सच के सिपाही

करगिल युद्ध में भारत के हाथों अपने सैनिकों के हताहत होने पर पाकिस्तान परमाणु हथियारों को तैनात करने और उसके संभावित इस्तेमाल की तैयारी कर रहा था।

लड़ाकू विमान जरिए पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाकों पर नजर रखकर उन्हें निशाना बनाया गया था। युद्ध के दौरान ग्रुप कैप्टन के. नचिकेता (Captain K Nachiketa) ने शौर्य की ऐसी छाप छोड़ी थी जिसे यादकर आज हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।

भारतीय सेना (Indian Army) की आर्टिलरी रेजिमेंट (Artillery Regiment) ने 28 सितंबर को अपना 193वां स्थापना दिवस मनाया। सेना की उधमपुर स्थित नॉर्दन कमांड (Northern Command) ने इस खास मौके की बधाई भी दी है।

साल 1962 का भारत-चीन युद्ध (Indo-China War 1962) दो ऐसी सेनाओं के बीच लड़ा गया, जिसमें से एक पूरी तैयार थी तो दूसरी बिल्कुल भी नहीं। युद्ध में हमारे जवानों ने संख्या में कम होने के बावजूद चीनी सैनिकों का डटकर सामना किया था। हथियार कम पड़ने पर हैंड टू हैंड फाइट तक की थी।

भारत और चीन के बीच 1962 में भीषण युद्ध लड़ा गया था। चीन हमेशा से भारत की जमीन पर अपना कब्जा जमाने की फिराक में रहता है। हिमालयी बॉर्डर पर चीन के साथ भारत का सीमा विवाद सालों से चला आ रहा है।

18 सितंबर, 2016 को हुए उरी हमले में सीमा पार बैठे आतंकियों का हाथ बताया गया। भारत ने इस हमले का बदला लेने के लिए 28-29 सितंबर की दरम्यानी रात को पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक (Surgical Strike) को अंजाम दिया।

भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 में लड़ा गया कारगिल युद्ध (Kargil War)  हमारे सैनिकों की बहादुरी को बयां करता है। इस युद्ध में भारतीय सैनिकों ने ऐसा पराक्रम दिखाया था जिसे यादकर दुश्मन देश आज भी थर-थर कांप उठता होगा।

भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 में लड़े गए कारगिल युद्ध (Kargil War) में भारतीय सेना (Indian Army) ने बेहतरीन प्रदर्शन किया था। युद्ध में हमारे सैनिक दुश्मनों पर काल बनकर टूट पड़े थे

1962 के युद्ध के दौरान चीनी सेना ने जगह-जगह पोस्ट और सड़क का निर्माण कर दिया था जिसके जवाब में भारतीय सेना ने भी पोस्ट बना ली थी।

कारगिल (Kargil war) दुनिया की सबसे ऊंचाई पर लड़ा गया युद्ध था। इसमें पाकिस्तान के धोखे का भारत ने ऐसा जवाब दिया जिसे यादकर दुश्मन देश आज भी कांप उठता है।

भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 का कारगिल युद्ध (Kargil War) भारतीय सेना के शौर्य की कहानी को बखूबी बयां करता है। इस युद्ध में हमारे वीर सपूतों ने दुश्मनों को भगा-भगाकर मारा था।

रेड ईगल डिवीजन (4th infantry division) भारतीय सेना (Indian Army) की सबसे पुरानी इन्फेंट्री मानी जाती है। इसकी खासियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस डिवीजन को सबसे ज्यादा युद्धक पदक भी मिले हैं।

Gopalbabu Shukla मूल रूप से यूपी के कन्नौज के रहने वाले थे। परिजनों का कहना है कि सेना ने उन्हें अभी ये जानकारी नहीं दी है कि गोपालबाबू कैसे शहीद हुए।

Badole Umrao Naresh मूल रूप से नागपुर के रहने वाले थे। एक सीआरपीएफ अधिकारी ने बताया कि मोटरसाइकिल सवार आतंकी ने बांदीपोरा, चदूरा में CRPF पर हमला किया।

सेना नायक के पद से रिटायर होने वाले भरत सिंह के मुताबिक वह सर्चिंग ड्यूटी में थे तभी फायरिंग हो गई थी। गोली लगने पर मुझे मेडिकल स्टाफ ने संभाला।

Pakistan के रोड बनाने के चलते कच्छ के रण में झड़पें शुरू हो गई थीं। शुरू में तो इनमें केवल सीमा सुरक्षा बल ही शामिल थे, बाद में सेना भी शामिल हो गई।

Tanot Mata Mandir सेना के लिए आस्था के प्रतीकों में से एक है। जवान आज भी इस मंदिर का रख-रखाव खुद ही करते हैं। मंदिर का रख-रखाव सीमा सुरक्षा बल के जिम्मे है।