War of 1965: 18 साल की उम्र में ज्वॉइन की Indian Air Force, 2 साल बाद ही हो गए शहीद

पाकिस्तान भारत को हर मोर्चे पर कमजोर मान रहा था। पाकिस्तान ने सोचा था कि 1962 में चीन के हाथों मिली हार के बाद भारत कमजोर पड़ चुका है। पाकिस्तान की यह भूल उसे सबसे ज्यादा भारी पड़ गई। जंग हुई और पाकिस्तान को भारी नुकसान झेलना पड़ा।

Shambhuram

फाइल फोटो

War of 1965: 22 जुलाई, 1945 को जन्में शंभूराम  ने सिर्फ 18 साल की उम्र में ही वायु सेना (Indian Air Force) ज्वॉइन कर ली थी। 1965 के भारत-पाक युद्ध में वे जामनगर (जामनगर) में दुश्मन के हमले में शहीद हो गए थे।

भारत और पाकिस्तान के बीच साल 1965 में युद्ध (War of 1965:) लड़ा गया था। पाकिस्तान भारत को हर मोर्चे पर कमजोर मान रहा था। पाकिस्तान ने सोचा था कि 1962 में चीन के हाथों मिली हार के बाद भारत कमजोर पड़ चुका है। पाकिस्तान की यह भूल उसे सबसे ज्यादा भारी पड़ गई। जंग हुई और पाकिस्तान को भारी नुकसान झेलना पड़ा।

पाकिस्तानी सेना फायदे में होने के बावजूद भारतीय सेना (Indian Army) की रणनीति और पराक्रम के सामने युद्ध हार गई। इस युद्ध में पाकिस्तान को चौतरफा नुकसान झेलना पड़ा था। कश्मीर हड़पने आया पाकिस्तान भारत के सामने कहीं नहीं टिक सका। भारतीय सैनिकों का जज्बा और पराक्रम देख दुश्मन देश आज भी कांप उठता है।

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काला पीपल की ढाणी के शंभूराम ने साल 1965 में पाकिस्तान के नापाक मंसूबों को ध्वस्त करने में अहम भूमिका निभाई थी। 22 जुलाई, 1945 को जन्में  शंभूराम ने सिर्फ 18 साल की उम्र में ही वायु सेना (Indian Air Force) ज्वॉइन कर ली थी। 1965 के भारत-पाक युद्ध में वे जामनगर (जामनगर) में दुश्मन के हमले में शहीद हो गए थे।

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उस समय उनकी उम्र 20 साल थी। शंभूराम भादल का शव कभी उनके परिजनों को नहीं मिल पाया। हालांकि, शंभूराम के शहीद होने का प्रमाण 19 सितंबर, 1999 को एयर चीफ मार्शल पत्र दे चुके हैं, जो आज भी परिजनों के पास है।

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