War of 1971: जब वायुसेना ने चौरतरफा घेरेबंदी कर ढाका में गवर्नर हाउस पर बरसाए ताबड़तोड़ बम, जानें युद्ध की कहानी

भारत और पाकिस्तान के बीच 1971 में लड़े गए युद्ध (War of 1971) में पाकिस्तान के हजारों सैनिकों ने सरेंडर कर दिया था। भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) ने इस युद्ध में बेहद ही अहम भूमिका निभाई थी।

War of 1971

War of 1971 (File Photo)

War of 1971: गवर्नर हाउस पर बमबारी और भारतीय हमले की तीव्रता देखकर तत्कालीन पाकिस्तानी जनरल नियाजी घबरा गया था। उसने युद्ध विराम का संदेश भिजवाया।

भारत और पाकिस्तान के बीच 1971 में लड़े गए युद्ध (War of 1971) में पाकिस्तान के हजारों सैनिकों ने सरेंडर कर दिया था। भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) ने इस युद्ध में बेहद ही अहम भूमिका निभाई थी। महज तीन मिनट के हवाई हमले ने पाकिस्तान को हार स्वीकार करने और सरेंडर के लिए हामी भरने पर मजबूर कर दिया था।

ये हमला पाकिस्तान की धरती पर ही उनके सबसे महत्वपूर्ण इलाके पर हुआ था। वायुसेना ने ढाका में गवर्नर हाउस पर हमला बोला था। भारत की सेनाओं ने ढाका की तीन तरफ से घेरेबंदी कर ली और ढाका में गवर्नर हाउस पर बमबारी शुरु की थी। दरअसल हमारी सेना को जानकारी मिली थी कि गवर्नर हाउस में पाकिस्तान के बड़े अधिकारियों की मीटिंग होगी।

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जानकारी के पुख्ता होने के साथ ही हमले की प्लानिंग बन गई थी। इस हमले का मकसद था कि पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर करना और हुआ भी ऐसा ही। गवर्नर हाउस पर बमबारी कर पाकिस्तान को आभास हो गया था कि वे भारत के खिलाफ किसी भी कीमत पर इस युद्ध में जीत हासिल नहीं कर सकता।

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गवर्नर हाउस पर बमबारी और भारतीय हमले की तीव्रता देखकर तत्कालीन पाकिस्तानी जनरल नियाजी घबरा गया था। उसने युद्ध विराम का संदेश भिजवाया, पर भारतीय सेनाध्यक्ष सैम मानेकशॉ से साफ कर दिया कि युद्ध विराम नहीं बल्कि पाकिस्तान को सरेंडर करना होगा। इसके बाद पाकिस्तान के 90 हजार सैनिकों ने महज 10 हजार भारतीय सैनिकों के समाने घुटने टेक दिए थे।

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