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अनमोल दा नक्सली संगठन भाकपा माओवादी का स्पेशल एरिया कमेटी सदस्य है। इस इनामी नक्सली के खिलाफ चक्रधरपुर रेल थाना में हत्या और लूट के मामले दर्ज हैं।

पुलिस के जवानों ने तेतर टोली के समीप घेराबंदी कर रखी थी, इसी बीच नक्सलियों का दस्ता मौके पर पहुंच गया।

Birth Anniversary: आज जन्मदिन है उस नायब फनकार का जिनकी कलम से निकले गीतों के बिना हमारी आजादी का जश्न अधूरा है।

हजारीबाग में इचाक के फूरका जंगल से टीएसपीसी (तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी) के तीन हार्डकोर नक्सली दो देसी कार्बाइन के साथ गिरफ्तार किए गए।

जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में आतंकियों ने सीआरपीएफ के गश्ती दल पर हमला किया।

धीरेंद्र गंझू को हत्या के मामले में साल 2008 में गिरफ्तार कर कुडू थाना पुलिस द्वारा जेल भेजा गया था। वह साल 2011 में जेल से बाहर आ गया था।

हथियारों के जखीरे में 1 देशी रॉकेट लॉन्चर, भरमार बंदूक, रिवॉल्वर बरामद किया गया। इसके साथ ही जवानों ने हथियार बनाने के सामान सहित दैनिक उपयोग का सामान भी जब्त किया।

लगभग एक दर्जन हथियारबंद नक्सली नवामुड़ा गांव में स्थित तेंदूपत्ता गोदाम पहुंचे थे। नक्सलियों के इस दल में महिला नक्सली भी शामिल थीं।

नर्मदा और उसके पति किरण को महाराष्ट्र पुलिस ने ओडिशा से गिरफ्तार किया है। नर्मदा की 20 सालों से पुलिस तलाश कर रही थी। नर्मदा महाराष्ट्र के वेस्ट जोनल में सब कमांड की प्रमुख है।

सुरक्षाबलों को खुफिया जानकारी मिली थी कि एक घर में 2 आतंकवादी छुपे हुए हैं। जिसके बाद सुरक्षाबलों ने बारामूला जिले के सोपोर में 11 जून की शाम को सर्च ऑपरेशन शुरू किया।

जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच हुई मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने दो आतंकियों को मार गिराया। दोनों ही आतंकवादी इस्लामिक स्टेट की कश्मीर शाखा आईएसजेके आतंकी समूह से जुड़े हुए थे।

मृत किसान देवेंद्र कुमार कटेंद्र लखनपुरी इलाके के चिनौरी गांव का रहने वाला था। नक्सलियों ने पिता-पुत्र दोनों को अगवा कर लिया था।

चंदौती थाना क्षेत्र के इंग्लिश गांव से हार्डकोर नक्सली शकर यादव को पकड़ा गया। उस वक्त शंकर अपने घर पर ही था। पुलिस के अनुसार, शंकर यादव नक्सली जयराम यादव के समूह का सदस्य है।

पामेड़ थाना से एरिया डॉमिनेशन के लिए निकली हुई सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम ने मिलिशिया कमांडर अर्जुन कुंजाम को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार नक्सली एक दर्जन से भी अधिक जवानों की हत्या का आरोपी है।

सेना और पुलिस के जवानों की टीम ने पूरे इलाके को घेर कर तलाशी अभियान शुरू किया। सुरक्षाबलों को एक पहाड़ी मिली जिसका अगला भाग थोड़ा कटा हुआ था। उसे सूखे पौधों से ढक कर रखा गया था। सुरक्षाबलों को शक हुआ। उन्होंने पौधों को हटाना शुरू किया तो एक छोटा सा खुला भाग मिला। जो पहाड़ी के अंदर बने हुए गुफा में जाता था।

स्पेशल सेल ने कुल 11 बड़े आतंक-विरोधी आभियान चलाए, जिनमें से 4 तो बीते चार महीनों में ही चलाए गए। दिल्ली पुलिस के ये ऑपरेशंस केवल दिल्ली तक ही सीमित नहीं थे। बल्कि इसके तहत जम्मू-कश्मीर, नेपाल सीमा और पूर्वोत्तर भारत में भी संदिग्ध आतंकियों की धरपकड़ की गई।

अब सवाल यह है कि नक्सलियों को आखिर नक्सली पुनर्वास नीति लाने की जरूरत क्यों पड़ी? दरअसल बीहड़ों और पहाड़ों में छिपे रहने वाले नक्सली अब पूरी तरह कमजोर पड़ चुके हैं।

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