1965 का युद्ध: भारतीय सेना ने इन टैंकों के सहारे पैटन टैंकों का किया था मुकाबला, Pak को दी थी मात

PAK ने जंग में अपने 170 से ज्यादा टैंकों को खो दिया था, इसमें 97 पैटन टैंक तो ‘असल उत्तर’ की लड़ाई में खत्म हो गए। वहीं INDIAN ARMY ने केवल 42 टैंक ही खोए।

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पाक ने जंग (WAR) में अपने 170 से ज्यादा टैंकों को खो दिया था। जिसमें 97 पैटन टैंक तो ‘असल उत्तर’ की लड़ाई में ही खत्म हो गए थे। जबकि भारतीय सेना (INDIAN ARMY) ने केवल 42 टैंक ही खोए।

युद्ध में मशीनें चाहें कितनी ही एडवांस क्यों न हो लेकिन युद्ध में जीत सैनिकों की हिम्मत और पराक्रम के चलते ही होती है। ऐसा ही 1965 के युद्ध में भी देखने को मिला था। भारतीय सेना (INDIAN ARMY) ने पुराने टैंकों की मदद से पाकिस्तान के एडवांस टेक्नालॉजी वाले टैंकों के बावजूद दुश्मनों को हरा दिया था। पाकिस्तानी सेना के पास टैंक तो थे लेकिन ऐसे जवान नहीं थे।

106 एमएम आरसीएल की रेंज 500-600 गज होती है। ये टैंक के खिलाफ बहुत प्रभावशाली हथियार है. लग जाए तो बचता नहीं है। कुछ टैंक एक दिन पहले लगाई गई एंटी टैंक माइंस के शिकार हुए थे। कई टैंकों को सिर्फ एक मामूली लाइट मशीन गन से ही नेस्तनाबूद कर दिया गया था।

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अब्दुल हमीद को असाधारण वीरता दिखाने के लिए भारत का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र दिया गया क्योंकि उन्होंने ऐसे ही सात टैंकों को ध्वस्त किया था। युद्ध में यूं तो हमारे सभी जवानों का योगदान रहा लेकिन कुछ जवान ऐसे हैं जिनकी शौर्य की गाथा आज भी सुनाई देती है। उनमें से एक अब्दुल हमीद भी थे।

पाक ने जंग में अपने 170 से ज्यादा टैंकों को खो दिया था। जिसमें 97 पैटन टैंक तो ‘असल उत्तर’ की लड़ाई में ही खत्म हो गए थे। जबकि भारत ने केवल 42 टैंक ही खोए और 41 डैमेज टैंकों को दोबारा बना लिया गया।

सेना ने तय प्लान के मुताबिक हर कदम फूंक-फूंक कर रखा और हर एक क्षेत्र पर कब्जा पाया। पाकिस्तान ने 1965 में गुस्ताखी कर सेना के जवानों को ललकार दिया था। भारतीय सेना ने युद्ध में ऐसा शौर्य दिखाया था जिसे याद कर पाकिस्तानी सेना के जवान आज भी कांप उठते होंगे।

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