
सांकेतिक तस्वीर।
वीरेंद्र खुलकर नक्सलियों (Naxals) का विरोध करता था। वह नक्सलियों की गतिविधियों की जानकारी पुलिस को देकर उनके मंसूबे पर पानी फेर रहा था। इसी वजह से वह नक्सली संगठन की आंखों में चुभ रहा था।
बिहार (Bihar) के नक्सल प्रभावित (Naxal Area) गया जिले में नक्सली (Naxals) एक बार फिर से सिर उठाने लगे हैं। इस बार नक्सली बदला लेने की फिराक में हैं। जिले के बाराचट्टी थाना क्षेत्र के महुअरी गांव में बीते दिनों प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के शीर्ष नेता कौलेश्वरी सब जोनल कमांडर आलोक यादव को कोबरा जवानों ने मुठभेड़ में मार गिराया था।
अब अपने साथी कमांडर की मौत का बदला लेने के लिए नक्सली किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में हैं। उधर, क्षेत्र में नक्सलियों (Naxalites) के खिलाफ पुलिस (Police) का सहयोग करने वाले मुखबिर की हत्या के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है।
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दरअसल, प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के कौलेश्वरी सब जोनल कमांडर आलोक यादव ने महुआरी गांव में एक प्रोग्राम के दौरान नजरपुर पंचायत के मुखिया के देवर वीरेंद्र यादव की गोली मारकर हत्या कर दी थी। बताया जाता है कि वीरेंद्र खुलकर नक्सलियों (Naxals) का विरोध करता था।
संगठन की हर एक गतिविधि की जानकारी वीरेंद्र को होती थी। वीरेंद्र उनकी गतिविधियों की जानकारी पुलिस को देकर उनके मंसूबे पर पानी फेर रहा था। इसी वजह से वह नक्सली संगठन की आंखों में चुभ रहा था।
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काफी दिनों से वीरेंद्र नक्सलियों (Naxals) के निशाने पर था। उसकी हत्या का जिम्मा नक्सली आलोक ने लिया था। वीरेंद्र की हत्या के बाद बाराचट्टी थाना क्षेत्र के दक्षिणी एवं धनगांई थाना क्षेत्र के इलाके में नक्सलियों का दहशत है। हालांकि, पुलिस पूरी तरह मुस्तैद है। नक्सलियों की हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
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