विकास का पहिया

छत्तीसगढ़ के बस्तर का वह इलाका जहां कभी नक्सलियों (Naxals) की गोलियों की आवाज गूंजती थी वहां अब विकास की लहर दौड़ रही है। लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

सामुदायिक पुलिसिंग के तहत सीआरपीएफ (CRPF) की 22वीं बटालियन की ओर से झारखंड के हजारीबाग और चतरा जिले के सीमावर्ती इलाके के अनगडा पंचायत में सामग्री वितरण शिविर का आयोजन किया गया।

सीआरपीएफ (CRPF) की 195वीं वाहिनी ने एक अनूठे अभियान की शुरुआत की है। जिसके तहत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के स्कूली छात्रों को सीआरपीएफ कैम्प का भ्रमण कराया जा रहा है।

अपनी कल्पनाशीलता से कई तरह के अविष्कार कर चुके मो. जुनैद ने बढ़ते प्रदूषण और असंतुलित होते पर्यावरण को देखते हुए जुगाड़ से बैट्री से चलने वाली इलेक्ट्रिक स्कूटी (Electric Scooty) बनाकर सबको हैरत में डाल दिया है।

शहीद सशस्त्र और अर्धसैनिक बलों के जवानों के बच्चों को 10वीं-12वीं परीक्षा में ढ़ील जिन छात्रों की प्रैक्टिकल परीक्षा छूट...

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान को एक बार फिर मात खानी पड़ी। 15 जनवरी को UNSC में कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के सिर्फ चीन का साथ मिला।

इन इलाकों में स्वास्थ्य समस्याओं की गंभीरता को देखते हुए यहां के स्थानीय प्रशासन ने एक बीच का रास्ता निकाला...

छत्तीसगढ़ राज्य का बस्तर जिला, एक ऐसा क्षेत्र जो दशकों से नक्सलवाद (Naxalism) की समस्या से जूझ रहा है। यहां...

झारखंड का लातेहार जिला अति नक्सल (Naxal) प्रभावित है। यहां के लोग सालों से लाल आतंक के साए में रह...

सीआरपीएफ (CRPF) गांव से कभी बाहर नहीं निकले नक्सल प्रभावित इलाकों के युवाओं को जागरूक करने के उद्देश्य से उन्हें भ्रमण पर भेजने का एक अभिनव प्रयास कर रही है।

नक्सल प्रभावित झारखंड की राजधानी रांची जिला मुख्यालय से लगभग 27 किलोमीटर दूर ओरमांझी ब्लॉक के टुंडाहुली पंचायत के दो गांव आरा और केरम में 110 घर हैं। जिसमें लगभग 800 लोग रहते हैं।

झारखंड की सीमा से लगे छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले का चांदो इलाका एक दौर में नक्सल आतंक से जूझ रहा था। यहां नक्सलियों (Naxals) की दहशत की वजह से विकास का कोई काम नहीं हो पाता था।

बिहार के नक्सल (Naxal) प्रभावित इलाकों में रहने वाले युवाओं ने मिसाल कायम किया है। ये उन सभी के लिए प्रेरणा श्रोत हैं जो तमाम मुश्किलों के बावजूद अपने सपनों को जीना चाहते हैं।

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) का दंतेवाड़ा जिला सालों से लाल आतंक से जूझ रहा है। वहां की धरती न जाने कितनी बार नक्सलियों के खून-खराबे की गवाह बनी है। पर नक्सलियों के इस गढ़ में अब बदलाव आता दिख रहा है।

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा (Dantewada) जिले के नीलावाया गांव की सड़क को नक्सलियों ने करीब 17 जगहों पर काट दिया था। नक्सलियों ने सड़क पर 3 से 4 फीट के बड़े-बड़े गड्‌ढे़ कर दिए थे।

गरीबी और बेरोजगारी की वजह से पूर्व बिहार के जमुई, मुंगेर, लखीसराय और बांका के युवा आसानी से नक्सलियों के बहकावे में आ जाते हैं। यही वजह है कि इन इलाकों में नक्सलियों को अपनी जड़ मजबूत करने का मौका मिला।

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले के भैरमगढ़ पातरपारा में स्थित सीआरपीएफ (CRPF) 199वीं बटालियन के जवान इन दिनों नक्सल प्रभावित गांवों में जा कर गांव वालों को टेलीफिल्म के माध्यम से जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं।

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