नक्सलवाद का सच

नए मुखिया के कमान संभालने के बाद नक्सली संगठन में सीनियर नक्सलियों का कद घटता जा रहा है। यही फूट की वजह बन रहा है।

सालों तक खून-खराबा किया। कई बड़ी वारदातों में शामिल रहा। एक तरफ, जहां हर वारदात के साथ नक्सल संगठन में उसका कद बढ़ता जा रहा था, वहीं दूसरी तरफ उसके दिल में वापसी की इच्छा भी हिलोरें ले रही थी।

His life story follows the script of a Bollywood blockbuster; all necessary ingredients –violence, revenge, pathos, tragedy and finally a happy ending –are all there. So is drama, action and romance!

कुछ दशक पहले जो एक नक्सलवादी था आज वह रिवर-वॉरियर है। इस नदी को बचाने की खातिर इन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी लगा दी।

बंदूक और आतंक के सहारे सत्ता परिवर्तन का ख़्वाब देखने वाले नक्सली भी देर-सबेर प्यार में पड़ ही जाते हैं। कुछ का प्रेम परवान चढ़ता है, कुछ पुलिस की गिरफ्त में जा फसंते हैं या गोलियों का शिकार हो जाते हैं तो कुछ लोग संगठन को ही हमेशा के लिए अलविदा कह देते हैं।

मुंबई में वेटर की नौकरी के दौरान शोषण से तंग आकर नक्सली बना। एक महिला नक्सली से प्रेम विवाह किया। हिंसा से इतनी मोहब्बत हो गई कि उसके लिए अपनी पत्नी को तलाक दे दिया। फिर खुद नक्सलियों के शोषण से आजिज आकर 25 लाख रुपए के इस वांटेड नक्सली ने सरेंडर कर दिया।

Mumbai Marathon: 20 जनवरी को मुंबई में मैराथन दौड़ का आयोजन किया गया। वैसे तो 2004 से हर साल जनवरी...

30 पूर्व नक्सलियों ने क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के साथ स्टेडियम में देखा मैच। इनको देख कर कोई कह सकता है कि इन हाथों में पहले हथियार हुआ करते थे?

"नक्सली संगठन में हमें इंसानों को निशाना बनाने के लिए सिखाया गया था। पर यहां सब-कुछ बहुत अलग है। यहां किसी भी निर्दोष को निशाना नहीं बनाया जाता। यहां बच निकलने या भागने के लिए नहीं सिखाया जाता, बल्कि सामना करने के लिए सिखाया जाता है।"

साथी कमांडर्स ने सात साल तक मेरे साथ रेप किया। यह तब हुआ जब मैं 25-30 सशस्त्र नक्सलियों की कमांडर थी। नक्सलियों के बीच पत्नियों की अदला-बदली, साथी महिला नक्सलियों को मारना-पीटना और रेप करना बेहद आम है। 

रायपुर (छत्तीसगढ़) के मनीष दूबे सेना में जाना चाहते थे। वह सेना में तो नहीं जा सके पर सैनिकों और सेना के प्रति प्रेम और सम्मान प्रदर्शित करने के लिए उन्होंने एक अनोखा रास्ता खोज निकाला। उन्होंने रायपुर में एक रेस्टोरेंट खोला, जिसमें जवानों और उनके परिवार के सदस्यों को किफायती दर पर भोजन मिलता है।

करीब 71 साल के कुंडू इस बात में विश्वास रखते हैं कि विज्ञान की शिक्षा ही वह रास्ता है, जो इन गरीब बच्चों के लिए सुनहरे भविष्य के रास्ते खोल सकती है।

दो साल पहले तक वह एक खूंखार नक्सली था, जिसके सिर पर 25 लाख रुपये का इनाम था। माओवादियों के दल में ऊंची रैंक पर था और उनकी विशेष-समिति का सदस्य भी था। पर अब अपनी गलतियों का प्रायश्चित करने के लिए सिलता है पुलिस की वर्दी।

एक तो हमारे समाज में शिक्षकों का दर्जा ऐसे ही भगवान से भी ऊंचा माना जाता है। इनका कर्म और धर्म ही है अज्ञान के अंधेरे को ज्ञान के आलोक से प्रकाशित करना। पर, मुश्किल हालात में, जान हथेली पर लेकर अपने छात्रों को शिक्षा और सुरक्षा दोनों मुहैया कराने वाले शिक्षक विरले ही मिलते हैं।

जंगल की ज़िंदगी हमेशा कठिन होती है। अंधेरे में खोई वीरानी ज़िंदगी। जंगल में रहते वक्त इस बात का एहसास...

यह भी पढ़ें