व्यक्ति नक्सली संगठन से नहीं जुड़ा है या वह किसी वारदात में शामिल नहीं रहा है। इसकी पुष्टि होने के बाद, उस व्यक्ति का नाम लिस्ट से हटा दिया जाएगा।

साथ ही, अगर किसी नक्सली का नाम इस सूची में है लेकिन उसने बहुत पहले ही संगठन का साथ छोड़ दिया था, तो वह भी आवेदन के जरिए लिस्ट से अपना नाम हटवा सकता है। इसके अलावा, अगर कोई नक्सली चाहता है कि वो सरेंडर कर दे तो उसका भी स्वागत किया जाएगा।

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दंतेवाड़ा के एसपी अभिषेक पल्लव ने सिर्फ सच को बताया कि लिस्ट में जिन लोगों का नाम है अगर वो सरेंडर करना चाहते हैं, तो ना सिर्फ उनका स्वागत किया जाएगा, बल्कि प्रशासन उनकी पूरी मदद भी करेगा। जिस भी व्यक्ति का नाम सूची में है वो बेझिझक पुलिस प्रशासन से संपर्क कर सकता है। अभिषेक पल्लव ने बताया कि इस सूची के बन जाने के बाद, पुलिस पर लगने वाले बेबुनियाद आरोपों में भी कमी आएगी।

यानी, नक्सलियों के हमदर्द डाल-डाल तो बस्तर पुलिस पात-पात। अब जाहिर है जो लोग इस लिस्ट से अपना नाम हटवाने के लिए सामने नहीं आएंगे, उन्हें नक्सली ही माना जाएगा। और अगर उनके खिलाफ पुलिस कोई कार्रवाई करती है, तो उनके हमदर्द बेबुनियाद आरोप नहीं लगा पाएंगे।

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