1965 युद्ध का पहला चरण था ‘ऑपरेशन डेजर्ट हॉक’, पाकिस्तान ने कच्छ के एक बहुत बड़े हिस्से पर हक जताया था

सिर्फ 910 किलो मीटर के क्षेत्र को ही पाकिस्तान को सौंपा गया था। 30 जून 1965 को कच्छ सिंध समझौता के तहत ये जमीन पाक को सौंपी गई तो उसके तेवर और बढ़ गए।

IED blast

प्रतीकात्मक तस्वीर।

India Pakistan War 1965: सिर्फ 910 किलोमीटर के क्षेत्र को ही पाकिस्तान को सौंपा गया था। जैसे ही 30 जून 1965 को कच्छ सिंध समझौता के तहत ये जमीन पाकिस्तान को सौंपी गई तो उसके तेवर और ज्यादा बढ़ गए।

भारत और पाकिस्तान के बीच 1965 में लड़े गए युद्ध में भारतीय सेना ने शानदार प्रदर्शन किया था। युद्ध में पाकिस्तानी सैनिकों को बुरी तरह से खदेड़ा गया था। इस युद्ध में पाकिस्तान ने तीन मुख्य चरण में युद्ध को अंजाम दिया था जिनमें से सबसे पहला चरण ‘ऑपरेशन डेजर्ट हॉक’ था।

इस ऑपरेशन की शुरुआत में सबसे पहले दोनों देशों के सीमा सुरक्षा बल शामिल थे लेकिन बाद में जैसे-जैसे हालात बिगड़ते गए तो दोनों देशों की आर्मी इसमें शामिल हो गई। इस दौरान लगातार हमले जारी रहे थे। हर दिन के हमलों की वजह से बाद में एक बड़ी जंग लड़ी गई।

दरअसल इस ऑपरेशन के दौरान ही पाकिस्तान ने कच्छ के एक बहुत बड़े हिस्से पर अपना हक जमा लिया था। पाकिस्तान ने इस इलाके के करीब 9100 किलोमीटर पर अपना हक जताया था लेकिन भारत ने इसे पूरी तरह से खारिज कर दिया था।

हालांकि सिर्फ 910 किलो मीटर के क्षेत्र को ही पाकिस्तान को सौंपा गया था। जैसे ही 30 जून 1965 को कच्छ सिंध समझौता के तहत ये जमीन पाकिस्तान को सौंपी गई तो उसके तेवर और ज्यादा बढ़ गए। उसने बाकी जमीन पर भी अपना ही हक जमाया।

पाकिस्तान की इस हरकत से भारत भी भड़क उठा। पाकिस्तान ने इस ऑपरेशन के बाद ऑपरेशन जिब्राल्टर लॉन्च शुरू किया जो कि नाकामयाब रहा। इसके बाद तीसरा ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम लॉन्च किया गया। जिसके तहत वह अखनूर की तरफ बढ़ आया था। पाकिस्तान के हर ऑपरेशन को फेल कर भारतीय सेना ने पाकिस्तान को बुरी तरह से हराया।

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