अलगाववादी नेताओं पर सरकार ने कसा शिकंजा, संपत्ति होगी जब्त

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लश्कर चीफ हाफिज सईद के पैसों से बनी हुई हुर्रियत नेताओं की प्रॉपर्टी पर भारत सरकार (Indian Government) शिकंजा कसने जा रही है। टेरर फंडिंग पर रोक लगाने के लिए मामले बड़ी कार्रवाई करते हुए भारत सरकार (Indian Government) ने हुर्रियत नेताओं की संपत्ति जब्त करने का फैसला किया है। भारत सरकार (Indian Government) के आदेश से 11 अलगाववादी नेताओं की संपत्ति जब्त होगी।

अलगाववादी नेताओं पर आरोप है कि इन्हें कश्मीर में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, स्कूलों और अन्य सरकारी संस्थानों को जलाने जैसी विध्वंसक गतिविधियों के लिए लश्कर से पैसा मिलता है। घाटी में सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी के लिए हुर्रियत नेताओं को पाकिस्तान के आतंकी संगठनों और पाक खुफिया एजेंसी ISI दोनों से फंडिंग की जाती है।

नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने इस मामले में फिलहाल 13 लोगों के खिलाफ सबूत जुटाए हैं। संपत्ति जब्त होने वालों की सूची में सैयद अली शाह गिलानी का दामाद अल्ताफ अहमद शाह भी शामिल है। इसके अलावा नईम अहमद खान, फ़ारुख अहमद डार उर्फ बिट्टा कराटे, शहीदुल इस्लाम, पाकिस्तान में मौजूद हिज्बुल के चीफ सैय्यद सलाउद्दीन समेत 11 अलगाववादियों की संपत्ति  भी जब्त की जाएगी।

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NIA ने दावा किया है कि आरोपी देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की तैयारी में थे और कई तरह की गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल थे। NIA ने इन पर सुरक्षाबलों के खिलाफ पत्थरबाजी, स्कूलों में आगजनी, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने जैसे संगीन आरोप भी लगाए हैं।

गौरतलब है कि एनआईए टेरर फंडिंग के मामले में जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के बेटे नसीम गिलानी और मीरवाइज उमर फारुक से पहले ही पूछताछ कर चुकी है। एनआईए ने आतंकी फंडिंग से जुड़े तार खंगालने के लिए हरियाणा और दिल्ली समेत कई ठिकानों पर छापेमारी की थी।

छापेमारी में इलेक्ट्रॉनिक सामान और करोड़ों रुपये की संपत्ति जब्त की गई है। घाटी में आतंकियों के सिर उठाने के बाद यह पहला मौका है, जब केंद्रीय जांच एजेंसी ने अलगाववादी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करते हुए छापे मारे हैं। इस मामले में शब्बीर शाह और गिलानी के दामाद अल्ताफ अहमद शाह को गिरफ्तार किया जा चुका है।

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