आतंकनाशक साबित होगा UAPA बिल, संगठनों के साथ-साथ व्यक्तियों को भी आतंकी घोषित करने का रास्ता साफ

आतंक विरोधी कानून में अब तक सिर्फ यह प्रावधान था कि वह किसी समूह को प्रतिबंधित कर सकता था, लेकिन किसी को व्यक्तिगत तौर पर नहीं। इस संशोधन के बाद अब किसी को व्यक्तिगत तौर पर आतंकी घोषित किया जा सकता है।

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संगठनों के साथ-साथ व्यक्तियों को भी आतंकी घोषित करने का रास्ता साफ। सांकेतिक तस्वीर।

केंद्र सरकार ने आतंकनाशक बिल राज्यसभा से पास कराकर अपना इरादा जता दिया है। आतंकवाद एक ऐसा मुद्दा रहा है जिस पर केंद्र की मौजूदा सरकार हमेशा सेना के साथ खड़ी रही है। अब Unlawful Activities (Prevention) Amendment Bill यानी UAPA बिल के देश में आ जाने से ना सिर्फ आतंकी संगठनों पर शिकंजा कस सकेगा बल्कि इन संगठन के लिए काम करने वाले लोगों को सीधे तौर पर आतंकी घोषित किया जा सकेगा। राज्यसभा में संख्या बल कम होते हुए भी केंद्र सरकार ने इस बिल को कैसे पास कराया। इस पर हम बाद में चर्चा करेंगे लेकिन सबसे पहले आपको बताते हैं कि यह बिल देश के लिए कितना अहम है?

– आतंक विरोधी कानून में अब तक सिर्फ यह प्रावधान था कि वह किसी समूह को प्रतिबंधित कर सकता था, लेकिन किसी को व्यक्तिगत तौर पर नहीं। इस संशोधन के बाद अब किसी को व्यक्तिगत तौर पर आतंकी घोषित किया जा सकता है।
– अब इस संशोधित कानून के तहत संगठनों के साथ-साथ व्यक्तियों को भी आतंकी घोषित किया जा सकेगा।
– आतंक की गतिविधियों में संलिप्त होने की आशंका के आधार पर किसी अकेले व्यक्ति को आतंकी घोषित किया जा सकता है।
– इस बिल की मदद से आतंकियों की आर्थिक और वैचारिक मदद करने वालों और आतंकवाद के सिद्धांत का प्रचार करने वालों को आतंकवादी घोषित किया जा सकेगा।
-आतंकवादी गतिविधि पर संपत्ति जब्त करने से पहले एनआईए को अपने महानिदेशक से मंजूरी लेनी होगी।
-इस बिल की मदद से आतंकवाद के मामले में एनआईए का इंस्पेक्टर स्तर का अधिकारी भी जांच कर सकेगा।

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जाहिर है आतंकवाद के खिलाफ कोई भी कदम उठाते वक्त सरकार यह मान कर चलती है कि देश की जनता उसके साथ है। अब हम आपको बताते हैं कि लोकसभा से पहले ही पास हो चुके इस बिल पर शुक्रवार को राज्यसभा में क्या हुआ।

राज्यसभा में UAPA संशोधन बिल को सेलेक्ट कमेटी में भेजने के संशोधन प्रस्ताव पर सदन में वोटिंग कराई गई। विभिन्न दलों के सांसदों ने इसे सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने का प्रस्ताव दिया था। सदन में पर्चियों के जरिए वोटिंग हुई और सदस्यों ने हां या न की पर्ची से प्रस्ताव पर अपने मत जाहिर किये। इसके बाद राज्यसभा में विपक्षी दलों की ओर से UAPA बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने का प्रस्ताव गिर गया। प्रस्ताव के पक्ष में 85 और विपक्ष में 104 वोट पड़े। राज्यसभा से UAPA बिल पर अब अंतिम वोटिंग हुई। यह वोटिंग प्रक्रिया भी पर्चियों के जरिए हुई क्योंकि सदस्यों को भी सीट संख्या नहीं दी गई थी। राज्यसभा से UAPA बिल वोटिंग के बाद पास हो गया। बिल के पक्ष में 147 और विपक्ष में 42 वोट पड़े।

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इससे पहले राज्यसभा में यूएपीए संशोधन विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस नेता एवं पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा, ‘हम इस संशोधन विधेयक का नहीं बल्कि सरकार की नीयत का विरोध कर रहे हैं। हाफिज सईद की तुलना गौतम नवलखा से न करें। आप किसे आतंकवादी घोषित करने जा रहे हैं हाफिज सईद अथवा गौतम नवलखा को।’ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा, ‘हमें भाजपा की नीयत पर संदेह है। कांग्रेस ने कभी आतंकवाद से समझौता नहीं किया और इसलिए हमने यह कानून बनाया। यह आप हैं जिन्होंने आतंकवाद से समझौता किया। पहले आपने रूबिया सईद और बाद में मसूद अजहर को छोड़ा।’

भाजपा की तरफ से सदन में मोर्चा संभाला गृहमंत्री अमित शाह ने। अमित शाह ने कांग्रेस नेताओं के सभी सवालों का करारा जवाब दिया। गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के सवालों को जवाब देते हुए कहा कि आतंकवादी घटनाओं में शामिल संस्थाओं पर प्रतिबंध लगने के बाद उसे संचालित करने वाला व्यक्ति दूसरे नाम से अपनी संस्था चलाने लगता है। उन्होंने कहा, ‘संस्था व्यक्ति से बनती है। घटना संस्था नहीं बल्कि व्यक्ति करता है। व्यक्ति के इरादे पर रोक लगाए बगैर उसकी गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई जा सकती है। हम एक संस्था पर प्रतिबंध लगाते हैं और थोड़े दिन बाद वही व्यक्ति दूसरी संस्था बना लेता है इसलिए व्यक्ति पर प्रतिबंध लगाना जरूरी है।’

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