सच के सिपाही

अवधेश की शादी तीन साल पहले चंदौली के पूरवा गांव की रहने वाली शिल्पी से साथ हुई थी। इनका एक 2 साल का बेटा निखिल है। अभी बीते मंगलवार को शहीद अवधेश यादव घर से लौटकर ड्यूटी जॉइन किए थे। पर क्या पता था कि ये उनका आख़िरी सफ़र होगा।

एक साल पहले ही उनकी शादी हुई थी। उनकी सिर्फ दो माह की एक बच्ची है। वह चार दिन पहले ही छुट्टी बिताकर वापस जम्मू-कश्मीर ड्यूटी पर लौटे थे। रोहिताश अपने पीछे पत्नी और 2 माह की बच्ची छोड़ गए हैं।

आतंकवादियों के हमले में सिर्फ़ राम वकील शहीद नहीं हुए बल्कि एक पूरा परिवार उजड़ गया। कई सपने दफ़्न हो गए, कई उम्मीदें खत्म हो गईं।

तरफ अपने बेटे की शहादत पर गर्व है, तो दूसरी ओर सरकार पर गुस्सा भी है कि सरकार ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई सख्त कदम क्यों नहीं उठा रही है।

आज के दौर में जहां दोस्त, दोस्त का सगा नहीं होता, भाई का भाई से बैर है। वहीं सीआरपीएफ (CRPF)...

हिजबुल के आतंकी बुरहान बानी का एनकाउंटर के वक्त हालात बद से बदतर हो गए थे। उस बिगड़ते माहौल से निपटने के लिए जब इस महिला अफसर ने मोर्चा संभाला तो उपद्रवियों के पैर उखड़ गए।

कमर के नीचे का हिस्सा बुरी तरह जख्मी होने के बावजूद उनके हौसले पस्त नहीं हुए। वे असहनीय दर्द के बावजूद रेंगते हुए आगे बढ़ते रहे और उन्होंने आधा दर्जन नक्सलियों को मार गिराया।

मातृभूमि के प्रति प्यार और सर्वोच्च बलिदान के लिए उनकी तत्परता ने हमारे वीर जवानों की छोटी-सी टुकड़ी को दुश्मनों पर वार करते रहने के लिए हिम्मत दी। उन्होंने दुश्मनों के नापाक इरादों को ध्वस्त करने के लिए अंत तक मोर्चा संभाले रखा।

अकेले 200 नक्सलियों से लड़ते हुए के प्रसाद बाबू ने 9 नक्सलियों को मार गिराया। कई नक्सलियों को घायल कर दिया। बाद में प्रसाद बाबू को नक्सलियों ने पकड़ लिया। उन्हें टॉर्चर किया और उनकी हत्या कर दी।

उनके सिर पर काफी चोटें आई थीं। जख्मी होने के बावजूद नजीर वानी ने आतंकियों को भागने नहीं दिया। वह आतंकियों के भाग निकलने के रास्ते पर डटे रहे। उन्होंने दूसरे आतंकी को भी ढेर कर दिया। इस एनकाउंटर में वानी और उनके साथियों ने कुल 6 आतंकियों को मार गिराया था। इनमें से दो को वानी ने खुद मारा था।

ऑपरेशन आर्मी और सीआरपीएफ का साझा था। एक तरफ से आर्मी ने मोर्चा संभाल रखा था, तो दूसरी तरफ से...

इनकी सबसे बड़ी कामयाबी स्पेशल एरिया कमेटी के मेंबर अनूप ठाकुर को जिंदा गिरफ्तार करना रहा है। यह इनकी दिलेरी का ही इनाम है कि इनकी जाबांजी के किस्सों को कॉमिक्स में भी उतारा गया है।

नक्सलियों से मुठभेड़ जारी थी कि तभी सूचना मिली, यात्रियों से भरी एक बस गोलीबारी के बीच फंस गयी है। विनोद कुमार अपने जान हथेली पर रख गोलियों के बीच से निकल बस तक पहुंच गए और बस को गोलीबारी के बीच से हटा गांव के लिए सुरक्षित रवाना किया।

संजुक्ता पराशर... ये नाम दहशतगर्दों की नींद हराम करने के लिए काफी है। असम की आयरन लेडी के नाम से मशहूर आईपीएस अधिकारी संजुक्ता की बहादुरी की जितनी तारीफ की जाए कम है।

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