Entertainment

एक बस कण्डक्टर से लेकर एक एक्टर बनने और फिर एक सामाजिक कार्यकर्ता से भारत सरकार में मंत्री तक का सफर तय करने वाले सुनील दत्त (Sunil Dutt) की जीवन यात्रा एक मिसाल है। 

माधुरी दीक्षित (Madhuri Dixit) को कई बार 'फिल्म फेयर अवार्ड्स' एवं अन्य अवार्ड्स से नवाजा गया। उन्हें फिल्म 'दिल' (1990), 'बेटा' (1992), 'हम आपके हैं कौन' (1994), 'दिल तो पागल है' (1997) के लिए 'सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर अवार्ड' तथा फिल्म देवदास के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का स्टार स्क्रीन अवार्ड (2002) मिला।

इसके उपरांत उन्होंने (Mrinal Sen) जो भी फिल्में बनाईं, वह राजनीति से प्रेरित थी, जिसके कारण वह मार्क्सवादी कलाकार के रूप में जाने गए। वह समय पूरे भारत में राजनीतिक उतार-चढाव का समय था। विशेषकर कलकत्ता और उसके आस-पास के क्षेत्र इससे ज्यादा प्रभावित थे, जिसने नक्सलवादी विचारधारा को जन्म दिया|

भारत के टेलीविजन इतिहास में सबसे लोकप्रिय सीरियल रामायण में सीता का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री दीपिका चिखलिया (Dipika Chikhlia) का आज जन्मदिन है।

कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद सुनील दत्त की नौकरी एक एड एजेंसी में लगी। यहीं से उन्होंने रेडियो सीलोन में रेडियो जॉकी बनने का रास्ता पकड़ा। रेडियो जॉकी के रूप में वो काफी पसंद किए गए।

यह भी पढ़ें