बिहार: एसपी पर हमला करने वाले दो नक्सली धराए, लंबे समय से पुलिस को दे रहे थे चकमा

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सुरक्षाबलों ने बिहर के सासाराम से दो नक्सलियों को गिरफ्तार किया है।

बिहार के सासाराम से एक पुलिस अफसर पर हमला करने वाले दो हार्डकोर नक्सलियों को सुरक्षाबलों ने गिरफ्तार किया है। एक नक्सली जिले के चुटिया थाना क्षेत्र के कातूडाण जंगल से तथा दूसरा नक्सली लहबरमाइ मंदिर के पास से गिरफ्तार किया गया। इन दोनों गिरफ्तार नक्सलियों के नाम बालेश्वर ठाकुर और रंजीत राम हैं। दोनों को सीआरपीएफ और चुटिया पुलिस ने 19 सितंबर की देर शाम गिरफ्तार किया। दोनों गिरफ्तार नक्सली चुटिया के ही रहने वाले हैं। दोनों नक्सलियों ने साल 2011 में चुटिया थाना के अमहुआ के पास तत्कालीन एसपी मनु महाराज पर हमला किया था।

इसके अलावा ये दोनों परछा मिडिल स्कूल को बारूदी विस्फोट में उड़ाने के भी आरोपी हैं। आठ सालों से ये दोनों नक्सली पुलिस को चकमा दे रहे थे। जानकारी के मुताबिक, अभियान एसपी दुर्गेश कुमार को दोनों नक्सलियों के क्षेत्र में आने की सूचना मिली थी। एसपी के निर्देश पर सीआरपीएफ के असीस्टेंट कमांडेंट सुभाष चंद्र झा और चुटिया के प्रभारी थानाध्यक्ष मुकेश कुमार ने छापेमारी की। जिसके बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। इससे पहले, राज्य के अधौरा पुलिस ने एक नक्सली एरिया कमांडर और उसके एक सहयोगी नक्सली को गिरफ्तार किया है। ये दोनों नक्सल संगठन के विस्तार के लिए काम कर रहे थे।

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एरिया कमांडर को उसके साथी के साथ बिहार की कैमूर पुलिस ने गिफ्तार किया। दोनों नक्‍सलियों को उत्तरप्रदेश के सोनभद्र से सटे गढ़वा के जंगल से पकड़ा गया। यह स्थान सोनभद्र जिले की सीमा से महज 20 किलाोमीटर की दूरी पर है। पकड़े गए नक्सली एरिया कमांडर भरत खरवार उर्फ राजा जी और जयनाथ यादव हैं। इन दोनों हार्डकोर नक्‍सलियों ने साल 2001 में अधौरा थाना क्षेत्र के मूसहरवा बाबा के जंगल के रास्ते में आईईडी बिस्फोट कर पुलिस पार्टी पर हमला किया था। इन्होंने ब्लास्ट करने के बाद पुलिस की 13 राइफल और 300 कारतूस लूट लिए थे। इस घटना में एक हवलदार सहित दो सिपाहियों की मौत हो गई थी।

इस घटना में लूटी गयी राइफल में से एक थ्री नाट थ्री के साथ 2002 में भरत खरवार एरिया कमांडर को भवनाथपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था। लेकिन जमानत पर रिहा होने के बाद भी भरत खरवार नक्सल गतिविधियों में शामिल रहा। सोनभद्र, चंदौली और बिहार में नक्सली संगठन को दोबारा खड़ा करने के लिए अपने पुराने साथियों से सम्पर्क साधने में लगा था। इसकी खुफिया सूचना कैमूर पुलिस को हुई। जिसके बाद पुलिस ने एक टीम गठित कर सर्च अभियान चलाया था, जिसमें ये दोनों पकड़ा गए।

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