बिहार: रोहतास में दो नक्सली चढ़े पुलिस के हत्थे, 8 साल से पुलिस को दे रहे थे चकमा

2011 में मध्य विद्यालय परछा के भवन को बारूदी सुरंग से विस्फोट कर उड़ाने, अमहुआ में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ समेत अन्य नक्सली वारदातों में इन नक्सलियों का हाथ रहा है। पुलिस को इनकी तलाश पिछले आठ सालों से थी।

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बिहार के रोहतास जिले के यदुनाथपुर थाना क्षेत्र के अलग-अलग जगहों से सुरक्षाबलों ने दो नक्सलियों को गिरफ्तार कर लिया।

बिहार के रोहतास जिले के यदुनाथपुर थाना क्षेत्र के अलग-अलग जगहों से सुरक्षाबलों ने दो नक्सलियों को गिरफ्तार कर लिया। जिले के नवाडीह और मटियाव गांव से 5 सितंबर की सुबह 8 सालों से फरार चल रहे दो नक्सलियों को छापेमारी कर गिरफ्तार किया गया। 2011 में मध्य विद्यालय परछा के भवन को बारूदी सुरंग से विस्फोट कर उड़ाने, अमहुआ में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ समेत अन्य नक्सली वारदातों में इन नक्सलियों का हाथ रहा है। पुलिस को इनकी तलाश पिछले आठ सालों से थी। सीआरपीएफ की 47वीं कमान के सहायक समादेष्टा सुभाष झा के नेतृत्व में सीआरपीएफ और जिला पुलिस बल के जवानों ने संयुक्त अभियान में यह सफलता हासिल की।

जानकारी के मुताबिक, पुलिस को मटियांव के रहने वाले नक्सली तालकेश्वर सिंह और नवाडीह के उमाशंकर राम को उनके गांव आने की सूचना मिली थी। जिसके बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए इन दोनों के घर पर छापेमारी कर पुलिस ने इन्हें धर दबोचा। पुलिस के मुताबिक, नक्सली वारदात के बाद पिछले आठ सालों से ये फरार चल रहे थे। साल 2010 के विधान सभा चुनाव के दौरान परछा मध्य विद्यालय में चुनाव कार्य के लिए अ‌र्द्धसैनिक बलों का कैंप लगाया गया था। नक्सलियों ने 31 दिसंबर, 2011 को उस विद्यालय भवन को विस्फोट कर उड़ा दिया था। जिसे मामले में चुटिया थाना में एक दर्जन नामजद व 150 अज्ञात नक्सलियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

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इस मामले में पकड़े गए दोनों नक्सली नामजद किए गए थे। वहीं, 2011 में ही तत्कालीन एसपी मनु महाराज के नेतृत्व में अमहुआ के पास जंगल में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ में भी ये नक्सली शामिल रहे हैं। हालांकि, अमहुआ मुठभेड़ मामले में उमाशंकर राम फिलवक्त जमानत पर था, परंतु परछा मामले में इसकी तलाश की जा रही थी। जिले में नक्सल उन्मूलन के बाद से दोनों रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में जाकर रह रहे थे। सीआरपीएफ लंबे समय से इनकी गिरफ्तारी की फिराक में थी। इसी बीच उनके गांव आने की सूचना सीआरपीएफ को मिली। इस खुफिया सूचना के आधार पर इनकी गिरफ्तारी हुई।

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