इस हाईवे पर 22 साल से है नक्सलियों का कब्जा, अब CRPF ने आजाद कराने की है ठानी

एक ऐसी सड़क जो अभी भी नक्सलियों के कब्जे में है। हमारे बहादुर जवान दिन-रात इस सड़क को नक्सलियों (Naxals) के कब्जे से मुक्त कराने में जुटे हुए हैं।

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एक ऐसी सड़क जो अभी भी नक्सलियों के कब्जे में है। हमारे बहादुर जवान दिन-रात इस सड़क को नक्सलियों (Naxals) के कब्जे से मुक्त कराने में जुटे हुए हैं।

एक ऐसी सड़क जो अभी भी नक्सलियों के कब्जे में है। हमारे बहादुर जवान दिन-रात इस सड़क को नक्सलियों (Naxals) के कब्जे से मुक्त कराने में जुटे हुए हैं। 22 साल से हमारे जवान जिस कोशिश में जुटे हैं उसका क्या अंजाम हुआ है? आज हम अपनी इस रिपोर्ट में आपको बताएंगे। हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ के बारसूर-पल्ली स्टेट हाईवे की। यह हाईवे दंतेवाड़ा, नारायणपुर, कोंडागांव, बस्तर और बीजापुर की सीमा से लगती है और राज्य के कई जिलों को आपस में जोड़ती है।

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22 साल से नक्सलियों के कब्जे में रहे हाईवे को अब CRPF ने आजाद कराने की ठानी है। (फाइल फोटो)

जाहिर है यह हाईवे आम जनता के लिए काफी उपयोगी साबित होने वाला है लेकिन 2 दशक से ज्यादा वक्त से नक्सलियों (Naxals) ने इस हाईवे पर कब्जा कर रखा है। सुरक्षा बलों के लिए परेशानी यह है कि नक्सली अक्सर यहां घातक हथियारों जैसे एके 47, एसएलआर, इन्सास राइफल और एक्स 95 के अलावा आईईडी (IED) ब्लास्ट का इस्तेमाल करते रहते हैं ताकि वो सुरक्षा बलों को यहां तक ना पहुंचने दें।

हाल ही में यहां से 35 से ज्यादा आईईडी बरामद की गई हैं। इनमें सिलेंडर बम और प्रेशर कुकर बम शामिल है। कुछ दिनों पहले नक्सलियों ने यहां गश्त कर रही रोड ओपनिंग पार्टी पर घात लगाकर हमला कर दिया था। पहले आईईडी (IED) ब्लास्ट किया गया और उसके बाद फायरिंग शुरू कर दी। इसमें छत्तीसगढ़ आर्म्स फोर्स के दो जवान शहीद हुए और सीआरपीएफ (CRPF) का एक एएसआई घायल हो गया था।

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यही वो इलाका है, जहां पर नक्सली समूह अपनी बैठकें करते रहे हैं। इसी मार्ग के जरिए वे हितावाड़ा, वाया तोड़मा होते हुए बाकेली और उसके बाद कचनार तक जाते हैं। यही वो मार्ग है जो नक्सलियों (Naxals) को बोदली, पुसपाल मालेवाही, पिच्चिकोडेर, अमलीडीह और भटपाल व एरपुंड तक पहुंचाता है। साफ है कि इस हाईवे को नक्सलियों ने अपना अड्डा बना रखा है और उनके कब्जे से इसे आजाद कराना इतना आसान नहीं।

तमाम दुश्वारियों के बावजूद सुरक्षा बल के जवानों ने अब जिद ठान ली है कि वो इस हाईवे से नक्सलियों (Naxals) को खदेड़ कर ही दम लेंगे। सीआरपीएफ की 195वीं वाहिनी के जांबाजों ने इसका बीड़ा उठाया है। घोर नक्सल प्रभावित इस इलाके में सुरक्षा बल कई सालों से नक्सलियों से खुलेआम लोहा लेते आ रहे हैं। जिसका परिणाम यह हुआ है कि सीआरपीएफ (CRPF) ने पुसपाल के आसपास अपनी मजबूत पकड़ बना ली है। इसके अलावा दूसरे कई जगहों पर भी इस बल ने अपनी पहुंच बनाई है।

सुरक्षा बलों ने यहां नक्सल नाशक ऑपरेशन को तेज कर दिया है और यह तय कर लिया है कि साल 2021 तक वो इस हाईवे को आम जनता को सौंप देंगे। यानी अगले साल तक सुरक्षा बल हाईवे के आसपास से नक्सलियों (Naxals) का सफाया कर देंगे और यहां लाल आतंक नहीं बल्कि निर्माण कार्य होगा ताकि विकास का पहिया यहां तेजी से दौड़ सके।

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