सच के सिपाही

Independence Day (Swatantrata Diwas) 2019: परम वीर चक्र, महावीर चक्र और वीर चक्र से युद्ध काल में सर्वोच्च बलिदान के लिए नवाजा जाता है जबकि अशोक चक्र, कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र शांति काल में सर्वोच्च सेवा और बलिदान के लिए दिया जाता है।

जीतेंद्र कुमार हमेशा के लिए दुनिया को अलविदा कह गए। कुमार बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के दुभा गांव के रहने वाले थे। वे 31 साल के थे। उन्होंने 2011 में सीआरपीएफ ज्वाइन किया था।

धर्म सिंह तोमर का जन्म 1974 में हुआ था। पांच-बहनों में वे सबसे बड़े थे। वे 1996 को सेना में भर्ती हुए। कारगिल युद्ध में दुश्मनों के छक्के छुड़ाने के बाद वह ग्रेनेडियर्स में शामिल हुए और मिसाइल पॉयलट बन गए थे।

मुठभेड़ के दौरान आतंकियों की एक गोली यूपी के मथुरा जिले के रहने वाले रामवीर सिंह को आकर लगी और वो शहीद हो गए। कहा जा रहा है कि इस गोलीबारी में रामवीर सिंह ने भी कई आतंकियों को अपनी गोली का शिकार बनाया।

देश में चाहे चुनाव का माहौल हो, कानून व्यवस्था पर आंच आई हो, किसी तरह की आपातकालीन स्थिति हो, नक्सलियों से निपटना हो या फिर सीमा पर आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब देना हो...CRPF ने हमेशा ही अपने अदम्य साहस के दम पर देश का सीना फख्र से चौड़ा कर दिया है।

सौरभ कालिया की उम्र उस वक्त 23 साल थी और अर्जुन राम की महज 18 साल। कैप्टन सौरभ कालिया सेना में नियुक्ति के बाद अपनी पहले महीने की सैलरी भी नहीं उठा पाए थे।

Kargil Vijay Diwas 2019: आज कारगिल युद्ध की बीसवीं बरसी है इस दिन को पूरे देश में कारगिल विजय दिवस के रूप में बड़े ही गर्व के साथ मनाया जाता है। भारत ने 1999 में करगिल युद्ध के दौरान 26 जुलाई को जीत हासिल की थी। भारत और पाकिस्तान के बीच ये युद्ध 60 दिन तक चला था ।

करगिल विजय दिवस: मेहर सिंह के मुताबिक, हमारे वीर जवानों ने पत्थरों की आड़ में सारी रात गुजारी। उनकी ए और बी कंपनी अपने टास्क को पूरा कर आगे बढ़ चली तो कमांडिंग ऑफिसर ले. कर्नल योगेश कुमार जोशी ने उनके कंपनी कमांडर कैप्टन विक्रम बत्रा को प्वाइंट 5140 पर कब्जा करने का निर्देश दिया।

Kargil Vijay Diwas 2019: करगिल युद्ध के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल एएन औल शायद इकलौते ऐसे कमांडर थे जिन्होंने यह भीषण युद्ध अपने बेटे के साथ मिलकर लड़ा था। साल 1999 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में लेफ्टिनेंट जनरल औल 56 माउंटेन ब्रिगेड के कमांडर थे।

कारगिल युद्ध में वायुसेना ने अपने ऑपरेशन का नाम रखा था-‘सफेद’। इस ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए हमारे वायु दूतों ने आसमान से गोले बरसाने शुरू किए।

करगिल में जब भारत-पाकिस्तान के बीच घनघोर युद्ध छिड़ा तो भारतीय जवानों ने हिमालय से भी ऊंची साहस का परिचय देते हुए इसी दिन विजयी पताका लहराया और तब से हम इस दिन को विजय दिवस के तौर पर मनाते हैं।

बटला हाउस फिल्म बटला हाउस एनकाउंटर पर आधारित है। इस एनकाउंटर में दिल्ली पुलिस के स्पेशल-सेल के डेकोरेटेड ऑफिसर मोहन चंद्र शर्मा शहीद हो गए थे।

एक औरंगजेब कुर्बानी देता है तो कई और औरंगजेब वतन की हिफाजत के लिए अपनी बलि देने के लिए उठ खड़े होते हैं। इसका जीवंत उदाहरण हैं शहीद औरंगजेब के दो भाई।

जान हथेली पर रख कर लड़की की जिंदगी बचाने वाले दोनों सीआरपीएफ के जवानों का नाम एमजी नायडू और नाला उपेंद्र है। ट्वीटर पर इनके अदम्य साहस का वीडियो काफी पसंद किया जा रहा है।

हाईस्कूल की पढ़ाई के लिए वो कानपुर आ गए। कानपुर शहर में ही उनकी मुलाकात चंद्रशेखर आजाद से हुई। उन दिनों चंद्रशेखर आजाद झांसी, कानपुर और इलाहाबाद के इलाकों में अपनी क्रांतिकारी गतिविधियां चला रहे थे।

1999 में पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़ने के लिए ऑपरेशन विजय चलाया गया था। करीब 18000 फीट की ऊंचाई पर कारगिल में यह जंग लड़ी गई थी।

बसंती के मुताबिक, उनके पिता फेदलिस एक्का भारतीय जवान थे। वे 31 साल पहले श्रीलंका में शहीद हो गये थे। लेकिन आज तक शहीद के आश्रितों को किसी प्रकार की सरकारी सहायता नहीं मिल पाई है।

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