War of 1965: कच्छ से ताशकंद तक कब, क्या हुआ? जानें पूरा घटनाक्रम

भारत और पाकिस्तान के बीच 1965 में लड़े गए भीषण युद्ध (War of 1965) में भारतीय वीर जवानों के शौर्य और पराक्रम के आज भी चर्चे होते हैं। पाकिस्तानी सेना को हमारे जवानों ने भगा-भगाकर मारा था।

War of 1965

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War of 1965: पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने कश्मीर हड़पने के बहुत बड़ी साजिश रची थीं जिसे जवानों ने हर मोर्चे पर फेल कर दिया था।

भारत और पाकिस्तान के बीच 1965 में लड़े गए भीषण युद्ध (War of 1965) में भारतीय वीर जवानों के शौर्य और पराक्रम के आज भी चर्चे होते हैं। पाकिस्तानी सेना को हमारे जवानों ने भगा-भगाकर मारा था। पाकिस्तानी सेना ने भारत को कमजोर समझ कर भारी भूल की थी, जिसके बदले उसे हार का सामना करना पड़ा।

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने कश्मीर हड़पने के बहुत बड़ी साजिश रची थी जिसे जवानों ने हर मोर्चे पर फेल कर दिया था। युद्ध में कच्छ से ताशकंद तक कब क्या हुआ, इसका पूरा घटना क्रम बेहद ही रोमांचक है। इस घटनाक्रम के जरिए आप जान सकेंगे किस तरह दोनों देशों के बीच भारत को बढ़त मिल रही थी।

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बात करें सबसे पहले 25 मई, 1965 की तो इस दिन पाक ने कच्छ में ऑपरेशन डेजर्ट हॉक लॉन्च किया था और 30 जून को सीजफायर किया था। इसके बाद 5 अगस्त, 1965 पाक का कश्मीर में ऑपरेशन जिब्राल्टर लॉन्च हुआ। श्मनों ने 8 सितंबर 1965 को खेमकरण सेक्‍टर के उसल उताड़ गांव पर धावा बोल दिया।

ये हमला पैदल सैन्य टुकड़ी के साथ पैटन टैंक के साथ किया गया था। कश्मीर हड़पने का पाक सेना का यह एक बड़ा ही दुस्साहसी प्लान था। 28 अगस्त 1965 को जवाब में भारत का हाजीपीर और अन्य कश्मीरी इलाकों पर कब्जा सफल रहा। 1 सितंबर, 1965 के दिन पाकिस्तान का ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम लॉन्च हुआ। इसके पांच दिन बाद ही 6 सितंबर को भारत ने पंजाब फ्रंट खोला और लाहौर की ओर बढ़ चला।

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अगले हीन दिन भारत ने पाक के सियालकोट में बढ़त ली और फिर अगले दिन दुश्मनों ने राजस्थान के मुनाबाउ पर हमला किया। अब 8 से 10 सितंबर तक खेमकरण असल उत्तर में पैटन तबाह किए गए। 22 सितंबर तक सभी फ्रंट्स पर युद्ध और फिर सीजफायर और 11 जनवरी, 1966 को ताशकंद में समझौता।

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