भारत के खिलाफ एक और नापाक हरकत, गिलगित-बाल्टिस्तान में 18 अगस्त को चुनाव करा रहा पाकिस्तान

भारत सरकार ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि गिलगित-बाल्टिस्तान पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा है और उसे जल्द से जल्द इसे खाली कर देना चाहिए। बता दें कि राष्ट्रपति अल्वी ने पिछले महीने एक कार्यवाहक सरकार बनाने और पाकिस्तान के चुनाव अधिनियम 2017 के गिलगित-बाल्टिस्तान में विस्तार के लिए एक आदेश जारी किया था।

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (फाइल फोटो)

पाकिस्तान भारत के खिलाफ हमेशा की तरह एक और षड्यंत्र रच रहा है। अपना नापाक हरकतों से बाज न आने वाला पाकिस्तान अब गिलगित-बाल्टिस्तान को लेकर लगातार अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। पाकिस्तान ने इन जगहों पर 18 अगस्त को चुनाव कराने की घोषणा कर दी है। भारत की तरफ से कई मौकों पर का जा चुका है कि गिलगित-बाल्टिस्तान केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का ही अभिन्न अंग है।

बावजूद इसके पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। दरअसल पाकिस्तान की शीर्ष अदालत ने इन विवादित क्षेत्रों में मतदान की अनुमति दी है। सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद पाकिस्तान यहां पर चुनाव कराने की तैयारी में जुट गया है। गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा के लिए आम चुनाव 18 अगस्त को कराए जाने की तैयारी है। कुल 24 विधानसभा सीटों के लिए यह चुनाव आयोजित किए जाएंगे।

वहीं भारत की तरफ से कहा जा चुका है कि पाकिस्तान इस तरह से जबरन भारत के क्षेत्रों में चुनाव नहीं करा सकता। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पाकिस्तान की शीर्ष अदालत या सरकार के पास ऐसा कोई अधिकारी नहीं कि वो भारत के हिस्से वाले एरिया में चुनाव कर सके।

भारत सरकार ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि गिलगित-बाल्टिस्तान पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा है और उसे जल्द से जल्द इसे खाली कर देना चाहिए। बता दें कि राष्ट्रपति अल्वी ने पिछले महीने एक कार्यवाहक सरकार बनाने और पाकिस्तान के चुनाव अधिनियम 2017 के गिलगित-बाल्टिस्तान में विस्तार के लिए एक आदेश जारी किया था।

गिलगित-बाल्टिस्तान विवाद: गिलगित-बाल्टिस्तान जम्मू कश्मीर के ऊपर स्थित है। पीओके के पश्चिमी सिरे पर गिलगित और इसके दक्षिण में बाल्टिस्तान स्थित है। ये इलाका 1947 के बाद से ही पाकिस्तान प्रशासन के हाथ में है। दरअसल इन इलाकों को अंग्रेजों ने वहां के महाराजा से 1846 से लीज पर लिया था। लेकिन आजादी से पहले इन इलाकों में राजा हरि सिंह ने अपना गवर्नर तैनात कर दिया था। राजा हरि सिंह ने भारत के साथ विलय के लिए हामी भरी तो यहां प्रशासन में मौजूद अंग्रेज अधिकारियों ने विश्वासघात किया और पाकिस्तान के साथ जा मिला। इसके बाद से यहां पर पाकिस्तान प्रशासन काम कर रहा है।

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