विकास का पहिया

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) से नक्सलवाद (Naxalism) को उखाड़ फेंकने के लिए सरकार और प्रशासन पूरी तरह कमर कस चुके हैं। नक्सिलयों (Naxals) की जड़ खोदने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

झारखंड (Jharkhand) के नक्सल प्रभावित (Naxal Area) खूंटी जिले के गुनी गांव में कुल 117 परिवार हैं। यह गांव दूसरे गावों के लिए एक मिसाल बनने की राह पर चल पड़ा है। गांव की स्थिति 6 महीने पहले कुछ अलग थी।

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में नक्सलवाद को रोकने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। सभी जिलों के एसपी को प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

बिहार में विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) होने वाले हैं। लोग अपने मताधिकार का प्रयोग कर अपने विधायक चुनेंगे, जो अपने इलाके में विकास को गति देने का काम करेंगे।

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के में लाल आतंक का गढ़ कहे जाने वाले बस्तर (Bastar) पुलिस सामुदायिक पुलिसिंग (Community Policing) के तहत सराहनीय पहल करने जा रही है।

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के नक्सल प्रभावित इलाकों (Naxal Area) को विकास से जोड़ने का काम तेजी से चल रहा है। इन इलाकों में पीएम ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत अब तक 1380 सड़कों के अंतर्गत सात हजार 228 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है।

केंद्र सरकार नक्सलवाद (Naxalism) की समस्या को विकास के जरिए हल करने की तैयारी कर रही है। पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स के साथ-साथ तीन मंत्रालयों को संयुक्त रूप से शामिल करने की रणनीति बनाई जा रही है।

Jharkhand: भेलवाडीह गांव के बच्चे खेलों में काफी दिलचस्पी लेते हैं। लेकिन खेल के क्षेत्र में आगे कैसे बढ़ा जाए, ये उन्हें नहीं पता है।

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के धुर नक्सल बस्तर (Bastar) 21 सितंबर से जगदलपुर से रायपुर और हैदराबाद के लिए हवाई यात्री सेवा शुरू हो रही है। इसके संचालन के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की पांच सदस्यीय टीम 20 सितंबर को जगदलपुर पहुंच गई थी।

Angrotha: सूखे कुएं से लेकर हैंडपंप तक, सब पानी दे रहे हैं। इन सबसे सूखी हुई बछेड़ी नदी में एक बार फिर पानी बहने की उम्मीद जगी है।

नक्सल प्रभावित राज्य छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में विकास की बयार बहने लगी है। नक्सलियों के खिलाफ की जा रही सख्ती से प्रदेश में लाल आतंक की जड़ें भी लगातार कमजोर हो रही हैं।

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में नक्सलियों (Naxalites) के खिलाफ लड़ाई जोरों पर है। नक्सलियों (Naxals) की नकेल कसने के लिए सुरक्षाबल मुस्तैद हैं। अब नक्सलियों के गढ़ में विकास पर जोर दिया जा रहा है।

झारखंड में रहने वाले आदिम जनजाति परिवारों की किस्मत बदलने वाली है। सरकार ने इस जनजाति के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

झारखंड (Jharkhand) के नक्सल प्रभावित पश्चिमी सिंहभूम की महिलाओं ने अपनी लगन की दम पर एक छोटी सी कोशिश से शुरुआत की और अब उसके बड़े परिणाम सामने आने लगे हैं।

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाके (Naxal Area) की लड़कियों के लिए जितना शिक्षा और स्वरोजगार आवश्यक है, उतनी ही आत्मरक्षा भी। इसलिए नक्सल इलाके की लड़कियों को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दी जा रही है।

इनमें से कई बच्चे ऐसे हैं, जिन्होंने अपनी पीढ़ियों में पहली बार मैट्रिक की परीक्षा पास की है। ये बच्चे साइबर कैफे की सहायता से आगे की पढ़ाई की व्यवस्था कर रहे हैं।

दरअसल बीते कुछ समय से बस्तर के स्थानीय नक्सली लगातार लाल आतंक का रास्ता छोड़ रहे हैं और मुख्यधारा में जुड़ रहे हैं। इसी वजह से नक्सलियों का जनाधार गिरता जा रहा है।

यह भी पढ़ें