नक्सलवाद का सच

एक पुलिस वाले की जिंदगी से प्रेरणा पाकर दो नक्सलियों ने हथियार डाल दिए। खास बात यह है कि यह पुलिस वाला भी पहले नक्सली ही था और जिन नक्सलियों ने जिंदगी की बदलती सूरत को देख कर सरेंडर किया है वो उनके भाई-भाभी थे।

छत्तीसगढ़ में बस्तर क्षेत्र के तीन जिलों में तीन इनामी नक्सलियों समेत पांच नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है।

यहां नक्सली किस कदर बेलगाम थे इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि यहां कभी नक्सली हथियारों की मंडी सजाते थे। बीच सड़क पर चादर या कोई अन्य सामान बिछा कर नक्सली अपने हथियार यहां खुलेआम सजा कर रखते थे।

छत्तीसगढ़ में नक्सली शहीदी सप्ताह मना रहे हैं। इस मौके पर उन्होंने बंद भी बुलाया है। पर बंद के पहले ही दिन सुकमा में नक्सलियों को बड़ा झटका लगा। सुकमा में 14 नक्सलियों ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया।

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित नारायणपुर जिले में पुलिस ने एक स्पेशल स्कूल खोला है। यह स्कूल आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए है। इस स्कूल में फिलहाल 300 से ज्यादा नक्सली पढ़ाई कर रहे हैं।

स्थानीय पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार, दो नक्सलियों ने दंतेवाड़ा के पुलिस अधीक्षक अभिषेक पल्लव के सामने 20 जुलाई की शाम को आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस ने 21 जुलाई को इसकी जानकारी दी। इनमें से एक पर नकद इनाम था।

फिल्म की शूटिंग बिहार के गया शहर के सिंगरा स्थान के पास स्थित पहाड़ी वादियों और बेलागंज के एरकी गांव में की जा रही है। सीआरपीएफ इसे देश भर में प्रदर्शित करेगी।

इन दिनों कुकानार थाना प्रभारी संजय सिंह के नेतृत्व में पुलिस लगातार स्कूलों में आश्रम, छात्रावासों और गांव-गांव में बाल अपराध तथा बाल अधिकार के संबंध में लगातार बैठकें और कार्यक्रम आयोजित कर एक जन-जागरूकता अभियान चला रही है।

समर्पण करने वाले नक्सलियों को खुद ग्रामीणों ने पुलिस के सुपुर्द किया। समर्पण करने वाले नक्सली कई हिंसक घटनाओं में शामिल थे। ये सभी प्रशासन की नीति से प्रभावित होकर नक्सली मुख्यधारा में लौट आए हैं। समर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को प्रशासन की पुनर्वास योजनाओं का लाभ दिया जाएगा।

बीते 5 साल के आंकड़ों ने नक्सलवाद का दंश झेल रहे लोगों को आशा की किरण दिखाई है। ये किरण धुंधली नहीं पड़नी चाहिए। किसी भी कीमत पर कोताही नहीं बरती जानी चाहिए क्योंकि अगर कोई भी कसर बाकी रह गई तो नक्सली फिर से मजबूत होने लगेंगे और ये कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता।

एक सरेंडर कर चुकी महिला नक्सली एसपी के पास बच्चे को लेकर पहुंचती है। कहती है- "सर, मेरा बच्चा अब 3 साल का हो गया है, इसे स्कूल भेजना चाहती हूं। एसपी कहते हैं- "तुम्हारा सूरज, हमारे लिए 'नई सुबह का सूरज' जैसा है। इसके लिए मैंने पास के स्कूल में बात कर ली है कोई समस्या नहीं है।"

साल 2009 में 9 साल की इस मासूम को जब झारखंड से नक्सलियों ने अगवा किया तो उसे जरा भी इल्म नहीं था कि उसके साथ क्या हुआ। सारंडा के जगलों में जब करीब 400 नक्सलियों के बीच एक दिन इस लड़की ने खुद को पाया तो हक्का-बक्का रह गई।

अमीशा और सबेरा, दोनों ने जियान प्राथमिक विद्यालय में वर्ग पांच तक पढ़ाई की है। परिवार की आर्थिक स्थिति बदहाल होने के कारण इन दोनों ने पढ़ाई छोड़ दिया था। इस मामले में पुलिस के वरीय पदाधिकारियों से परिजनों ने संपर्क कर गुहार लगाया था।

नक्सल प्रभावित राज्यों में सरकार की योजनाओं और पुनर्वास नीतियों का असर देखने को मिल रहा है। इन इलाकों में नक्सलियों का आत्मसमर्पण जारी है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में कोंटा पुलिस को एक बार फिर कामयाबी मिली है।

नक्सली इलाके के होनहारों को कलम के बदले बंदूक की शिक्षा देना चाहते थे। लेकिन अब यहां रहने वाले बच्चों को आशा की नई किरण नजर आई है।

इस नक्सली पर दो राज्यों को मिलाकर कुल 13 लाख का ईनाम घोषित था।

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में दो नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें से एक इनामी नक्सली है।

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