नक्सलवाद का सच

साथी कमांडर्स ने सात साल तक मेरे साथ रेप किया। यह तब हुआ जब मैं 25-30 सशस्त्र नक्सलियों की कमांडर थी। नक्सलियों के बीच पत्नियों की अदला-बदली, साथी महिला नक्सलियों को मारना-पीटना और रेप करना बेहद आम है। 

रायपुर (छत्तीसगढ़) के मनीष दूबे सेना में जाना चाहते थे। वह सेना में तो नहीं जा सके पर सैनिकों और सेना के प्रति प्रेम और सम्मान प्रदर्शित करने के लिए उन्होंने एक अनोखा रास्ता खोज निकाला। उन्होंने रायपुर में एक रेस्टोरेंट खोला, जिसमें जवानों और उनके परिवार के सदस्यों को किफायती दर पर भोजन मिलता है।

करीब 71 साल के कुंडू इस बात में विश्वास रखते हैं कि विज्ञान की शिक्षा ही वह रास्ता है, जो इन गरीब बच्चों के लिए सुनहरे भविष्य के रास्ते खोल सकती है।

दो साल पहले तक वह एक खूंखार नक्सली था, जिसके सिर पर 25 लाख रुपये का इनाम था। माओवादियों के दल में ऊंची रैंक पर था और उनकी विशेष-समिति का सदस्य भी था। पर अब अपनी गलतियों का प्रायश्चित करने के लिए सिलता है पुलिस की वर्दी।

एक तो हमारे समाज में शिक्षकों का दर्जा ऐसे ही भगवान से भी ऊंचा माना जाता है। इनका कर्म और धर्म ही है अज्ञान के अंधेरे को ज्ञान के आलोक से प्रकाशित करना। पर, मुश्किल हालात में, जान हथेली पर लेकर अपने छात्रों को शिक्षा और सुरक्षा दोनों मुहैया कराने वाले शिक्षक विरले ही मिलते हैं।

जंगल की ज़िंदगी हमेशा कठिन होती है। अंधेरे में खोई वीरानी ज़िंदगी। जंगल में रहते वक्त इस बात का एहसास...

यह भी पढ़ें