विकास का पहिया

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) का दंतेवाड़ा जिला सालों से लाल आतंक से जूझ रहा है। वहां की धरती न जाने कितनी बार नक्सलियों के खून-खराबे की गवाह बनी है। पर नक्सलियों के इस गढ़ में अब बदलाव आता दिख रहा है।

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा (Dantewada) जिले के नीलावाया गांव की सड़क को नक्सलियों ने करीब 17 जगहों पर काट दिया था। नक्सलियों ने सड़क पर 3 से 4 फीट के बड़े-बड़े गड्‌ढे़ कर दिए थे।

गरीबी और बेरोजगारी की वजह से पूर्व बिहार के जमुई, मुंगेर, लखीसराय और बांका के युवा आसानी से नक्सलियों के बहकावे में आ जाते हैं। यही वजह है कि इन इलाकों में नक्सलियों को अपनी जड़ मजबूत करने का मौका मिला।

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले के भैरमगढ़ पातरपारा में स्थित सीआरपीएफ (CRPF) 199वीं बटालियन के जवान इन दिनों नक्सल प्रभावित गांवों में जा कर गांव वालों को टेलीफिल्म के माध्यम से जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं।

झारखंड (Jharkhand) के धुर नक्सल प्रभावित इलाकों के हालात अब बदलते नजर आ रहे हैं। किसी जमाने में नक्सलियों के खौफ से चुनाव का बहिष्कार करने वाले और नारे लगाने वाले खुद लोगों से मतदान की अपील कर रहे हैं।

झारखंड के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्य तेजी से चल रहा है। इन इलाकों में विकास की योजनाएं पहुंचाकर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की सरकार की पूरी कोशिश है।

छत्तीसगढ़ के कोंडागांव (Kondagaon) जिले का नक्सल प्रभावित क्षेत्र मर्दापाल और धनोरा। यहां के युवा लाल आतंक के साए में पले, गांव की दहलीज से कभी बाहर नहीं निकल पाए थे, वही युवा अब सामुदायिक पुलिसिंग के सहारे खेल प्रतियोगिताओं में अपना परचम लहरा रहे हैं।

झारखंड (Jharkhand) का पाकुड़ जिला जहां रोजगार का कोई भी साधन नहीं है। जंगल-झाड़ और बंजर जमीन के साथ-साथ समुचित रोजगार का संसाधन नहीं होने के कारण यहां के लोगों के लिए बेरोजगारी एक श्राप बनकर रह गई थी।

बाधाएं चाहे कितनी भी बड़ी हों, यदि हौसले बुलंद हैं तो सफलता मिलनी तय है। इस बात को सच कर दिखाया है नक्सल प्रभावित इलाके के दो एथलीटों ने।

बिहार का गया (Gaya) जिला दशकों से लाल आतंक की गिरफ्त में है। यह क्षेत्र आज भी नक्सली हिंसा का दंश झेल रहा है। पुलिस और नक्सली मुठभेड़ यहां के लिए आम बात है।

महिलाओं ने दिखाई हिम्मत, अपने दम पर बनाया नदी पर पुल, नदी जल संग्रह से शुरू किया कृषि कार्य, गांव में आई हरियाली ।

नक्सल प्रभावित गांव में रहने वाली महिलाओं ने दिखाई अपनी ताकत, झारखंड लाइवलीहुड प्रमोशन सोसायटी द्वारा दिया गया पशु सखी का प्रशिक्षण। 

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले के उसूर ब्लॉक मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर स्थित अतिसंवेदनशील ग्राम पंचायत मल्लेमपेंटा में 14 साल से बंद पड़े स्कूल को फिर से खोला गया।

गांव के लोगों को एहसास होने लगा कि नक्सली सिर्फ उनका इस्तेमाल कर रहे हैं और बदले में उन्हें छल रहे हैं। इसके बाद इन गांवों के लोगों ने नक्सलियों का विरोध करते हुए उन्हें गांव से ही भगा दिया।

साल 2004 में छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर के भैरमगढ़ तहसील के सरपंच और एक अन्य की हत्या नक्सलियों ने की थी। मां ने बच्चों का भविष्य बनाने के लिए उन्हें वनवासी आश्रम भेज दिया।

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