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बस्‍तर लोकसभा सीट पर 11 अप्रैल को पहले चरण के मतदान के दौरान नक्‍सलियों ने चुनावी प्रक्रिया में बाधा डालने की कोशिश की। नक्‍सलियों ने मतदान दल पर ओरछा हेलीपेड के पास फायरिंग की। दल के सुरक्षाबलों की जवाबी कार्रवाई में एक नक्‍सली के मारे जाने की भी खबर है।

लोकसभा चुनाव 2019 के पहले चरण में 18 राज्यों और 2 केंद्र-शासित प्रदेशों में मतदान हुए। जिसमें कुल 91 लोकसभा सीटों पर वोट डाले गए। चुनाव आयोग ने चुनाव के पुख्ते इंतजाम कर रखे थे।

लोकसभा चुनाव के पहले चरण में 18 राज्यों और 2 केंद्र-शासित प्रदेशों में मतदान हुए। जिसमें कुल 91 लोकसभा सीटों पर वोट डाले गए। चुनाव आयोग ने चुनाव के पुख्ते इंतजाम कर रखे थे। प्रशासन भी पूरी मुस्तैदी से शांतिपूर्ण मतदान कराने में लगा रहा। बावजूद इसके कई जगहों से छुटपुट हिंसा की खबरें आईं।

पहले चरण के चुनावी दंगल में कुल 1279 उम्मीदवार मैदान में हैं। 14 करोड़ 20 लाख, 54 हजार, 978 मतदाता इनका फैसला करेंगे। इनमें 7 करोड़ 21 लाख पुरुष मतदाता और 6 करोड़ 98 लाख महिला मतदाता हैं। इनके लिए 1.70 लाख मतदान केंद्र बनाए गए हैं।

दशकों से नक्सली हिंसा का दंश झेलने वाली छत्तीसगढ़ की धरती पर आज भी लोकतंत्र बेहद दृढ़ता से खड़ा है। नक्सली हिंसा का गवाह रहा भारत का यह राज्य लोकतंत्र के इस महापर्व को खूब हर्षोल्लास के साथ मनाता आया है। नक्सलियों के लाख कोशिशों के बावजूद भी यहां के लोगों का भारतीय लोकतंत्र में विश्वास क़ायम है। इनका यही विश्वास नक्सलवाद की हार है।

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के मानपुर थाना के महाराष्ट्र सीमा के पास बुकमरका पहाड़ी में 10 अप्रैल को पुलिस ने धावा बोल कर नक्सली शिविर को ध्वस्त कर दिया। काफी देर तक चली फायरिंग के दौरान नक्सलियों ने आइईडी ब्लास्ट भी किए और फिर पुलिस को भारी पड़ता देख मोर्चा छोड़कर वहां से भाग खड़े हुए।

लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2019) के लिए होने वाले मतदान से एक दिन पहले 10 अप्रैल को महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में सीआरपीएफ (CRPF) की पेट्रोलिंग टीम पर नक्सलियों ने हमला किया। विधायक भीमा मंडावी के काफिले पर हमले के अगले ही दिन नक्सलियों ने सीआरपीएफ जवानों पर हमला किया। नक्सलियों ने गढचिरौली के इट्टापल्ली के गट्टा इलाके में सीआरपीएफ के 191 बटालियन पर आईईडी हमला किया।

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में 11 अप्रैल की सुबह सुरक्षाबलों ने चार नक्सलियों को गिरफ्तार किया है। ये किसी अप्रिय घटना को अंजाम देने की फिराक़ में थे। इन चारों की गिरफ़्तारी बेदरे क्षेत्र में सुबह मतदान से थोड़ी देर पहले ही हुई है। गिरफ्तार नक्सलियों के पास से तीन देशी असलहे बरामद हुये हैं।

पहले चरण में 20 राज्यों की 91 लोकसभा सीटों पर मतदान आरंभ हो गया है। पोलिंग बूथ पर सुबह से ही लोग पहुंचने लगे थे। ज्यादातर पोलिंग बूथ पर वोट डालने के लिए लोगों की लाइन लगी हुई है। खास बात ये है कि वोट डालने आए लोगों में महिलाओं की संख्या भी अच्छी खासी है।

लोकतंत्र का महापर्व बस शुरू होने ही वाला है। सत्रहवीं लोकसभा के गठन के लिए देश के 29 राज्यों और 7 केंद्र-शासित प्रदेशों के कुल 543 लोकसभा सीटों पर चुनाव की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। देशभर में 2019 के आम चुनाव 7 चरणों में कराए जायेंगे। जिसमें 11 अप्रैल से 19 मई 2019 के बीच मतदान होंगे। चुनाव के परिणाम 23 मई को घोषित किये जाएंगे।

छत्तीसगढ़ में लोकसभा के पहले और दूसरे चरण के मतदान 11 अप्रैल और 18 अप्रैल को होने हैं। तीसरे चरण के मतदान 23 अप्रैल को होंगे। चुनाव आयोग ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव के लिए तीनों चरण के मतदान अपने तय कार्यक्रम के अनुसार ही होंगे।

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में 9 अप्रैल को नक्सलियों ने एक बड़े हमले को अंजाम दिया। 2019-लोकसभा चुनाव से ठीक दो दिन पहले नक्सलियों ने IED ब्लास्ट कर भाजपा विधायक भीमा मंडावी समेत पांच लोगों को मौत के घाट उतार दिया।

छत्तीसगढ़ में एक हफ्ते के भीतर यह तीसरा नक्सली हमला है। नक्सली लगातार बड़ा नुकसान पहुंचाने की कोशिश में थे। हाल ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से पहले भी नक्सलियों ने पखांजुर के माहला इलाके में बीएसएफ के चार जवानों की हत्या कर दी।

भीमा मंडावी विधानसभा में भाजपा विधायक दल के उपनेता थे। मंडावी दूसरी बार विधायक चुने गए थे। दंतेवाड़ा जिले के गदापाल निवासी मंडावी 2008 में विधायक चुने गए थे।

9 अप्रैल को दोपहर जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में आतंकियों ने आरएसएस नेता और उनके सुरक्षा में तैनात पीएसओ को गोली मार दी। आतंकी मौके से फरार हो गए।

लोकसभा चुनाव (Loksabha Election 2019) से ठीक पहले नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में एक बड़ा हमला किया है। इस हमले में बस्तर के इकलौते बीजेपी विधायक भीमा मंडावी की मौत हो गई है। वहीं, उनकी सुरक्षा में तैनात 4 जवान शहीद भी हो गए हैं।

मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सपूत का परिवार दर-दर की ठोकरें खा रहा है। अपना अधिकार पाने के लिए यह परिवार व्यवस्था से लड़ रहा है। जिस शख़्स ने इस देश के लिए अपनी जान गंवा दी, आज उसी शहीद के मां-बाप सरकारी सिस्टम की लापरवाही का शिकार हैं।

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