डोनाल्ड ट्रंप का नया फंडा, ऐसे सुलझाना चाहते हैं इजराइल-फिलिस्तीन विवाद, नया विवाद शुरू

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने एक ऐतिहासिक विवाद (Israel Palestine Conflict) को खत्म करने का प्रस्ताव पेश कर एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। ट्रंप (Donald Trump) ने मंगलवार को कहा कि यरुशलम का बंटवारा नहीं होने जा रहा है।

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यरुशलम विवाद के समाधान के लिए ट्रंप का नया फॉर्मूला।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने एक ऐतिहासिक विवाद (Israel Palestine Conflict) को खत्म करने का प्रस्ताव पेश कर एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। ट्रंप (Donald Trump) ने मंगलवार को कहा कि यरुशलम का बंटवारा नहीं होने जा रहा है। वह इजरायल की अविभाजित राजधानी बनी रहेगी। ट्रंप (Donald Trump) के इस दो-राष्ट्र फॉर्मूले को फिलिस्तीन ने सिरे से खारिज कर दिया।

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यरुशलम विवाद के समाधान के लिए ट्रंप का नया फॉर्मूला।

ट्रंप (Donald Trump) ने फिलिस्तीनी राज्य के निर्माण के लिए पूर्वी यरुशलम को राजधानी के रूप का प्रस्ताव रखा है। ट्रंप (Donald Trump) ने इस प्लान को ऐतिहासिक बताया और साथ ही संकेत दिए कि यह इस विवाद का ‘आखिरी समाधान’ है। उन्होंने कहा कि यह फिलिस्तीनियों पर निर्भर है कि वे इजराइल के साथ दशकों के संघर्ष के बाद शांति स्‍थापित करने के प्रयास में स्वशासन बनाने के लिए कदम उठाते हैं या नहीं। ट्रंप (Donald Trump) ने पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के लिए अपनी योजना पेश करते हुए यह बात कही।

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू के साथ वाइट हाउस में ट्रंप ने दुनिया में सबसे लंबे समय से चले आ रहे विवादों में से एक के लिए दो-राष्ट्र का समाधान दिया। उन्होंने कहा कि इससे शांति आएगी और किसी इजराइली या फिलिस्तीनी को उनका घर नहीं छोड़ना होगा। ट्रंप न कहा कि यरूशलम इजराइल की अविभाजित राजधानी रहेगी जो बहुत अहम होगी। ट्रंप ने प्रस्ताव रखा है कि चार साल तक क्षेत्र में इजराइल सेटलमेंट रोक दिया जाएगा और फिलिस्तीन के क्षेत्र को दोगुना किया जाएगा।

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फिलिस्तीन के लिए ट्रंप ने पूर्वी यरूशलम को राजधानी बनाने का प्रस्ताव रखा और वहां अमेरिकी दूतावास स्थापित करने की पेशकश की। उन्होंने फिलिस्तीन से इस समझौते को स्वीकार कर क्षेत्र में शांति स्थापित करने की अपील की। उन्होंने इस प्लान को ऐतिहासिक और सदी का सबसे बड़ा समझौता बताते हुए दावा किया कि उनके इस प्रस्ताव को दुनिया के नेताओं का समर्थन है। ट्रंप ने कहा कि यह फिलिस्तीन के लिए स्वतंत्र राज्य बनने का ऐतिहासिक मौका है और इसके लिए वह राष्ट्रपति महमूद अब्बास को खत लिख चुके हैं।

वहीं, नेतन्याहू ने ट्रंप के प्लान को इजराइल के लिए ऐतिसाहिक बताया और उसकी तुलना 14 मई, 1948 में तत्कालीन राष्ट्रपति हैरी ट्रूमन से की जब वह इजराइल को पहचान देने वाले पहले नेता बने थे। उन्होंने कहा कि दूसरे सभी प्लान जहां फेल हो चुके हैं, यह प्लान एकदम संतुलित है। उन्होंने कहा कि अब इस आधार पर वह फिलिस्तीन के साथ शांति समझौता करने के लिए तैयार हैं।

उधर, फिलिस्तीन के राष्ट्रपति अब्बास ने कहा है कि ट्रंप का प्रस्ताव पास नहीं होगा। फलस्तीन में मंगलवार सुबह इसको लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुआ। वहीं, फिलिस्तीनी इस्लामी चरमपंथी संगठन हमास ने भी अमेरिका के इस प्रस्ताव को खारिज कर दियता है। हमास का कहना है कि फिलिस्तीन की राजधानी के तौर पर उसे यरुशलम के अलावा कोई दूसरा विकल्प स्वीकार नहीं होगा। यानी, मामला फिलहाल सुलझता दिख नहीं रहा है।

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